हिंदी फिल्म इंडस्ट्री में छिड़ी पीआर की जंग को लेकर एक्ट्रेस तापसी पन्नू ने खुलकर मोर्चा खोल दिया है। टाइम्स नाउ न्यूज को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा कि ये खेल अब एकदम नए स्तर पर पहुंच चुका है, जहां लोग न सिर्फ खुद को ऊपर चढ़ाने के लिए, बल्कि प्रतिद्वंद्वियों को धक्का देने के लिए भी खर्च कर रहे हैं। तापसी ने सवाल उठाया कि सफलता आखिर किसी और की हार पर टिकी कैसे हो गई?
पिछले डेढ़-दो सालों से तापसी ने जानबूझकर अपनी स्पीड कम की है। उन्होंने बताया, "मैं अपने कामों में इतनी व्यस्त थीं, लेकिन अब चीजें धीमी की हैं। तब एहसास हुआ कि पीआर का ये खेल कहीं और निकल गया। या तो आप खुद को प्रमोट करने के लिए पैसे देते हैं, जो पुराना तरीका था। या फिर किसी को नीचे धकेलने के लिए।" उनका कहना है कि ये ट्रेंड खतरनाक है, क्योंकि अब लोग नकली पर्सनैलिटी गढ़ रहे हैं। एक्ट्रेस का कहना है कि "बस एक हिट फिल्म से काम नहीं चलेगा, मजबूत आवाज भी चाहिए चाहे वो उधार की ही क्यों न हो। लेकिन ये आवाज अगर आपके काम से मेल न खाए, तो पूरी तरह झूठी साबित हो जाती है।"
उन्होंने यह भी कहा कि इंडस्ट्री में यह खेल इतना गहरा है कि कई बार दर्शक और मीडिया भी इस चाल का हिस्सा बन जाते हैं। तापसी के मुताबिक, यह सिस्टम कलाकारों के बीच अनुचित प्रतिस्पर्धा पैदा करता है और असली टैलेंट को पीछे धकेल देता है।
करियर की बात करें तो तापसी ने 'पिंक', 'थप्पड़', 'बेबी' जैसी फिल्मों से अपनी पहचान बनाई है। हाल ही में 'खेल खेल में' आईं, जिसमें अक्षय कुमार, वाणी कपूर और फरदीन खान थे। अब नेटफ्लिक्स पर देवाशीष मखीजा की 'गांधारी' में बदला लेने वाली कहानी में नजर आएंगी, जिसे कनिका ढिल्लों प्रोड्यूस कर रही हैं। तापसी की बेबाकी हमेशा सुर्खियां बटोरती रही है।