Kumar Sanu: 'वो दौर ही कुछ और था', कुमार सानू ने याद किया 90 के दशक का जादू और 'दिल है कि मानता नहीं' का अनसुना किस्सा

Kumar Sanu: दिग्गज गायक कुमार सानू ने 90 के दशक के संगीत को याद करते हुए फिल्म 'दिल है कि मानता नहीं' के एक बेहतरीन लेकिन अनरिलीज्ड गाने का खुलासा किया है। उन्होंने आज के संगीत की तुलना में उस दौर की सादगी, लाइव रिकॉर्डिंग के अनुभव और शब्दों की गहराई को कहीं अधिक रूहानी बताया।

अपडेटेड Mar 27, 2026 पर 6:18 PM
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बॉलीवुड के 'मेलोडी किंग' कुमार सानू की आवाज आज भी जब कानों में पड़ती है, तो 90 के दशक की यादें ताजा हो जाती हैं। हाल ही में एक बातचीत के दौरान, सानू दा ने संगीत के उस सुनहरे दौर को याद किया और फिल्म 'दिल है कि मानता नहीं' से जुड़ा एक ऐसा राज खोला, जिसे जानकर उनके फैंस हैरान रह गए। उन्होंने बताया कि उस फिल्म के लिए एक ऐसा युगल गीत रिकॉर्ड किया गया था जो आज तक रिलीज ही नहीं हो पाया।

खोया हुआ वो जादुई गाना

कुमार सानू ने बताया कि 1991 की ब्लॉकबस्टर फिल्म 'दिल है कि मानता नहीं' के लिए उन्होंने एक बहुत ही खूबसूरत गाना गाया था। यह गाना आज भी उनकी यादों में बसा हुआ है। उन्होंने अफसोस जताते हुए कहा, "कभी-कभी कुछ बेहतरीन चीजें किन्हीं कारणों से दुनिया के सामने नहीं आ पातीं। वह गाना संगीत और भावनाओं का एक अद्भुत मेल था, लेकिन फिल्म की लंबाई या किसी तकनीकी कारण से उसे शामिल नहीं किया गया।" उनके अनुसार, वह गाना आज के दौर के रीमिक्स गानों से कहीं ज्यादा रूहानी था। सानू दा का मानना है कि उस वक्त के गानों में जो 'सादगी' और 'मासूमियत' थी, वह आज के संगीत में कहीं खो गई है।

90 के दशक का वो गोल्डन एरा


इंटरव्यू के दौरान कुमार सानू ने उस दौर की रिकॉर्डिंग के अनुभवों को साझा किया। उन्होंने बताया कि पहले गाने केवल 'आवाज' नहीं होते थे, बल्कि उनमें एक कहानी होती थी।

* लाइव रिकॉर्डिंग का रोमांच: उस समय बड़े ऑर्केस्ट्रा के साथ लाइव रिकॉर्डिंग होती थी, जहां एक भी गलती होने पर पूरा गाना फिर से गाना पड़ता था। इसी 'प्रेशर' ने गायकों को और निखारा।

* शब्दों की अहमियत: उन्होंने जोर देकर कहा कि 90 के दशक में 'गीतकार' शब्दों पर बहुत मेहनत करते थे, जिससे गाने सीधे दिल को छूते थे।

आज के संगीत पर सानू दा की बेबाक राय

आज के डिजिटल दौर और ऑटो-ट्यून के इस्तेमाल पर कुमार सानू ने चुटकी लेते हुए कहा कि तकनीक ने काम आसान तो कर दिया है, लेकिन 'अहसास' कम हो गया है। उन्होंने कहा, "आजकल गाने बनाए नहीं जाते, बल्कि असेंबल किए जाते हैं। 90 के दशक में हम गाने जीते थे।" हालांकि, उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि हर दौर का अपना संगीत होता है, लेकिन क्लासिक गानों की जगह कोई नहीं ले सकता।

फैंस के लिए एक पुरानी याद

कुमार सानू की इस बातचीत ने सोशल मीडिया पर पुरानी यादों का सैलाब ला दिया है। फैंस मांग कर रहे हैं कि अगर संभव हो तो उस 'अनरिलीज्ड' गाने को अब किसी डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रिलीज किया जाना चाहिए। 'आशिकी' से लेकर 'साजन' तक, कुमार सानू ने जो विरासत छोड़ी है, वह आज भी नई पीढ़ी के गायकों के लिए एक स्कूल की तरह है।

वर्क फ्रंट और आगे का सफर

66 वर्ष की उम्र में भी कुमार सानू का जलवा कायम है। वे दुनिया भर में कॉन्सर्ट्स कर रहे हैं और हाल ही में उन्होंने कुछ इंडिपेंडेंट म्यूजिक प्रोजेक्ट्स पर भी काम किया है। उनका मानना है कि जब तक उनके गले में सरस्वती का वास है, वे अपने फैंस का मनोरंजन करते रहेंगे। कुमार सानू का यह इंटरव्यू हमें याद दिलाता है कि संगीत केवल शोर नहीं, बल्कि सुकून का नाम है। 'दिल है कि मानता नहीं' का वो अनसुना गाना भले ही हमें सुनने को न मिले, लेकिन सानू दा की यादें उस दौर की चमक को बरकरार रखती हैं।

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