विवादों से घिरी फिल्म 'द केरल स्टोरी 2' को लेकर बहस तेज हो गई है। 27 फरवरी को रिलीज होने वाली इस फिल्म पर कुछ लोग प्रोपेगेंडा का ठप्पा लगा रहे हैं, लेकिन प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह ने साफ शब्दों में खारिज करते हुए कहा कि ये फिल्म केरल या उसके लोगों का अपमान नहीं करती। उन्होंने जोर देकर बताया कि फिल्म समाज में व्याप्त एक गंभीर बुराई को उजागर करने का प्रयास है, न कि किसी राज्य को बदनाम करने का।
विपुल शाह ने मीडिया से बातचीत में स्पष्ट किया, "हम केरल के पीछे पड़े नहीं हैं। केरल तो भगवान की भूमि है। हम बस चाहते हैं कि वहां की इस बुराई का जल्द खात्मा हो।" उन्होंने पहली फिल्म के आंकड़ों पर उठे सवालों का भी जिक्र किया। शाह का कहना था कि सरकार ने पहले भाग के बाद कोई ठोस कार्रवाई नहीं की, इसलिए ही सीक्वल जरूरी हो गया। फिल्म में धर्मांतरण और जबरन विवाह जैसे संवेदनशील मुद्दों को केरल, राजस्थान व मध्य प्रदेश के संदर्भ में दिखाया गया है। प्रोड्यूसर ने 32,000 वीडियो साक्ष्यों का हवाला देते हुए कहा कि ये पीड़ितों की सच्ची कहानियां हैं, जिन्हें नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
विवाद के केंद्र में निर्देशक का स्टैंड
निर्देशक कामाख्या नारायण सिंह ने भी बचाव में उतरते हुए कहा, "मैं डॉक्यूमेंट्री फिल्ममेकर रहा हूं। हर प्रोजेक्ट में गहन रिसर्च करता हूं। अगर कुछ गलत साबित हो गया, तो फिल्में बनाना छोड़ दूंगा।" उन्होंने अनुराग कश्यप जैसे आलोचकों को जवाब देते हुए फिल्म की प्रामाणिकता पर भरोसा जताया। केरल सीएम पिनाराई विजयन ने इसे नफरत फैलाने वाली फिल्म बताया, जिस पर शाह ने कटाक्ष किया कि पीड़ितों की चिंता छोड़ राजनीति हो रही है।
कानूनी चुनौतियां और रिलीज की उम्मीद
केरल हाईकोर्ट में फिल्म की रिलीज पर रोक की याचिका दायर हुई है, जिसमें राज्य की छवि खराब करने का आरोप है। फिर भी, टीम आलोचना को प्रेरणा मान रही है। विपुल ने पैरेंट्स व लड़कियों से अपील की, "ये फिल्म आंखें खोलेगी।" पहली फिल्म की सफलता के बाद ये सीक्वल समाज को आईना दिखाने का दावा कर रही है। विवादों के बीच रिलीज का इंतजार बढ़ रहा है – क्या ये सच उजागर करेगी या और बंटवारे को हवा?