Hina Khan: 'जिंदगी जीने का तरीका यही'... हिना खान ने कैंसर से जंग पर खुलकर बात की

Hina Khan: टीवी की मशहूर अदाकारा हिना खान ने हाल ही में मुंबई में आयोजित Illuminate 3.0 ऑन्कोलॉजी लीडरशिप टाउनहॉल में अपनी कैंसर जर्नी साझा की। यह आयोजन सर एच.एन. रिलायंस फाउंडेशन अस्पताल द्वारा किया गया था, जिसमें डॉक्टरों, हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स, कैंसर सर्वाइवर्स और केयरगिवर्स ने हिस्सा लिया।

अपडेटेड Feb 14, 2026 पर 5:16 PM
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टीवी की पॉपुलर एक्ट्रेस हीना खान ने Illuminate 3.0 इवेंट पर स्टेज 3 ब्रेस्ट कैंसर से अपनी जंग की दिल दहला देने वाली कहानी शेयर की। जून 2024 में डायग्नोसिस के बाद कीमो, सर्जरी और इम्यूनोथेरेपी की चुनौतियों के बावजूद वे मुस्कुराती रहीं। यह इमोशनल बातचीत फैंस के लिए इंस्पिरेशन बन गई।

डायग्नोसिस का पहला झटका

हीना ने बताया कि फैमिली डिनर के दौरान पार्टनर रॉकी जायसवाल ने रिपोर्ट दिखाई, तो आंसू गिर पड़े। "10 मिनट तक चुप रही, लगा आसमान टूट गया। लेकिन फैमिली में कैंसर हिस्ट्री थी, फिर भी सोचा नहीं था मेरे साथ होगा।" सर्जरी 8 घंटे की बजाय 15 घंटे चली। OT से निकलते ही केयरगिवर्स को देख मुस्कुराईं, क्योंकि "वे हमसे ज्यादा सहते हैं। घर का माहौल हमेशा पॉजिटिव रखा।"

इलाज की कठिनाइयां और हिम्मत


कीमो से म्यूकोसाइटिस जैसी परेशानियां जैसे मुंह में दर्द, पैर सुन्न हुईं। फिर भी वर्कआउट जारी रखा। अब इम्यूनोथेरेपी पर हैं: "कीमो-सर्जरी खत्म, सब ठीक चल रहा। हिना खान ने बताया कि कैंसर से लड़ाई आसान नहीं थी, लेकिन उन्होंने इसे कभी “मौत की सज़ा” नहीं माना। उन्होंने कहा कि आज समय बदल चुका है लोगों में जागरूकता बढ़ी है और डॉक्टर लगातार कैंसर की शुरुआती जांच और इलाज पर जोर दे रहे हैं। हिना ने माना कि ऐसे इवेंट्स और मरीजों की कहानियां समाज को यह समझाने में मदद करती हैं कि कैंसर से डरना नहीं, बल्कि समय पर पहचान और सही इलाज से इसे हराया जा सकता है।

इस टाउनहॉल में हिना ने डॉक्टरों और अन्य कैंसर सर्वाइवर्स के साथ रैम्प वॉक भी किया। यह सिर्फ एक फैशन एक्ट नहीं था, बल्कि साहस और उम्मीद का प्रतीक था। उन्होंने कहा कि हर मरीज को अपनी कहानी साझा करनी चाहिए ताकि दूसरों को प्रेरणा मिले। उनका संदेश साफ था “हर दिन खुलकर जीना चाहिए।”

इंसानी जज़्बात और ताकत

हिना ने अपनी बातों में उस भावनात्मक संघर्ष का भी ज़िक्र किया जो कैंसर के दौरान हर मरीज झेलता है। उन्होंने बताया कि इलाज के दौरान शारीरिक और मानसिक चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन परिवार, दोस्तों और डॉक्टरों का साथ इंसान को मजबूत बनाता है। उनकी जर्नी ने वहां मौजूद लोगों को यह एहसास दिलाया कि कैंसर से लड़ाई सिर्फ दवाइयों से नहीं, बल्कि हिम्मत और पॉजिटिव सोच से भी जीती जाती है।

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