बॉलीवुड में किस्मत कब पलट जाए, कोई नहीं जानता। हाल ही में फिल्म 'धुरंधर: द रिवेंज' में अपने किरदार 'पिंडा' के लिए तारीफें बटोर रहे अभिनेता उदयबीर संधू ने अपनी जिंदगी के एक ऐसे मोड़ का खुलासा किया है, जिसने उन्हें बहुत कुछ सिखाया। उदयबीर ने बताया कि इम्तियाज अली की सुपरहिट फिल्म 'अमर सिंह चमकीला' के मुख्य किरदार के लिए वह एक मजबूत दावेदार थे, लेकिन अंत में यह भूमिका दिलजीत दोसांझ की झोली में चली गई।
गहरा शोध और ऑडिशन में सफलता
हिंदुस्तान टाइम्स के साथ बातचीत में उदयबीर ने साझा किया कि उन्होंने अमर सिंह चमकीला के किरदार के लिए जी-तोड़ मेहनत की थी। उन्होंने कहा, "मैंने चमकीला के रोल के लिए ऑडिशन दिया था। मैंने इस किरदार पर बहुत गहराई से रिसर्च की थी और मैं इसमें पूरी तरह डूब चुका था। मेकर्स को मेरा काम पसंद भी आया था और एक समय पर मैं ही उस रोल के लिए पहली पसंद माना जा रहा था।"
क्यों कटा उदयबीर का पत्ता?
जब सब कुछ सही चल रहा था, तो आखिर दिलजीत दोसांझ को क्यों चुना गया? इस पर उदयबीर ने बड़ी ही ईमानदारी से निर्देशक इम्तियाज अली के विजन का जिक्र किया। उन्होंने बताया, "इम्तियाज सर हमेशा से चाहते थे कि इस रोल को कोई गायक ही निभाए। उन्हें लगा कि एक गैर-गायक (Non-singer) शायद स्क्रीन पर वह जादू पैदा न कर पाए जो एक असली गायक कर सकता है।"
चूंकि दिलजीत दोसांझ पंजाब के सुपरस्टार सिंगर हैं, इसलिए मेकर्स ने अंततः उन पर भरोसा जताया। उदयबीर ने स्वीकार किया कि हालांकि उन्हें दुख हुआ, लेकिन वह दिलजीत के काम के प्रशंसक हैं। उन्होंने कहा, "जब मुझे पता चला कि दिलजीत को चुना गया है, तो मैं समझ गया कि फैसला क्यों लिया गया। उन्होंने फिल्म में कमाल का काम किया है, लेकिन अगर मुझे मौका मिलता तो मैं भी इसे बहुत अच्छे से निभाता।"
एक दरवाजा बंद हुआ, तो दूसरा खुला
किस्मत का खेल देखिए, जिस ऑडिशन की वजह से उदयबीर को मुख्य भूमिका नहीं मिली, उसी ऑडिशन ने उन्हें फिल्म में एक और अहम रोल दिला दिया। इम्तियाज अली उनके अभिनय से इतने प्रभावित थे कि उन्होंने उदयबीर को फिल्म में दिवंगत पंजाबी गायक शिंदा का किरदार निभाने का मौका दिया।
'संघर्ष ही कलाकार को बनाता है'
महज 27 साल के उदयबीर संधू का मानना है कि अभिनय की दुनिया में संघर्ष और हार बेहद जरूरी है। उन्होंने कहा, "अगर आपको शुरुआत में ही सब कुछ मिल जाए, तो वह एक तुक्का जैसा होता है। आप उतनी मेहनत करना छोड़ देते हैं। कलाकार के लिए वह 'हसल' और संघर्ष बहुत जरूरी है, जो उसे जमीन से जोड़े रखता है।"