उल्का गुप्ता आज 'द केरल स्टोरी 2' जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से सुर्खियों में हैं, लेकिन उनकी कहानी बचपन के संघर्षों से शुरू होती है। बिहार के सहरसा में जन्मीं उल्का ने महज 6 साल की उम्र में टीवी की दुनिया में कदम रखा, जहां उनके पिता गगन गुप्ता ने उनकी पहली ट्रेनिंग दी।
उल्का का परिवार मुंबई शिफ्ट हुआ तो पिता ने उनकी एक्टिंग स्किल्स को निखारना शुरू किया। 'रेशम डंख' से डेब्यू किया, फिर 'सात फेरे' में सावरी का बचपन निभाया। लेकिन असली कमाल 2009 में 'झांसी की रानी' में मनु बनकर किया। रानी लक्ष्मीबाई के बचपन का रोल निभाने के लिए दो महीने घुड़सवारी और तलवारबाजी सीखी। पिता ने घर पर ही रिहर्सल कराई, जिससे उल्का को इंडियन टेली अवॉर्ड मिला। वो कहती हैं, "पापा मेरे पहले गुरु थे, उनकी मेहनत ने मुझे स्टार बनाया।"
टीवी पर 'देवों के देव महादेव' में देवी कन्या कुमारी, 'शक्तिपीठ के भैरव' में पार्वती जैसे रोल्स निभाए। 2015 में तेलुगु डेब्यू 'आंध्रा पोरी' से लीड रोल किया, फिर 'रुध्रमादेवी' में सपोर्टिंग। 2022 में 'बन्नी चाउ होम डिलीवरी' से कमबैक। लेकिन 'द केरल स्टोरी' ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दी। 2026 में इसका सीक्वल आ रहा, जहां उल्का का रोल शानदार बताया जा रहा। उनकी बहुमुखी प्रतिभा ने फैंस को दीवाना बना दिया।
पर्सनल लाइफ और इंस्पिरेशन
उल्का के दो भाई-बहन गोया और जनमेजय हैं। रूसत्मजी इंटरनेशनल स्कूल से पढ़ाई की। वो शाहरुख खान की फैन हैं, जिनकी वजह से एक्टिंग चुनी। इंस्टाग्राम पर उनकी फिटनेस और फैमिली पिक्स वायरल रहती हैं। उल्का कहती हैं, "6 साल की उम्र से काम किया, लेकिन कभी शिकायत नहीं की। पिता की ट्रेनिंग आज भी साथ है।" आज 28 साल की उल्का हिंदी-तेलुगु इंडस्ट्री में छाई हैं।
उल्का के पास कई प्रोजेक्ट्स लाइनअप हैं। 'ध्रुव तारा' में राजकुमारी श्याममोहिनी का रोल किया। उनकी जर्नी साबित करती है कि मेहनत और फैमिली सपोर्ट से कुछ भी हासिल हो सकता। फैंस को 'द केरल स्टोरी 2' का बेसब्री से इंतजार। उल्का की ये प्रेरक कहानी हर स्ट्रगलिंग आर्टिस्ट के लिए मिसाल है।