‘वाराणसी’ के सेट पर अपने अनुभव को साझा करते हुए पृथ्वीराज सुकुमारन ने कहा, “जब आप ‘वाराणसी’ के सेट पर जाते हैं और एस.एस. राजामौली सर को कैमरे, मॉनिटर या कलाकारों के साथ काम करते देखते हैं, तो किसी ऐसे इंसान को लगेगा जो उन्हें नहीं जानता कि वह कोई नया निर्देशक है, जिसे 20-30 साल बाद अपनी पहली फिल्म बनाने का मौका मिला हो। वह अपने काम को लेकर इतनी ऊर्जा और उत्साह दिखाते हैं। उनसे सीखने वाली सबसे बड़ी बात यही है। मैंने उनसे ज्यादा मेहनती फिल्ममेकर के साथ कभी काम नहीं किया। अगर वह कहते हैं कि सुबह 7 बजे पहला शॉट होगा, तो महेश, प्रियंका और मेरे सेट पर पहुंचने से पहले ही वह जिम, रिहर्सल और असिस्टेंट्स के साथ सारी तैयारी पूरी कर चुके होते हैं। वह कलाकारों का इंतजार करते हैं और सेट छोड़ने वाले आखिरी शख्स भी वही होते हैं। हमारे लंच ब्रेक सिर्फ 20 मिनट के होते हैं।”