Vivek Oberoi: "मां, मेरे साथ ही ऐसा क्यों?" जब जीवन के सबसे अंधेरे दौर में टूट गए थे विवेक ओबेरॉय, बयां किया मां की ममता का 'जादू'

Vivek Oberoi: विवेक ओबेरॉय ने सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा करते हुए अपने जीवन के सबसे कठिन दौर को याद किया, जब वे पूरी तरह टूटकर अपनी मां की गोद में रोए थे। उन्होंने बताया कि उनकी मां के एक गहरे सवाल ने उन्हें फिर से खड़े होने की हिम्मत दी और अब वे अपनी पत्नी प्रियंका में भी वही ममतामयी 'जादू' देखते हैं।

अपडेटेड Mar 21, 2026 पर 5:47 PM
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बॉलीवुड अभिनेता विवेक ओबेरॉय ने हाल ही में सोशल मीडिया पर एक बेहद भावुक नोट साझा किया है, जिसने उनके प्रशंसकों की आंखों में आंसू ला दिए हैं। विवेक ने अपने जीवन के उस "सबसे अंधेरे अध्याय" (Darkest Chapter) को याद किया, जब वे पूरी तरह टूट चुके थे और उन्हें समझ नहीं आ रहा था कि वे इन मुश्किलों से कैसे बाहर निकलें।

दुनिया के सामने मुस्कान, अंदर से टूटे हुए विवेक

विवेक ने बताया कि सालों पहले एक ऐसा वक्त आया था जब उन्हें लगा कि दीवारें उनके चारों ओर सिमट रही हैं। बाहर की दुनिया के लिए वे एक बहादुर चेहरा बनाए हुए थे, लेकिन भीतर से वे पूरी तरह बिखर चुके थे। इस मानसिक और भावनात्मक थकान के बीच, उन्हें केवल एक ही जगह सुकून नजर आया उनकी मां की गोद।

मां की गोद और वो निशब्द कर देने वाला सवाल


विवेक ने साझा किया कि वे अपनी माँ के पास गए, एक छोटे बच्चे की तरह उनके फर्श पर बैठ गए और उनकी गोद में सिर रखकर फूट-फूटकर रोने लगे। उन्होंने अपनी मां से वही सवाल पूछा जो अक्सर हम सब जीवन के कठिन समय में पूछते हैं— "मां, मेरे साथ ही ऐसा क्यों? यह सब मेरे साथ ही क्यों हो रहा है?"

उनकी मां ने उन्हें कोई किताबी ज्ञान या सहानुभूति नहीं दी, बल्कि उनके बालों को सहलाते हुए एक ऐसा सवाल पूछा जिसने विवेक की सोच बदल दी। उनकी मां ने कहा, "बेटा, जब तुम ढेर सारे अवॉर्ड जीत रहे थे, क्या तब तुमने पूछा था कि 'मैं ही क्यों?' क्या तुमने तब पूछा था जब लाखों लोग तुम्हारा नाम चिल्ला रहे थे?"

जापानी कहावत और 'तीन चेहरे'

विवेक ने अपनी पोस्ट में एक प्रसिद्ध जापानी कहावत का भी जिक्र किया, जिसके अनुसार हर इंसान के तीन चेहरे होते हैं:

1. पहला चेहरा: जो हम दुनिया को दिखाते हैं।

2. दूसरा चेहरा: जो हम केवल अपने करीबी दोस्तों और परिवार को दिखाते हैं।

3. तीसरा चेहरा: जो हमारा असली अक्स होता है, जिसे हम कभी किसी को नहीं दिखाते— शायद अपनी मां के अलावा।

विवेक ने लिखा कि मां ही वह जादूगरनी है जो आपके सबसे कमजोर पहलुओं को देख सकती है और उन्हें आपकी ताकत में बदल सकती है।

पत्नी प्रियंका में देखते हैं वही परछाई

अपनी माँ के प्रति आभार व्यक्त करने के साथ-साथ, विवेक ने अपनी पत्नी प्रियंका की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि आज वे प्रियंका को अपने बच्चों के साथ वही 'जादू' करते हुए देखते हैं। प्रियंका अपने बच्चों के उस 'तीसरे चेहरे' को पहचानने की कोशिश करती हैं, ताकि वे कभी खुद को छिपाने की जरूरत महसूस न करें।

विवेक ओबेरॉय की यह कहानी केवल एक अभिनेता का संघर्ष नहीं, बल्कि हर उस व्यक्ति की कहानी है जो जीवन के उतार-चढ़ाव से गुजर रहा है। यह याद दिलाता है कि सफलता के शोर में हम भले ही अकेले हों, लेकिन माँ का निस्वार्थ प्रेम ही वह धुरी है जो हमें गिरकर फिर से उठने की शक्ति देती है।

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