भारत में हर 8 मिनट में एक महिला सर्वाइकल कैंसर के कारण अपनी जान गंवा रही है। चौंकाने वाली बात यह है कि 70-80% महिलाएं डॉक्टर के पास तब पहुंचती हैं जब कैंसर एडवांस स्टेज में होता है। डीडी न्यूज़ के 'टोटल हेल्थ पॉडकास्ट' में सर्वाइकल और एंडोमेट्रियल कैंसर पर ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) की प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की डॉक्टर प्रोफेसर ज्योति मीणा के साथ विशेष चर्चा की गई है।
इसमें उन्होंने बताया है कि इस बीमारी के संदर्भ में 40 की उम्र के बाद शरीर के किन संकेतों को नजरअंदाज करना भारी पड़ सकता है। उन्होंने ये भी बताया कि कैसे जागरूकता और समय पर जांच से इन जानलेवा बीमारियों को रोका जा सकता है।
सर्वाइकल कैंसर: एचपीवी वैक्सीन क्यों है जरूरी?
एक्सपर्ट डॉक्टर के मुताबिक सर्वाइकल कैंसर मुख्य रूप से 'ह्यूमन पैपिलोमा वायरस' (HPV) के कारण होता है। एचपीवी वैक्सीन (HPV Vaccine) प्राइमरी बचाव का तरीका है। डॉ. ज्योति के अनुसार, 9 से 14 साल की बच्चियों को यह वैक्सीन लगाना सबसे अधिक प्रभावी है क्योंकि इस उम्र में इम्यून रिस्पांस सबसे अच्छा होता है। 30 साल से ऊपर की हर महिला को नियमित रूप से 'पैप स्मीयर' (Pap Smear) या एचपीवी टेस्ट कराना चाहिए।
एंडोमेट्रियल कैंसर: खान-पान और लाइफस्टाइल का असर
डॉक्टर के मुताबिक एंडोमेट्रियल कैंसर (बच्चेदानी की परत का कैंसर) के मामले अब युवा महिलाओं में भी बढ़ रहे हैं। मोटापा (Obesity), पीसीओएस (PCOS), और हार्मोनल असंतुलन इसके प्रमुख कारण बनकर सामने आ रहे हैं। अगर महिलाओं में माहवारी में अनियमितता, मेनोपॉज के बाद ब्लीडिंग या बहुत ज्यादा खून आ रहा है, तो ये इस गंभीर बीमारी के शुरुआती लक्षण भी हो सकते हैं।
एक्सपर्ट सलाह: क्या कैंसर के बाद प्रेगनेंसी संभव है?
अगर कैंसर का पता शुरुआती चरणों (स्टेज 1 या 2) में चल जाए, तो सही इलाज के साथ प्रेगनेंसी की संभावना बनी रह सकती है। डॉ. मीणा बताती हैं कि 'ट्रैकलेक्टमी' जैसी सर्जरी और हार्मोनल ट्रीटमेंट से फर्टिलिटी को सुरक्षित रखने की कोशिश की जाती है।