2015 Hotel Fire Case: मुंबई होटल आगजनी मामले में 9 साल बाद मिला इंसाफ, परिजनों को 50-50 लाख रुपये मुआवजा देने का आदेश

2015 Mumbai Hotel Fire Case: अदालत ने बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) पर कर्तव्य का पालन करने में पूरी तरह विफल रहने का आरोप भी लगाया। मुंबई के कुर्ला स्थित 'होटल सिटी किनारा' में 16 अक्टूबर, 2015 को आग लग गई थी। इस आगजनी में आठ लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में से सात 18-20 वर्ष की आयु के छात्र थे। जबकि आठवां पीड़ित विरार का 31-वर्षीय डिजाइन इंजीनियर था

अपडेटेड Jun 11, 2025 पर 1:02 PM
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2015 Mumbai Hotel Fire Case: बॉम्बे हाई कोर्ट पीड़ितों के माता-पिताओं की याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था

2015 Mumbai Hotel Fire Case: बॉम्बे हाई कोर्ट ने मंगलवार (10 जून) को बृहन्मुंबई महानगर पालिका (BMC) को आदेश दिया कि वह 2015 में होटल में लगी आग में मारे गए आठ लोगों के परिजनों को 50-50 लाख रुपये का मुआवजा दे। अदालत ने बीएमसी पर कर्तव्य का पालन करने में पूरी तरह विफल रहने का आरोप भी लगाया। मुंबई के कुर्ला स्थित 'होटल सिटी किनारा' में 16 अक्टूबर, 2015 को आग लग गई थी। इस आगजनी में आठ लोगों की मौत हो गई थी। मृतकों में से सात 18-20 वर्ष की आयु के छात्र थे। जबकि आठवां पीड़ित विरार का 31-वर्षीय डिजाइन इंजीनियर था।

हाई कोरट् पीड़ितों के माता-पिताओं की उन याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा था, जिनमें लोकायुक्त के फरवरी 2017 के आदेश को रद्द करने की मांग की गई थी। लोकायुक्त ने आग की घटना की जांच का अनुरोध खारिज कर दिया था। लोकायुक्त ने उनकी याचिकाओं को खारिज करते हुए कहा था कि प्रत्येक को एक-एक लाख रुपये का मुआवजा दिया गया है। पीड़ित परिवारों ने मुआवजा राशि बढ़ाने की मांग की।

हाई कोर्ट ने मंगलवार को अपने फैसले में बीएमसी को 12 सप्ताह के भीतर प्रत्येक पीड़ित के परिवार को 50 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक अदालत ने कहा, "कार्रवाई करने में बीएमसी की विफलता के कारण होटल किनारा में अवैध गतिविधि बेरोकटोक जारी रही और अंततः आग की घटना घटित हुई तथा लोगों की जान चली गई।"


जस्टिस बीपी कोलाबावाला और जस्टिस फिरदौस पूनीवाला की पीठ ने कहा कि यह चौंकाने वाला है कि बीएमसी होटल के खिलाफ कोई कार्रवाई शुरू करने में विफल रही। जबकि उसे पता था कि होटल के पास अग्निशमन विभाग से अपेक्षित अनुमति नहीं है। अदालत ने कहा, "अगर बीएमसी ने तुरंत कार्रवाई की होती, तो आग की घटना निश्चित रूप से नहीं होती।"

पीठ ने कहा, "बीएमसी द्वारा बरती गयी लापरवाही और वैधानिक कर्तव्यों का उल्लंघन आग का एक संभावित कारण रहा और नगर निकाय को उसके अधिकारियों के कृत्य और चूक के लिए उत्तरदायी ठहराया जा सकता है।" अदालत ने कहा कि आठ लोगों की जान जाने से उनके परिवारों के संविधान के आर्टिकल 21 के तहत जीवन के अधिकार का घोर उल्लंघन हुआ है।

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि होटल ने लाइसेंस की कई शर्तों का उल्लंघन किया है, जिसमें 'मेजेनाइन फ्लोर' पर एक सेवा क्षेत्र का संचालन करना शामिल है। इस क्षेत्र को भंडारण क्षेत्र माना जाता था। पीठ ने कहा है कि होटल के पास अग्निशमन विभाग से अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) भी नहीं था।

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अदालत ने कहा कि होटल को फायर विभाग से कोई भी NOC प्राप्त किए बिना खानपान और आवास संबंधी लाइसेंस दिया गया था। जिस वक्त आग लगी तब आठ पीड़ित इस तल पर बैठे थे। सभी की मृत्यु हो गई। हाई कोर्ट ने कहा कि होटल में आग और आठ व्यक्तियों की मृत्यु रोकने में लापरवाही बरतने के लिए नगर निकाय के अधिकारियों को कोई सजा नहीं भुगतनी पड़ी।

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