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मिलिए महाराष्ट्र के 55 साल के इन टीचर से, 13 साल से एक बच्चे को पढ़ाने के लिए रोज 5 किलोमीटर पैदल करते हैं सफर

जीवन मिठारी कोल्हापुर के एक दूर-दराज जिला परिषद स्कूल में एक छात्र को पढ़ाने के लिए 13 सालों से महाराष्ट्र के जंगल इलाके से गुजरते हुए 5 किलोमीटर पैदल चलकर जाते हैं।

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड Sep 21, 2026 पर 4:34 PM
मिलिए महाराष्ट्र के 55 साल के इन टीचर से, 13 साल से एक बच्चे को पढ़ाने के लिए रोज 5 किलोमीटर पैदल करते हैं सफर
कवलटेक धनगरवाड़ा में मिथारी की पोस्टिंग कोई ऐसी चीज नहीं थी, जिसे उन्हें मजबूरी में स्वीकार करना पड़ा हो। उन्होंने 2013 में खुद ही ट्रांसफर की मांग की थी।

महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में जिला परिषद के एक स्कूल तक पहुंचने के लिए 55 साल के टीचर जीवन मिठारी पिछले 13 सालों से हर दिन लगभग 5 किलोमीटर पैदल चलते हैं। यह रास्ता ऐसे इलाके से गुजरता है जहां गौर (जंगली भैंसे) और तेंदुए अक्सर देखे जाते हैं। सिंधुदुर्ग बॉर्डर के पास गगनबावड़ा तालुका के एक छोटे से गांव, कवलटेक धनगरवाड़ा में स्थित इस स्कूल तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है। यहां बिजली भी नहीं है। साथ ही अभी यहां आधिकारिक तौर पर सिर्फ एक ही स्टूडेंट का नाम दर्ज है।

मुश्किल रास्ते और गांव की घटती आबादी के बावजूद मिथारी स्कूल जाते रहे हैं। उन्होंने PTI को बताया कि भले ही बच्चे कम हों, लेकिन वे पढ़ाना जारी रखना अपनी जिम्मेदारी समझते हैं। मिथारी को रोजाना जंगल वाले इलाके से गुजरना पड़ता है, जहां अक्सर गौर और तेंदुए दिखाई देते हैं। ग्रामीणों ने उन्हें सिखाया है कि अकेले जानवर या जानवरों के झुंड से आमना-सामना होने पर अलग-अलग तरह से कैसे निपटना है। ये जोखिम उनकी दिनचर्या का हिस्सा बन गए हैं, हालांकि वे मानते हैं कि यह सफर अब भी डरावना हो सकता है।

मिथारी ने PTI से कहा, "आखिरकार हम उनके इलाके में जा रहे हैं।" उन्होंने आगे कहा, "मैं भी एक इंसान हूं। मुझे भी डर लगता है। लेकिन समय के साथ यह आदत बन गई है।"

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