महाराष्ट्र के कोल्हापुर जिले में जिला परिषद के एक स्कूल तक पहुंचने के लिए 55 साल के टीचर जीवन मिठारी पिछले 13 सालों से हर दिन लगभग 5 किलोमीटर पैदल चलते हैं। यह रास्ता ऐसे इलाके से गुजरता है जहां गौर (जंगली भैंसे) और तेंदुए अक्सर देखे जाते हैं। सिंधुदुर्ग बॉर्डर के पास गगनबावड़ा तालुका के एक छोटे से गांव, कवलटेक धनगरवाड़ा में स्थित इस स्कूल तक पहुंचने के लिए कोई पक्की सड़क नहीं है। यहां बिजली भी नहीं है। साथ ही अभी यहां आधिकारिक तौर पर सिर्फ एक ही स्टूडेंट का नाम दर्ज है।
