पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस (TMC) के भीतर सब कुछ ठीक नहीं चल रहा है। राज्य की कई नगर पालिकाओं में पार्षदों के सामूहिक इस्तीफों की बाढ़ आ गई है। इस सियासी उथल-पुथल के कारण कई नागरिक बोर्ड पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच गए हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि यह बगावत उन इलाकों में हो रही है, जिन्हें टीएमसी का सबसे मजबूत गढ़ माना जाता था।
पार्षदों के इस्तीफों का सबसे ज्यादा असर बैरकपुर के औद्योगिक इलाके में देखने को मिला है। यहां भाटपारा, कांचरापाड़ा, हलिशहर और गारुलिया जैसी नगर पालिकाएं इस संकट की चपेट में हैं।
सोमवार को 'उत्तर बैरकपुर' नगर पालिका के चेयरमैन मलय घोष समेत 16 पार्षदों ने एक साथ अपने पदों से इस्तीफा दे दिया। 23 सदस्यों वाली इस नगर पालिका में 3 पार्षदों की पहले ही मौत हो चुकी है। अब 16 और सदस्यों के छोड़ देने से यहां पूरी व्यवस्था ठप्प हो गई है और एक बड़ा प्रशासनिक संकट खड़ा हो गया है।
इस्तीफा देने वाले पार्षदों का कहना है कि चुनावों में टीएमसी के खराब प्रदर्शन के बाद वे "नैतिक जिम्मेदारी" लेते हुए पद छोड़ रहे हैं।
राजनीतिक पंडितों का मानना है कि मामला सिर्फ नैतिक जिम्मेदारी का नहीं है। असल में जनता स्थानीय सुविधाओं (सड़क, पानी, बिजली) से नाराज है, जमीनी स्तर पर पार्टी का जुड़ाव कमजोर हुआ है और विधानसभा चुनावों में झटका लगने के बाद TMC के भीतर आपसी गुटबाजी बहुत ज्यादा बढ़ गई है।
अभिषेक बनर्जी के गढ़ 'डायमंड हार्बर' में भी बगावत
दूसरा बड़ा झटका TMC को डायमंड हार्बर में लगा है, जो ममता बनर्जी के भतीजे और पार्टी के कद्दावर नेता अभिषेक बनर्जी का इलाका माना जाता है।
यहां 16 सदस्यों वाली नगर पालिका में से 8 TMC पार्षदों ने अचानक इस्तीफा दे दिया है, जबकि इस बोर्ड का कार्यकाल खत्म होने में महज कुछ ही महीने बचे थे।