Burhanpur News: मध्य प्रदेश के इस गांव ने शुरू की अनोखी पहल, गाली देने पर लगेगा 500 रुपये जुर्माना

Burhanpur News: क्या आपने कभी ऐसा गांव देखा है, जहां अपशब्दों का प्रयोग करने पर जुर्माना लगाया जाता हो या फिर गांव की सफाई कराई जाती हो। नहीं ना, दरअसल ऐसा अनोखा मामला मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के बोरसल गांव से सामने आया है।

अपडेटेड Apr 11, 2026 पर 2:59 PM
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बुरहानपुर जिले का बोरसर बना ‘गाली-मुक्त गांव’

Burhanpur News: क्या आपने कभी ऐसा गांव देखा है, जहां अपशब्दों का प्रयोग करने पर जुर्माना लगाया जाता हो या फिर गांव की सफाई कराई जाती हो। नहीं ना, दरअसल ऐसा अनोखा मामला मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले के बोरसल गांव से सामने आया है। यहां पर सम्मानजनक व्यवहार को बढ़ावा देने के लिए लोगों ने 500 रुपये का जुर्माना या एक घंटे की अनिवार्य सफाई का काम करने का नियम लागू किया है।

बता दें कि यह अनोखा फैसला बोरलस गांव की ग्राम पंचायत ने सर्वसम्मति से लिया है और इस नियम की जानकारी देने वाले पोस्टर पूरे गांव में लगाए गए हैं। इस कदम का मकसद लोगों के व्यवहार में सुधार करना और गाली-गलौज से होने वाले झगड़ों को कम करना है।

उप सरपंच ने दी जानकारी


उप सरपंच विनोद शिंदे ने मीडिया को बताया कि यह पहल बच्चों और बड़ों दोनों में बढ़ती अपमानजनक भाषा को रोकना है

उन्होंने कहा, “पहले लोग अक्सर अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते थे, जिनमें माताओं और बहनों को निशाना बनाने वाली गलत बातें कही जाती थीं। अब ऐसा करते पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को या तो 500 रुपये का जुर्माना देना होगा या गांव में एक घंटे की सफाई करनी होगी।”

शिंदे के अनुसार, इस पहल के सकारात्मक परिणाम दिखने लगे हैं और निवासी अपनी भाषा के प्रति अधिक सजग हो गए हैं। उन्होंने बताया कि पड़ोसी गांवों ने भी इस कदम की सराहना की है।

स्थानीय लोगों की आई प्रतिक्रिया

एक स्थानीय निवासी, जयश्री ने कहा कि इस नियम से वातावरण में काफी सुधार हुआ है। उन्होंने कहा, “अब लोग अपशब्दों का प्रयोग करने से बचते हैं, क्योंकि इसके लिए स्पष्ट दंड का प्रावधान है। पहले बच्चे माता-पिता की बार-बार चेतावनी के बावजूद भी ऐसे अपशब्दों का प्रयोग कर लेते थे, भले ही उन्हें इस शब्द का ज्ञान न हो।”

अश्विन पाटिल, एक युवा ग्रामीण, ने बताया कि 'गाली-मुक्त गांव' नाम का यह अभियान राज्य में अपनी तरह का पहला प्रयास है। उन्होंने समझाया कि इस विचार की शुरुआत इसलिए हुई क्योंकि 12-13 साल के बच्चे भी सामान्य बातचीत में गालियों का इस्तेमाल करने लगे थे और कई बार इसी वजह से झगड़े भी बढ़ जाते थे।

उन्होंने आगे बताया कि यह उनका मूल विचार था, जिस पर बाद में सरपंच और उप सरपंच से चर्चा की गई। इन चर्चाओं के बाद, 'गाली-मुक्त गांव' स्थापित करने का औपचारिक निर्णय लिया गया। उन्होंने कहा, "हम सभी ने इस संबंध में शपथ ली है और पंचायत की तरफ से इस पहल के संबंध में एक औपचारिक आदेश भी जारी किया गया है।"

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