आम आदमी पार्टी के भीतर कलह का एक नया चैप्टर खुलता नजर आ रहा है। पहले राघव चड्ढा को राज्यसभा में पार्टी के उपनेता पद से हटाया गया. फिर उनको साइडलाइन करने की खबर आई है। वहीं राज्यसभा में आम आदमी पार्टी के डिप्टी लीडर पद से हटाए जाने के बाद राघव चड्ढा ने वीडियो बयान जारी कर अपनी ही पार्टी को निशाने पर लिया। इसके जवाब में आम आदमी पार्टी के नेताओं ने भी अपने ही सांसद के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने कहा कि राघव चड्ढा, भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से डरते हैं।
आम आदमी पार्टी की नेता आतिशी ने कहा कि देश इस समय गंभीर हालात से गुजर रहा है और लोकतंत्र पर हमला हो रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली में जिस तरह वोट काटे गए, भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं ने फर्जी वोट बनाए और प्रशासन का गलत इस्तेमाल किया, उससे चुनाव की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि इसी तरह के आरोप अब पश्चिम बंगाल के चुनाव को लेकर भी लगाए जा रहे हैं।
राघव चड्ढा पर पार्टी से अलग चलने का आरोप
आतिशी ने कहा कि जब तृणमूल कांग्रेस ने मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव पेश किया, तब राघव चड्ढा ने उस पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया। उन्होंने आगे कहा कि जब पूरा विपक्ष लोकतंत्र पर हो रहे कथित हमलों और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों के विरोध में वॉकआउट करता है, तब भी राघव चड्ढा उसमें शामिल नहीं होते। आतिशी ने यह भी आरोप लगाया कि जब देश में गैस सिलेंडर की दिक्कत होती है और आम लोग लंबी लाइनों में खड़े होकर महंगे दामों पर सिलेंडर खरीदने को मजबूर होते हैं, तब पार्टी उन्हें संसद में यह मुद्दा उठाने को कहती है, लेकिन वह ऐसा करने से मना कर देते हैं।
पीएम मोदी को लेकर भी कही ये बात
उन्होंने कहा कि इन सभी बातों से यह लगता है कि राघव चड्ढा भारतीय जनता पार्टी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ खुलकर बोलने से बच रहे हैं। यह बयान आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा द्वारा शुक्रवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर किए गए एक पोस्ट के जवाब में आया। एक वीडियो में राघव चड्ढा ने कहा कि संसद में उनकी चुप्पी को उनकी कमजोरी या हार नहीं समझना चाहिए। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर उन्हें संसद में बोलने से क्यों रोका जा रहा है।
राज्यसभा सांसद ने तोड़ी चुप्पी
राघव चड्ढा ने कहा, “जब भी मुझे संसद में बोलने का मौका मिलता है, मैं आम लोगों से जुड़े मुद्दे उठाता हूं। कई बार मैं ऐसे विषयों पर भी बात करता हूं, जिन पर आम तौर पर संसद में चर्चा नहीं होती। लेकिन क्या जनता की आवाज उठाना कोई अपराध है? क्या मैंने कोई गलती की है? क्या मैंने कुछ गलत किया है?” आम आदमी पार्टी के नेता राघव चड्ढा ने आगे कहा कि पार्टी ने राज्यसभा सचिवालय से यह अनुरोध किया है कि उन्हें संसद में बोलने का मौका न दिया जाए। उन्होंने कहा, “हां, आम आदमी पार्टी ने संसद को यह जानकारी दी है कि मुझे बोलने की अनुमति न दी जाए।”
राघव चड्ढा को पद से हटाए जाने पर सौरभ भारद्वाज ने भी प्रतिक्रिया दी और उनकी आलोचना की। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या चड्ढा संसद में अहम मुद्दों को ठीक से उठा पा रहे हैं। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि वे केंद्र सरकार का सामना करने से बचते हैं। सौरभ भारद्वाज ने कहा कि विपक्षी दलों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है कि वे संसद के अंदर सरकार से सवाल करें, खासकर उन मुद्दों पर जो सीधे जनता से जुड़े होते हैं।