Abhishek Banerjee: TMC में सियासी घमासान! बागी नेताओं को अभिषेक बनर्जी की खुली चुनौती, कर दी इस्तीफे की पेशकश

अभिषेक बनर्जी ने कहा, "जो लोग पार्टी छोड़कर चले गए हैं और आज मेरे खिलाफ बोल रहे हैं या मुझ पर आरोप लगा रहे हैं, मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि वे 'दीदी' यानी ममता बनर्जी के नेतृत्व में वापस आ जाएं। अगर वे ऐसा करते हैं, तो मैं एक घंटे के भीतर पार्टी से इस्तीफा दे दूंगा।" अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि ये नेता वापस नहीं आएंगे, क्योंकि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ समझौता कर लिया है

अपडेटेड Jul 18, 2026 पर 8:05 PM
अभिषेक बनर्जी ने पार्टी छोड़ चुके नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्हें खुली चुनौती दी है।

तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी ने पार्टी छोड़ चुके नेताओं पर निशाना साधते हुए उन्हें खुली चुनौती दी है। उन्होंने कहा कि अगर ये नेता फिर से ममता बनर्जी के नेतृत्व में पार्टी में लौट आते हैं, तो वह खुद अपना पद छोड़ने के लिए तैयार हैं। पार्टी में चल रही नाराज़गी पर बोलते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा कि जो लोग टीएमसी छोड़ चुके हैं और अब उन पर आरोप लगा रहे हैं, उन्हें पहले ममता बनर्जी के पास वापस आना चाहिए।

अभिषेक बनर्जी ने दी ये चुनौती

अभिषेक बनर्जी ने कहा, "जो लोग पार्टी छोड़कर चले गए हैं और आज मेरे खिलाफ बोल रहे हैं या मुझ पर आरोप लगा रहे हैं, मैं उन्हें चुनौती देता हूं कि वे 'दीदी' यानी ममता बनर्जी के नेतृत्व में वापस आ जाएं। अगर वे ऐसा करते हैं, तो मैं एक घंटे के भीतर पार्टी से इस्तीफा दे दूंगा।" अभिषेक बनर्जी ने आरोप लगाया कि ये नेता वापस नहीं आएंगे, क्योंकि उन्होंने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ समझौता कर लिया है। उन्होंने कहा कि पहले पार्टी छोड़ो, फिर बागी गुट या भाजपा में शामिल हो जाओ और उसके बाद अभिषेक बनर्जी पर आरोप लगाओ, यही उनकी रणनीति है। उन्होंने यह भी कहा कि अगर पार्टी में बगावत की वजह वास्तव में वही हैं, तो बागी नेताओं के टीएमसी में लौटते ही वह 24 घंटे के भीतर अपना पद छोड़ देंगे।


टीएमसी में बढ़ी अंदरूनी कलह

अभिषेक बनर्जी का यह बयान ऐसे समय में आया है, जब तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कई नेता और विधायक पार्टी छोड़ चुके हैं। इन नेताओं ने ममता बनर्जी का साथ छोड़कर अलग गुटों का रुख किया है और पार्टी में चल रहे संकट के लिए अभिषेक बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया है। टीएमसी छोड़ने या पार्टी से अलग होने वालों में सुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बारिक जैसे नेताओं के नाम शामिल हैं।

इसके अलावा, करीब 19 से 20 सांसदों के एक बड़े गुट के भी पार्टी से अलग होने का दावा किया जा रहा है। इस गुट में काकोली घोष दस्तीदार, शर्मिला सरकार, प्रसून बनर्जी, जगदीश चंद्र बसुनिया, अरूप चक्रवर्ती, कालीपदा सोरेन, शताब्दी राय, जून मालिया, माला राय, यूसुफ पठान, रचना बनर्जी, बापी हलदर, मिताली बाग, खलीकुर रहमान, अबू ताहिर खान, असित मल, देव अधिकारी और पार्थ भौमिक शामिल बताए जा रहे हैं। खबरों के मुताबिक, यह गुट त्रिपुरा स्थित एनसीपी के एक धड़े में शामिल हो गया है और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को समर्थन देने की बात कही जा रही है।

नेताओं के इस्तीफे से बढ़ी मुश्किलें

हाल के दिनों में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के कई वरिष्ठ नेताओं ने पार्टी से दूरी बना ली है। मदन मित्रा ने पार्टी के संगठनात्मक पदों से इस्तीफा दे दिया है और एक बागी गुट में शामिल हो गए हैं। हालांकि, उन्होंने साफ किया है कि उन्होंने विधायक पद से इस्तीफा नहीं दिया है। मदन मित्रा ने अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी में फैसले एक ही व्यक्ति के हाथ में केंद्रित हो गए हैं। उन्होंने इसे "हिटलर जैसी कार्यशैली" बताते हुए आरोप लगाया कि इससे पार्टी कमजोर हो रही है।

वहीं, सुखेंदु शेखर राय ने राज्यसभा की सदस्यता और पार्टी दोनों से इस्तीफा दे दिया। सुष्मिता देव ने भी राज्यसभा और पार्टी के सभी पद छोड़ दिए, जबकि प्रकाश चिक बारिक ने भी राज्यसभा से इस्तीफा दे दिया। बाद में ये तीनों नेता भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। इधर, काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले एक अलग बागी गुट ने दावा किया है कि उसे करीब 19 सांसदों का समर्थन हासिल है। इस गुट ने यह भी संकेत दिया है कि वह राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) का समर्थन कर सकता है।

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