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Adopted Child Custody: जिस बच्चे को 6 साल की उम्र में लिया गोद अब उसे क्यों लोटाना चाहती है मां? दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा सरकार और अधिकारियों से जवाब

Adopted Child Custody: दिल्ली हाईकोर्ट ने एक बच्चे की कस्टडी के मामले में केंद्र सरकार और बाल कल्याण अधिकारियों से जवाब मांगा है। मामले में कथित बच्चे को 6 साल की उम्र में गोद लिया गया था। लेकिन बड़े होने के साथ-साथ बच्चे के व्यवहार में आए बदलाव से अब मां उसे रखना नहीं चाहती है

MoneyControl Newsअपडेटेड Sep 22, 2026 पर 2:11 PM
Adopted Child Custody: जिस बच्चे को 6 साल की उम्र में लिया गोद अब उसे क्यों लोटाना चाहती है मां? दिल्ली हाईकोर्ट ने मांगा सरकार और अधिकारियों से जवाब
अदालत ने केंद्र सरकार और बाल कल्याण अधिकारियों को इस मामले में जवाब तलब किया है।

Adopted Child Custody: एक मां ने बड़े अरमानों से 6 साल की उम्र में जिस बच्चे को गोद लिया था, अब वह उसे संभालने में अपनी असमर्थता जता रही है। मां का कहना है कि बच्चा बड़ा होने के साथ इतना आक्रामक हो गया है कि वह उसे अब वापस लौटाना चाहती है। यह मामला अब दिल्ली उच्च न्यायालय के अधीन है और अदालत ने केंद्र सरकार और बाल कल्याण अधिकारियों को इस मामले में जवाब तलब किया है। कोर्ट ने पूछा है कि क्या कानूनी प्रक्रिया पूरी कर गोद लिए गए बच्चे को सालों बाद वापस किसी संस्था को सौंपा जा सकता है?

कारा के माध्यम से 2018 में पिता ने गोद लिया था बच्चा

महिला के मुताबिक, उसने और उसके पति ने 2018 में CARA के माध्यम से 6 साल के बच्चे को कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद गोद लिया था। बच्चे को गोद लेने के करीब तीन साल बाद महिला के पति का निधन हो गया। इसके बाद महिला अपनी बुजुर्ग मां और बहन के साथ रह रही है। महिला ने दिल्ली हाईकोर्ट जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की पीठ के सामने मामले में हस्तक्षेप करने के लिए याचिका दायर की है। इसमें महिला ने बाद में बच्चे के व्यवहार और मानसिक स्थिति से जुड़ी गंभीर समस्याएं सामने आने का दावा किया है।

हरकतों के चलते कई स्कूल से निकाला जा चुका है बच्चा

महिला के वकील अली बिन सैफ ने अदालत को बताया कि बच्चे के व्यवहार में आक्रामकता और चोरी की कई घटनाओं के कारण उसे कई स्कूलों से भी निकाला जा चुका है। एक स्कूल में कथित तौर पर एक अन्य छात्र के साथ अनुचित व्यवहार की घटना सामने आने के बाद उसका दाखिला भी खत्म कर दिया गया था।

इलाज कराने वाली संस्था को बच्चा देना चाहती है मां

महिला ने हाई कोर्ट से मांग की है कि बच्चे की कस्टडी 'सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स अथॉरिटी' (CARA) या किसी सरकारी अथवा निजी संस्था को सौंपने के लिए निर्देश दिए जाएं। उसका कहना है कि ऐसी संस्था बच्चे को जरूरी मेडिकल देखभाल और इलाज उपलब्ध करा सकती है। महिला ने अदालत को यह भी बताया कि वह अपनी आर्थिक क्षमता के अनुसार बच्चे के इलाज का खर्च उठाने के लिए तैयार है।

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