जामिया मिलिया इस्लामिया ने गुरुवार को घोषणा की कि वह 'राष्ट्रीय सुरक्षा' का हवाला देते हुए तुर्की के साथ सभी समझौता ज्ञापनों (MoU) को निलंबित कर रहा है। यूनिवर्सिटी ने कहा है कि वह तुर्की की ओर से पाकिस्तान की मदद करने के मामले में हाल ही में हुए घटनाक्रम के दौरान देश के साथ खड़ा है। भारत के साथ हाल ही में बढ़े तनाव के दौरान अंकारा ने पाकिस्तान को ड्रोन और हथियार मुहैया कराए थे।
यूनिवर्सिटी ने एक बयान में कहा, "राष्ट्रीय सुरक्षा कारणों से, जामिया मिलिया इस्लामिया, नई दिल्ली और तुर्की गणराज्य की सरकार से संबद्ध किसी भी संस्थान के बीच किसी भी समझौता ज्ञापन (MoU) को तत्काल प्रभाव से अगले आदेश तक निलंबित कर दिया गया है। जामिया मिलिया इस्लामिया राष्ट्र के साथ पूरी तरह से खड़ा है।"
जामिया मिलिया इस्लामिया की PRO प्रोफेसर साइमा सईद ने कहा, "हमने तुर्की से संबद्ध संस्थानों के साथ सभी समझौता ज्ञापनों (MOUs) को निलंबित कर दिया है। जामिया देश और भारत सरकार के साथ खड़ा है।"
यह घटनाक्रम जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) और मौलाना आजाद राष्ट्रीय उर्दू विश्वविद्यालय (MANUU), हैदराबाद की ओर से तुर्की के संबंध में की गई इसी तरह की कार्रवाई के बाद हुआ है।
JNU और MANUU की तुर्की के खिलाफ कार्रवाई
JNU ने राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं का हवाला देते हुए तुर्की के मालट्या में इनोनू यूनिवर्सिटी के साथ अपने शैक्षणिक समझौते को सस्पेंड कर दिया।
JNU की कुलपति शांतिश्री धुलीपुडी पंडित ने भी पाकिस्तान का समर्थन करने के लिए तुर्की की आलोचना की और कहा, "तुर्की ने खुले तौर पर पाकिस्तान का समर्थन किया है, और इसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।"
तुर्की के मालट्या में इनोनू विश्वविद्यालय के साथ 3 फरवरी, 2025 को साइन MOU 2028 तक चलना था।