Jabalpur Cruise Accident: 'मुझे बचा लो...' क्रूज डूबने से पहले भाई को वीडियो कॉल कर बोली महिला, बाद में बेटे के साथ मिली लाश

Jabalpur Boat Accident: दिल्ली कैंट इलाके का मैसी परिवार एक रिश्तेदार के गृह प्रवेश समारोह में शामिल होने जबलपुर गया था। कार्यक्रम के बाद परिवार ने एक दिन और रुककर घूमने का प्लान बनाया। गुरुवार शाम को वे नर्मदा नदी पर स्थित बरगी डैम में बोटिंग के लिए गए, लेकिन अचानक मौसम खराब होने से बड़ा हादसा हो गया

अपडेटेड May 02, 2026 पर 7:42 PM
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Jabalpur Cruise Accident: 'मुझे बचा लो...' क्रूज डूबने से पहले भाई को वीडियो कॉल कर बोली महिला, बाद में बेटे के साथ मिली लाश

मध्य प्रदेश के जबलपुर में एक दर्दनाक हादसे में दिल्ली के एक ही परिवार के तीन लोगों की मौत हो गई। घर में खुशी का मौका मनाने गए परिवार के लिए यह सफर मातम में बदल गया। यह हादसा बारगी डैम में हुआ, जहां तेज तूफान के बीच एक क्रूज बोट पलट गई।

दिल्ली कैंट इलाके का मैसी परिवार एक रिश्तेदार के गृह प्रवेश समारोह में शामिल होने जबलपुर गया था। कार्यक्रम के बाद परिवार ने एक दिन और रुककर घूमने का प्लान बनाया। गुरुवार शाम को वे नर्मदा नदी पर स्थित बरगी डैम में बोटिंग के लिए गए, लेकिन अचानक मौसम खराब होने से बड़ा हादसा हो गया।

बताया जा रहा है कि करीब 40–43 लोगों को लेकर जा रही बोट तेज हवाओं और ऊंची लहरों की चपेट में आ गई। हवा की रफ्तार 60–70 किमी प्रति घंटा तक पहुंच गई, जिससे बोट का संतुलन बिगड़ गया और वह पलट गई।


इस हादसे में 39 साल की मरीना, उनका 4 साल का बेटा त्रिशान और 62 साल की मां मधुर मैसी की मौत हो गई। वहीं मरीना के पति प्रदीप, 14 साल की बेटी सिया और पिता जूलियस मैसी इस हादसे में बच गए।

भाई से बोलीं- मुझे बचा लो

हादसे से पहले का एक बेहद दर्दनाक वीडियो भी सामने आया है। मरीना अपने भाई कुलदीप मोहन से वीडियो कॉल पर बात कर रही थीं और उन्हें आसपास का नजारा दिखा रही थीं। अचानक हालात बिगड़े और वह घबराकर बार-बार “मुझे बचा लो… मुझे बचा लो…” चिल्लाने लगीं। इसके कुछ ही पल बाद कॉल कट गई।

कुलदीप ने बताया कि परिवार के लोग बोट के ऊपरी हिस्से में थे, तभी तेज हवाएं और लहरें आने लगीं। बोट हिलने लगी और उसमें पानी भरने लगा। घबराहट में लोग नीचे की तरफ भागे। इस दौरान प्रदीप ने लाइफ जैकेट ढूंढकर लोगों में बांटना शुरू किया, लेकिन तब तक हालात बिगड़ चुके थे।

कुछ लोगों ने डर के मारे पानी में छलांग लगा दी, जिन्हें स्थानीय ग्रामीणों ने रस्सियों की मदद से बचाया। प्रदीप और उनकी बेटी भी किसी तरह बच निकले, लेकिन जब तक वे बाकी लोगों को ढूंढ पाते, मरीना, उनका बेटा और मां पानी में लापता हो चुके थे।

परिजनों ने इस हादसे के लिए प्रशासन और बोट ऑपरेटरों की लापरवाही को जिम्मेदार ठहराया है। उनका कहना है कि पहले से मौसम खराब होने का अलर्ट था, लेकिन किसी ने यात्रियों को चेतावनी नहीं दी। अगर पहले बता दिया जाता, तो कोई भी बोट में नहीं बैठता।

साथ ही, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वहां स्थायी रेस्क्यू टीम नहीं थी। हादसा किनारे से महज 150–200 मीटर दूर हुआ, लेकिन तेज लहरों के कारण लोगों को बचाना मुश्किल हो गया।

एक अन्य परिजन ने दावा किया कि बोट में जरूरत से ज्यादा लोग बैठे थे और स्थानीय लोगों की चेतावनियों को भी नजरअंदाज किया गया।

इस हादसे में अब तक 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि कई लोग अभी भी लापता हैं। करीब 28 लोगों को बचा लिया गया है और सर्च ऑपरेशन जारी है।

शुरुआती जांच में सामने आया है कि खराब मौसम और तेज हवाओं के कारण बोट असंतुलित हो गई थी। कुछ यात्रियों का कहना है कि लाइफ जैकेट भी काफी देर से दी गईं, जब बोट डूबने लगी थी।

मामले की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है।

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