राजस्थान से शुरू हुई NEET परीक्षा में धांधली की जांच अब एक ऐसे मोड़ पर आ गई है, जिसने पूरे देश के शिक्षा तंत्र को झकझोर दिया है। कभी अपनी 'मेहनत' के लिए सुर्खियों में रहने वाला जमवारामगढ़ का बिवाल परिवार अब सीबीआई और राजस्थान SOG की जांच के केंद्र में है। जिस परिवार के पांच बच्चों ने पिछले साल सरकारी मेडिकल कॉलेजों में दाखिला लेकर वाहवाही लूटी थी, उसी परिवार के तीन सदस्यों को इस साल पेपर खरीदने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है।
सोशल मीडिया पोस्ट से खुला राज
जांच की शुरुआत 6 नवंबर 2025 की एक पुरानी फेसबुक पोस्ट से हुई। इस पोस्ट में आरोपी दिनेश बिवाल ने अपने परिवार के पांच बच्चों के एक साथ MBBS में चयन होने पर खुशी जताई थी। उस समय इसे एक मिसाल माना गया था, लेकिन अब एजेंसियों को शक है कि यह सफलता मेहनत की नहीं, बल्कि 'पेपर लीक नेटवर्क' की देन थी। सीबीआई अब पिछले साल हुए इन चयनों की वैधता की भी दोबारा जांच कर रही है।
30 लाख में सौदा और 'सब-एजेंट' बना बेटा
SOG सूत्रों के अनुसार, इस साल दिनेश बिवाल के बेटे ऋषि बिवाल के लिए गुरुग्राम से करीब 30 लाख रुपए में पेपर खरीदा गया था। चौंकाने वाली बात यह है कि ऋषि ने न केवल खुद पेपर लिया, बल्कि वह अन्य छात्रों को 10-10 लाख रुपए में पेपर बेचने का 'सब-एजेंट' भी बन गया। फिलहाल ऋषि फरार है, जबकि उसके परिवार के तीन सदस्य-मांगीलाल, दिनेश और विकास बिवाल- अब CBI की हिरासत में दिल्ली ले जाए जा चुके हैं।
जांच के घेरे में 'सीकर कनेक्शन' और 150 संदिग्ध छात्र
राजस्थान SOG ने सीबीआई को 150 संदिग्ध छात्रों की सूची सौंपी है। इसमें सीकर के एक काउंसलर राकेश कुमार मंडवारिया का नाम भी प्रमुखता से उभरा है, जो टेलीग्राम पर 'गेस पेपर' के नाम से छात्रों का नेटवर्क चला रहा था।
वहीं, सीकर की प्रसिद्ध CLC कोचिंग का नाम भी चर्चा में आया है। हालांकि, संस्थान के डायरेक्टर श्रवण चौधरी ने स्पष्ट किया है कि आरोपी छात्रों ने केवल टेस्ट सीरीज ली थी और चयन के बाद संस्थान की ओर से संपर्क करने पर उन्होंने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी थी।
बिहार और महाराष्ट्र से जुड़े तार
सीबीआई का मानना है कि यह गैंग केवल राजस्थान तक सीमित नहीं है। शक है कि प्रश्नपत्र की हार्ड कॉपी पुणे से लीक की गई। एजेंसियां यह मान रही हैं कि पिछले साल बिहार में सक्रिय रहा पेपर लीक माफिया अभी भी पूरी तरह एक्टिव है।
वहीं प्रश्नपत्रों की सुरक्षा में सेंध कैसे लगी, इसके लिए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के अंदरूनी सिस्टम की भी जांच की जा रही है।
अदालत में पेशी और आगे की कार्रवाई
देर शाम पकड़े गए आरोपियों को जयपुर में न्यायाधीश धर्मेंद्र कुमार शर्मा के आवास पर पेश किया गया। सीबीआई अब इन आरोपियों से पूछताछ कर इस अंतरराष्ट्रीय रैकेट के मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश करेगी। जयपुर, गुरुग्राम और नासिक से हुई इन गिरफ्तारियों ने साफ कर दिया है कि यह जाल कई राज्यों में फैला हुआ है।