Unnao Rape Case: कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से झटका, रद्द किया दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

Unnao Rape Case: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव में साल 2017 में एक नाबालिग लड़की से रेप मामले में पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है।

अपडेटेड May 15, 2026 पर 12:53 PM
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कुलदीप सिंह सेंगर को सुप्रीम कोर्ट से झटका, रद्द किया दिल्ली हाईकोर्ट का फैसला

Unnao Rape Case: सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के उन्नाव में साल 2017 में एक नाबालिग लड़की से रेप मामले में पूर्व बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की उम्रकैद की सजा पर रोक लगाने वाले दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश को रद्द कर दिया है। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने सुनवाई के दौरान कहा, “हम हाई कोर्ट की इस तकनीकी दलील से सहमत नहीं हैं कि POCSO कानून के तहत विधायक को लोक सेवक (Public Servant) नहीं माना जा सकता।”

मामले की सुनवाई कर रहे भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची की पीठ ने दिल्ली हाई कोर्ट को निर्देश दिया है कि वह इस मामले की मुख्य अपील पर दो महीने के भीतर फैसला करे। साथ ही यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा पहले के आदेश को रद्द करने के फैसले से प्रभावित न हो।

बता दें कि उन्नाव रेप केस पिछले महीने फिर सुर्खियों में आ गया था, जब उत्तर प्रदेश की बांगरमऊ विधानसभा सीट से विधायक सेंगर को दिल्ली हाई कोर्ट की एक अन्य पीठ द्वारा रेप मामले में दी गई सजा निलंबित कर दी गई और निचली अदालत के फैसले के खिलाफ अपील लंबित रहने तक उन्हें जमानत दे दी गई।


एक विवादित आदेश में, हाई कोर्ट ने तर्क दिया था कि उस समय विधायक होने के कारण निचली अदालत द्वारा उन्हें 'लोक सेवक' मानना ​​उचित नहीं था। न्यायमूर्ति सुब्रमणियम प्रसाद और न्यायमूर्ति हरीश वैद्यनाथन की पीठ ने यह भी कहा कि इस मामले में बाल यौन अपराध विरोधी कानून (POCSO) लागू नहीं किया जा सकता।

अदालत ने सेंगर को 'लोक सेवक' बताकर खारिज करते हुए कहा कि अब तक जेल में बिताए गए साढ़े सात साल कानून द्वारा निर्धारित न्यूनतम अवधि से अधिक हैं।

नतीजन, कुलदीप सेंगर को सशर्त जमानत पर रिहा कर दिया गया; शर्तों में 15 लाख रुपये का निजी मुचलका, दिल्ली न छोड़ने का वादा और पीड़िता से पांच किलोमीटर के दायरे में न आने का वादा शामिल है।

सेंगर की रिहाई के आदेश की कई लोगों ने कड़ी आलोचना की। वहीं दिल्ली में उस समय तनाव और गुस्सा और बढ़ गया, जब प्रदर्शन करने पहुंचीं पीड़िता और उसकी मां के साथ केंद्रीय सुरक्षा बलों द्वारा कथित तौर पर धक्का-मुक्की और डराने-धमकाने की घटनाएं सामने आईं।

उसकी रिहाई के बाद पीड़िता की 'सुरक्षा' के लिए तैनात केंद्रीय बलों और उसके परिवार के सदस्यों के बीच झड़पें हुईं। इन झड़पों में पीड़िता की मां को चलती बस से कूदने के लिए मजबूर किए जाने के भयावह दृश्य भी शामिल थे, जिसके बाद बस उसकी बेटी को लेकर चली गई।

इस भयावह घटना के बाद पत्रकारों से बात करते हुए मां फूट-फूटकर रोई और बोली, "हमें न्याय नहीं मिला। मेरी बेटी को बंधक बनाकर रखा गया है। ऐसा लगता है कि वे हमें मारना चाहते हैं।"

वहीं, बाद में CRPF के एक अधिकारी ने दावा किया कि पीड़िता को घर वापस 'ले जाया जा रहा था', हालांकि मां को बस से उतारे जाने के बारे में कोई औपचारिक बयान नहीं दिया गया है।

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