ट्रंप के बाद अब चीन का बड़ा दावा, बीजिंग बोला- 'हमने कराई भारत-पाक के बीच सुलह'; भारत ने फिर ठुकराई मध्यस्थता की बात

China Claims On India Pakistan Tensions: बीजिंग में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपनी विदेश नीति की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा, 'चीन ने दुनिया के कई हॉटस्पॉट मुद्दों को सुलझाया है। उन्होंने म्यांमार, ईरान और इजराइल-फिलिस्तीन के साथ-साथ भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने में अपनी भूमिका का जिक्र किया

अपडेटेड Dec 31, 2025 पर 8:21 AM
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भारत ने वैश्विक मंचों पर बार-बार दोहराया है कि पाकिस्तान के साथ उसके मुद्दे पूरी तरह द्विपक्षीय है और इसमें किसी तीसरे देश का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है

India-Pakistan Tensions: भारत और पाकिस्तान के बीच इसी साल मई में सैन्य टकराव को रोकने को लेकर क्रेडिट लेने की होड़ मची हुई है। अमेरिका के बाद अब चीन ने आधिकारिक तौर पर दावा किया है कि उसने दोनों देशों के बीच तनाव को कम करने के लिए 'मध्यस्थता' की थी। हालांकि, भारत ने हमेशा की तरह इस दावे को सिरे से खारिज कर दिया है। नई दिल्ली का साफ कहना है कि संघर्ष का समाधान किसी तीसरे देश के हस्तक्षेप से नहीं, बल्कि दोनों सेनाओं के बीच सीधी बातचीत से हुआ था।

चीन का दावा- 'हमने निभाई निष्पक्ष भूमिका'

बीजिंग में आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने अपनी विदेश नीति की उपलब्धियां गिनाते हुए कहा, 'चीन ने दुनिया के कई हॉटस्पॉट मुद्दों को सुलझाया है। उन्होंने म्यांमार, ईरान और इजराइल-फिलिस्तीन के साथ-साथ भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव को कम करने में अपनी भूमिका का जिक्र किया। उन्होंने इसे चीन का 'न्यायपूर्ण दृष्टिकोण' बताया, जो संकट के मूल कारणों को हल करने पर केंद्रित है।


'किसी तीसरे पक्ष की कोई भूमिका नहीं'

भारत सरकार ने चीन के इन दावों पर अपना स्टैंड पूरी तरह स्पष्ट रखा है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, 7-10 मई के बीच चला संघर्ष 10 मई को दोपहर 3:35 बजे दोनों देशों के DGMO (सैन्य संचालन महानिदेशक) के बीच हुई सीधी फोन कॉल के बाद समाप्त हुआ था। भारत ने वैश्विक मंचों पर बार-बार दोहराया है कि पाकिस्तान के साथ उसके मुद्दे पूरी तरह द्विपक्षीय है और इसमें किसी तीसरे देश का हस्तक्षेप स्वीकार्य नहीं है।

बीजिंग के दावों पर संदेह क्यों?

चीन के दावों को भारत में शक की नजर से देखा जा रहा है, इसके पीछे कई बड़े कारण है। चीन, पाकिस्तान को 81% सैन्य हार्डवेयर सप्लाई करता है। ऐसे में भारत उसे एक 'निष्पक्ष मध्यस्थ' के रूप में कभी नहीं देख सकता। वहीं भारतीय सेना के डिप्टी चीफ लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर. सिंह ने आरोप लगाया था कि चीन ने इस संघर्ष का इस्तेमाल एक 'लाइव लैब' के रूप में किया, ताकि वह अपने हथियारों और तकनीक का परीक्षण पाकिस्तान के जरिए भारत के खिलाफ कर सके।

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