सोमवार को 25 साल का एक युवक लक्ष्मी नगर पुलिस स्टेशन पहुंचा और उसने अपनी मां, बहन और किशोर भाई की हत्या करने की बात कबूल की। पुलिस जब उसके घर पहुंची तो उन्हें उसकी 46 साल की मां कविता और दो भाई-बहनों - 24 साल की मेघना, जो एक लैब में काम करती थी और 14 साल के मुकुल, जो कक्षा 7 का छात्र था,के शव मिले। ये पूरा परिवार धार्मिक था, इसलिए ऐसा शक है कि आरोपी बेटे ने प्रसाद के लड्डूओं में भारी मात्रा में धतूरा मिला दिया था।
पुलिस के मुताबिक, इसके बाद उसने उन्हें मफलर से गला घोंटकर सभी को मार डाला। जांच में पता चला कि आरोपी, जिसकी पहचान यशबीर सिंह के रूप में हुई है, गंभीर आर्थिक तंगी से जूझ रहा था।
सिंह पहले एक निजी ड्राइवर के रूप में काम करता था, लेकिन पिछले छह महीनों से बेरोजगार था। उसके पिता, जो एक ट्रक ड्राइवर हैं, हरियाणा में अलग रहने लगे थे।
सिंह कथित तौर पर वैवाहिक कलह का भी सामना कर रहा था और उसने अपनी पत्नी को एक दिन पहले उसके मायके भेज दिया था।
आरोपी ने खाने में बेहोशी की दवा मिलाकर परिवार के सदस्यों का गला घोंट दिया। पूछताछ के दौरान, सिंह ने कथित तौर पर पुलिस को बताया कि उसने लगभग 1.5 करोड़ रुपए की जीवन बीमा पॉलिसी ली थी और पिछले 2 महीनों में उसने 4-5 बार आत्महत्या की कोशिश की, जिसमें उसने खुद का एक्सीडेंट कराया, खुद को सांप से कटवाना,खाली हवा का इंजेक्शन लगाना भी शामिल था, लेकिन हर बार वह असफल रहा।
आरोपी ने बताया कि रविवार सुबह वह यमुना बैंक इलाके से नशीले बीज लाया, उन्हें खाने में मिलाया और अपने परिवार के सदस्यों को खिलाया।
TOI के मुताबिक, एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "उसके बयान के अनुसार, आज सुबह वह यमुना बैंक मेट्रो स्टेशन के पास एक शिव मंदिर गया, पास के धतूरे के पौधे से धतूरे के बीज इकट्ठा किए, आटे और चीनी से धतूरे के लड्डू बनाए और अपने परिवार के सदस्यों को खिलाए।" उन्होंने आगे बताया कि जब वे बेहोश हो गए, तो उसने कथित तौर पर उनका गला घोंट दिया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, उसने दोपहर 1:30 बजे से 2 बजे के बीच उनकी हत्या की और कुछ समय बाद पुलिस के सामने आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस मौत के समय की पुष्टि के लिए पोस्टमार्टम रिपोर्ट का इंतजार करेगी।
पुलिस ने साफ किया कि ये जानकारी पूरी तरह से आरोपी के इकबालिया बयान पर आधारित हैं और इनकी पुष्टि अभी बाकी है।
स्थानीय लोगों के अनुसार, परिवार पांच मंजिला मकान की पहली मंजिल पर किराए के मकान में रहता था। मकान मालिक अपने परिवार के साथ ऊपर की मंजिलों पर रहता है। पड़ोसियों को याद है कि आरोपी बेटे को छोड़कर पूरा परिवार धार्मिक था और वे घर के पीछे वाली गली में स्थित मंदिर में हर दिन कम से कम दो बार दर्शन करने जाते थे।
मंदिर के पुजारी अशोक ने बताया, “मेरी परिवार से आखिरी बार रविवार शाम को बात हुई थी। छोटा लड़का (मुकुल) मिट्टी का दीपक जलाने आया था। वह हमेशा आते-जाते अभिवादन करता था, लेकिन परिवार के बारे में बस इतना ही पता है। वे हर सुबह करीब 5 बजे मंदिर में जल चढ़ाने और शाम को दीपक जलाने आते थे। पिछले दो सालों से यही उनकी दिनचर्या थी।” उन्होंने आगे कहा कि बड़ा लड़का (यशबीर) पिछले साल जन्माष्टमी पर ही आया था।