Air India Crash: 'FAA और बोइंग को फ्यूल स्विच में खराबी का पता था’! पीड़ितों के वकील ने पायलट की गलती बताने वाली थ्योरी पर उठाए सवाल
Air India Plane Crash: इस हादसे में मारे गए लोगों के परिवार अब लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं। इनमें पायलट, केबिन क्रू, यात्री और उस इमारत में मौजूद लोग भी शामिल हैं, जिस पर विमान गिरा था। परिवारों का कहना है कि इस मामले की पूरी तरह पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी पर झूठा दोष न डाला जाए
Ahmedabad Air India plane crash: अहमदाबाद एयर इंडिया प्लेन क्रैश की जांच में नया खुलासा
Air India Crash: 'FAA और बोइंग को फ्यूल स्विच में खराबी का पता था’!
सिर्फ 32 सेकंड की उड़ान… और फिर सब कुछ खत्म। यह दुनिया की सबसे छोटी और सबसे दर्दनाक उड़ानों में से एक मानी जा रही है। 12 जून 2025 का दिन एविएशन इंडस्ट्री के लिए हमेशा याद रखा जाएगा। उस दिन जो हादसा हुआ, उसके बाद से हर उड़ान और हर टेकऑफ को लोग पहले जैसा सामान्य नहीं मानते। यह मामला Air India Flight 171 के Boeing 787 Dreamliner विमान के हादसे का है, जो भारत के इतिहास की सबसे घातक विमान दुर्घटनाओं में से एक बन गया। यह पहली बार था, जब किसी बोइंग 787 ड्रीमलाइनर का घातक क्रैश हुआ।
करीब आठ महीने पहले बालेंद्रबोइंग 787 ड्रीमलाइनर विमान ने अहमदाबाद के सरदार वल्लभभाई पटेल इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी। यह फ्लाइट लंदन के गैटविक एयरपोर्ट के लिए जा रही थी।
विमान में 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर सवार थे। लेकिन उड़ान भरने के सिर्फ 32 सेकंड बाद ही विमान क्रैश हो गया। इस भयानक हादसे में विमान में मौजूद लगभग सभी लोगों की मौत हो गई और सिर्फ एक यात्री जिंदा बच पाया।
न्याय की गुहार लगा रहे पीड़ित परिवार
इस हादसे में मारे गए लोगों के परिवार अब लगातार न्याय की मांग कर रहे हैं। इनमें पायलट, केबिन क्रू, यात्री और उस इमारत में मौजूद लोग भी शामिल हैं, जिस पर विमान गिरा था। परिवारों का कहना है कि इस मामले की पूरी तरह पारदर्शी जांच होनी चाहिए, ताकि सच्चाई सामने आ सके और किसी पर झूठा दोष न डाला जाए।
इस दुर्घटना की जांच भारत की एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) कर रही है। हालांकि, अभी तक अंतिम रिपोर्ट सामने नहीं आई है। शुरुआती रिपोर्ट जारी होने के बाद कई नए सवाल खड़े हो गए, लेकिन स्पष्ट जवाब अभी तक नहीं मिले।
इस मामले में अमेरिका की लॉ फर्म बेस्ली एलन के सीनियर एविएशन वकील माइक एंड्रयूज 100 से ज्यादा पीड़ित परिवारों का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं।
इन परिवारों की ओर से इस लॉ फर्म ने अमेरिका में फ्रीडम ऑफ इंफोर्मेशन एक्ट (FOIA) के तहत जानकारी मांगने के लिए आवेदन भी दिया है और संभावित मुकदमा दायर करने की तैयारी कर रही है।
बहुत जल्दी पायलटों को दोषी ठहराना गलत: माइक एंड्रयूज
Firstpost को दिए एक इंटरव्यू में माइक एंड्रयूज ने चिंता जताई कि इस मामले में बहुत जल्दी पायलटों को दोषी ठहराने की कोशिश की जा रही है।
उन्होंने कहा कि Boeing 787 Dreamliner के फ्यूल स्विच से जुड़ी पुरानी तकनीकी समस्या को भी गंभीरता से जांचने की जरूरत है। उनके मुताबिक, अभी सबसे जरूरी है कि विमान के सभी तकनीकी पहलुओं की गहराई से और पारदर्शी जांच हो।
एंड्रयूज का कहना है कि इतनी बड़ी त्रासदी में अटकलें लगाना सही नहीं है। उन्होंने कहा कि शुरुआती रिपोर्ट में ऐसा लगा कि पायलटों की तरफ उंगली उठाई जा रही है, जो चिंता की बात है।
उनके अनुसार, पीड़ित परिवारों को सच जानने का पूरा अधिकार है और इसके लिए जांच पूरी तरह साफ और निष्पक्ष होनी चाहिए।
'ऐसे दिखाया जा रहा है, जैसे पायलटों की गलती थी'
उन्होंने यह भी कहा कि जांच को लेकर कई तरह की विरोधाभासी खबरें सामने आ रही हैं। कभी कहा जाता है कि रिपोर्ट जल्द आने वाली है, तो कभी कहा जाता है कि जांच अभी भी जारी है। इससे पीड़ित परिवारों के लिए यह समझना मुश्किल हो रहा है कि जांच आखिर किस स्थिति में है।
वकील ने यह भी कहा कि शुरुआती रिपोर्ट में पायलटों की बातचीत के छोटे-छोटे हिस्से दिखाए गए, जैसे “तुमने फ्यूल क्यों बंद किया?” और जवाब “मैंने नहीं किया।”
उनके मुताबिक इन टुकड़ों को ऐसे पेश किया गया कि ऐसा लगे मानो गलती पायलटों की ही थी।
माइक एंड्रयूज़ इससे पहले इथियोपियन एयरलाइंस फ्लाइट 302 क्रैश (2019) के पीड़ितों का भी प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। उनका कहना है कि उस हादसे में भी शुरुआत में पायलटों को दोष दिया गया था, जबकि बाद में तकनीकी समस्याएं सामने आई थीं।
इस हादसे के बाद मीडिया में सबसे ज्यादा चर्चा “फ्यूल स्विच” को लेकर हुई। लेकिन अभी तक यह साफ नहीं है कि वास्तव में फ्यूल बंद हुआ था या कोई तकनीकी गड़बड़ी हुई थी।
2018 में FAA ने फ्यूल स्विच को लेकर दी थी चेतावनी
2018 में अमेरिका की एविएशन एजेंसी फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) ने एक चेतावनी जारी की थी। इसमें कहा गया था कि कुछ बोइंग विमानों के फ्यूल कंट्रोल स्विच के लॉकिंग सिस्टम में समस्या हो सकती है।
इसका मतलब यह था कि कभी-कभी यह स्विच अपने आप “Run” मोड से “Cut-off” मोड में चला जा सकता है।
एंड्रयूज ने FAA के 2018 के एयरवर्थनेस बुलेटिन का हवाला दिया, जिसमें 787-8, 787-9 और 787-10 सहित कई मॉडलों में बोइंग फ्यूल कंट्रोल स्विच पर लॉकिंग मैकेनिज्म के संभावित, अनजाने में इनएक्टिव होने की आशंका जताई गई थी।
यह स्विच अपने आप “Run” मोड से “Cut-off” मोड में चला जा सकता है।
उन्होंने कहा, “2018 में, बोइंग और FAA को इन फ्यूल स्विच में समस्याओं की जानकारी थी। FAA और बोइंग की तरफ से जारी एक एयरवर्थनेस बुलेटिन के आधार पर, जिसमें कहा गया था कि स्विच के डिजाइन में शुरू से ही कुछ समस्याएं थीं।” उन्होंने दावा किया, “इसमें रन पोजीशन में बने रहने में दिक्कत थी और यह अनजाने में कट-ऑफ मोड में जा सकता था। इससे पता चलता है कि दुर्घटना से कई साल पहले ही उन्हें इस समस्या की जानकारी थी।”
इसके अलावा एंड्रयूज ने एक और संभावित तकनीकी समस्या की ओर इशारा किया। उनके मुताबिक विमान के थ्रस्ट कंट्रोल मालफंक्शन एकोमोडेशन (TCMA) सिस्टम में खराबी भी हादसे का कारण हो सकती है।
यह सिस्टम तय करता है कि विमान जमीन पर है या हवा में। वहीं फुल अथॉरिटी डिजिटल इंजन कंट्रोल (FADEC) सिस्टम इंजन की पावर और स्पीड को कंट्रोल करता है।
अगर TCMA गलती से यह समझ ले कि विमान जमीन पर है, तो वह इंजन की पावर अपने आप कम कर सकता है, जिससे बड़ा हादसा हो सकता है।
AAIB टीम पिछले साल दिसंबर में वॉशिंगटन भी गई
इस जांच के दौरान भारत की AAIB टीम पिछले साल दिसंबर में वॉशिंगटन भी गई थी, जहां उनकी मुलाकात नेशनल ट्रांसपोर्ट सेफ्टी बोर्ड (NTSB) के अधिकारियों से हुई।
इस बैठक में सिर्फ पायलट की गलती नहीं, बल्कि दूसरे तकनीकी कारणों पर भी चर्चा की गई।
माइक एंड्रयूज़ कई बार अहमदाबाद जाकर पीड़ित परिवारों से भी मिल चुके हैं। उनका कहना है कि हर परिवार का इस हादसे से गहरा व्यक्तिगत नुकसान जुड़ा है, इसलिए उनसे आमने-सामने मिलना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि वे आगे भी भारत आते रहेंगे और परिवारों को जांच की प्रक्रिया के बारे में जानकारी देते रहेंगे।
अब पीड़ित परिवारों और दुनिया भर के एविएशन विशेषज्ञों की नजर अंतिम जांच रिपोर्ट पर है। सब यह जानना चाहते हैं कि आखिर 32 सेकंड में ऐसा क्या हुआ जिसने 260 लोगों की जान ले ली।