अमर्त्य सेन को भेजा गया SIR नोटिस? TMC के दावे पर चुनाव अधिकारी और परिवार का आया बयान

Amartya Sen SIR: तृणमूल कांग्रेस (TMC) ने मंगलवार (6 जनवरी) को दावा किया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से संबंधित सुनवाई से जुड़ा नोटिस भेजा गया है। अभिषेक बनर्जी ने पश्चिम बंगाल के सियासी परिदृश्य से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का नामोनिशान मिटाने की अपील की

अपडेटेड Jan 06, 2026 पर 10:46 PM
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Amartya Sen SIR: नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन चर्चा में बने रहते हैं

Bengal SIR controversy: तृणमूल कांग्रेस (TMC) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने मंगलवार (6 जनवरी) को दावा किया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन को वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) संबंधी सुनवाई से जुड़ा नोटिस भेजा गया है। उन्होंने पार्टी समर्थकों से पश्चिम बंगाल के सियासी परिदृश्य से भारतीय जनता पार्टी (BJP) का नामोनिशान मिटाने की अपील की। साथ ही आगामी विधानसभा चुनावों में 250 सीटों पर तृणमूल कांग्रेस की जीत सुनिश्चित करने को कहा।

हालांकि, सेन के परिवार के एक सदस्य ने पीटीआई से कहा कि उन्हें चुनाव आयोग से SIR से जुड़ी सुनवाई के संबंध में अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है। अभिषेक ने बीरभूम जिले के रामपुरहाट में एक जनसभा को संबोधित करते हुए दावा किया कि BJP के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार बंगाल की जनता का जानबूझकर बार-बार अपमान कर रही है। अब उसने एसआईआर की कवायद के नाम पर राज्य को निशाना बनाने के लिए निर्वाचन आयोग के साथ सांठगांठ कर ली है।

उन्होंने कहा, "यहां आते समय मुझे बताया गया कि वैश्विक स्तर पर हमारे देश का कद बढ़ाने वाले नोबेल पुरस्कार विजेता प्रोफेसर अमर्त्य सेन को एसआईआर संबंधी सुनवाई से जुड़ा नोटिस भेजा गया है। अभिनेता देव और क्रिकेटर मोहम्मद शमी जैसे कई प्रतिष्ठित लोगों को भी नोटिस भेजे गए हैं, जो क्रिकेट विश्व कप विजेता भारतीय टीम का हिस्सा थे।"


बीजेपी को दी धमकी

अभिषेक ने आगे कहा, "इस अपमान का जवाब देने का एकमात्र तरीका बीरभूम जिले की सभी 11 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल करना है।" पश्चिम बंगाल में 2021 में हुए विधासनभा चुनावों में दुबराजपुर सीट को छोड़कर बीरभूम जिले की बाकी 10 सीटों पर तृणमूल उम्मीदवारों को जीत हासिल हुई थी। दुबराजपुर सीट पर भाजपा उम्मीदवार विजयी रहे थे।

अभिषेक ने कहा, "पश्चिम बंगाल से बांग्ला-विरोधी बीजेपी का नामोनिशान मिटा दें, जिसने लोगों को बार-बार इस तरह की बदनामी झेलने के लिए मजबूर किया है।" 

परिवार ने क्या कहा?

इस बीच, सेन के परिवार के एक सदस्य ने बताया कि नोबेल पुरस्कार विजेता अर्थशास्त्री का गणना फॉर्म विधिवत भरा और जमा किया गया था। सदस्य ने कहा,, "सेन की मां का नाम भी 2002 की वोटर लिस्ट में था। उन्होंने (सेन ने) पहले एक चुनाव में अपना वोट भी डाला था। हम जिले के निर्वाचन अधिकारियों से इस संबंध में पता करेंगे।" सूत्रों ने NDTV को बताया कि सिस्टम में कुछ गड़बड़ी थी। उन्हें कंप्यूटर से जेनरेट किया गया नोटिस भेजा गया था। सूत्रों ने बताया कि आयोग ने संबंधित BLO से स्पेलिंग की गलती को ठीक करने के लिए कहा है।

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अमर्त्य सेन के ट्रस्ट के सूत्रों ने NDTV को बताया कि बोलपुर में नोबेल पुरस्कार विजेता के घर पर अब तक कोई SIR नोटिस नहीं मिला है। सेन रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित शांतिनिकेतन में वोट डालते हैं। उन्होंने आखिरी बार 2014 में वोट डाला था और उनके पास वोटर ID है।

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