ममता बनर्जी को लगा एक और झटका! TMC सांसद सुखेंदु शेखर ने राज्यसभा से दिया इस्तीफा, पार्टी भी छोड़ी, कौन हैं ये?

Sukhendu Sekhar Ray Resigns: टीएमसी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) की सदस्यता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। ममता बनर्जी के लिए यह झटका ऐसे समय पर आया है जब वह नई दिल्ली में आयोजित इंडिया (INDIA) गठबंधन की बैठक में शामिल हो रही हैं

अपडेटेड Jun 08, 2026 पर 1:27 PM
Sukhendu Sekhar Ray Resigns: सुखेंदु शेखर राय ने अपने इस्तीफे में ममता बनर्जी के नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है

Sukhendu Sekhar Ray Resigns: पश्चिम बंगाल की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर आ रही है। विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना कर चुकीं तृणमूल कांग्रेस (TMC) की सुप्रीमो ममता बनर्जी को सोमवार को एक और बहुत बड़ा झटका लगा है। टीएमसी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर ने संसद के उच्च सदन (राज्यसभा) की सदस्यता और पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है।

ममता बनर्जी के लिए यह झटका ऐसे समय पर आया है जब वह सोमवार दोपहर नई दिल्ली में आयोजित इंडिया (INDIA) गठबंधन की बैठक में शामिल हो रही हैं। नई दिल्ली में आयोजित इस बैठक में खुद ममता बनर्जी मौजूद हैं।

इस्तीफे के बाद टीएमसी पर बरसे सुखेंदु शेखर


सुखेंदु शेखर राय ने अपने इस्तीफे में ममता बनर्जी सरकार और टीएमसी के नेतृत्व पर तीखा हमला बोला है। हाल ही में संपन्न हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में पार्टी की करारी शिकस्त का जिक्र करते हुए उन्होंने इस चुनावी फैसले को तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के अराजक शासन का नतीजा बताया।

राय ने अपने बयान में कहा कि पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में जनता ने राज्य के इतिहास में पहली बार भारतीय जनता पार्टी (BJP) को भारी जनादेश दिया है। यह जनादेश तृणमूल कांग्रेस के 15 साल के उस अराजक शासन को खत्म करने के लिए है जो चौतरफा बेलगाम भ्रष्टाचार, महिलाओं के खिलाफ हुए अत्याचारों और स्वास्थ्य, शिक्षा, उद्योग, कानून-व्यवस्था व रोजगार के मोर्चे पर बेहद शर्मनाक नाकामी की वजह से पैदा हुआ था।

उन्होंने आगे कहा कि नई चुनी गई पीपुल्स गवर्नमेंट ने अपने चुनावी घोषणापत्र के अनुसार पश्चिम बंगाल के समग्र विकास और पुनर्निर्माण के लिए कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। जनता के इस ऐतिहासिक फैसले का सम्मान करते हुए उन्होंने राज्यसभा और टीएमसी से इस्तीफा देने का फैसला कियाय़

क्यों हुआ टीएमसी का पतन? सुखेंदु शेखर ने गिनाए कारण

सुखेंदु शेखर ने राष्ट्रीय राजनीति में टीएमसी की साख खत्म होने और इसके जल्द ही पूरी तरह समाप्त होने की बात कही है। उन्होंने कहा कि कोलकाता के आरजी कर अस्पताल में एक युवा महिला डॉक्टर के साथ हुए रेप और हत्या के मामले ने पार्टी की लुटिया डुबो दी। उन्होंने हाल ही में एक इंटरव्यू में कहा था कि आरजी कर घटना से निपटने का तरीका पूरी तरह गलत था।

दोषियों को बचाने का साफ प्रयास किया गया और इसके लिए पुलिस का इस्तेमाल किया गया। इस घटना के बाद हुए विरोध प्रदर्शनों ने साफ कर दिया कि जनता की भावनाएं पार्टी के खिलाफ थीं, जिसे समझने में टीएमसी नेतृत्व नाकाम रहा। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी नेताओं ने भ्रष्टाचार का जो पहाड़ खड़ा किया है, वह अकल्पनीय है और ममता बनर्जी इस पर काबू पाने में पूरी तरह असफल रहीं।

अभिषेक बनर्जी और I-PAC पर निशाना

सुखेंदु शेखर ने टीएमसी के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी और चुनावी रणनीतिकार संस्था आई-पैक (I-PAC) को भी इस बर्बादी के लिए जिम्मेदार ठहराया। उन्होंने कहा कि 2018 में जब आई-पैक को लाया गया था तब पार्टी के पुराने नेताओं ने इसका काफी विरोध किया था, लेकिन 2021 की जीत ने आलोचकों को शांत कर दिया। इस बार आई-पैक को पार्टी को पूरी तरह तबाह करने के लिए रेड कार्पेट वेलकम दिया गया।

कौन हैं सुखेंदु शेखर राय?

सुखेंदु शेखर राय तृणमूल कांग्रेस के सबसे वरिष्ठ, पढ़े-लिखे और प्रखर प्रवक्ताओं में से एक माने जाते रहे हैं। वह लंबे समय से राज्यसभा में टीएमसी का प्रतिनिधित्व कर रहे थे और राष्ट्रीय मीडिया में पार्टी का पक्ष बेहद मजबूती और तार्किक ढंग से रखने के लिए जाने जाते थे। आरजी कर अस्पताल की घटना के बाद से ही उनके सुर अपनी ही सरकार के खिलाफ तीखे हो गए थे। उन्होंने इस मामले में कोलकाता पुलिस कमिश्नर से पूछताछ की मांग तक कर डाली थी, जिसके बाद उन्हें काफी समय से हाशिए पर धकेल दिया गया था।

TMC में बड़ी टूट की आशंका

सुखेंदु शेखर राय का यह इस्तीफा ऐसे समय पर हुआ है जब पश्चिम बंगाल विधानसभा में तृणमूल कांग्रेस के निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी की अगुवाई में हुई बगावत के बाद टीएमसी के कई लोकसभा सांसदों के भी टूटने की अटकलें तेज हैं। पार्टी विरोधी गतिविधियों के कारण टीएमसी से निकाले गए ऋतब्रत बनर्जी ने हाल ही में पश्चिम बंगाल विधानसभा में 58 विधायकों के समर्थन से एक अलग गुट बना लिया है।

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ऋतब्रत बनर्जी को शोभनदेव चट्टोपाध्याय की जगह नेता प्रतिपक्ष भी चुन लिया गया है। ऋतब्रत बनर्जी का यह गुट लगातार अभिषेक बनर्जी के नेतृत्व की खुलकर आलोचना कर रहा है और विधानसभा चुनाव में टीएमसी की ऐतिहासिक हार के लिए सीधे तौर पर उन्हें ही जिम्मेदार ठहरा रहा है।

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