बंगाल में आशा वर्कर्स का जोरदार प्रदर्शन, सिर्फ 1000 रुपये बढ़ोतरी से भड़कीं कर्मी, 15 हजार मासिक वेतन की कर रही मांग

आशा वर्कर्स ने यह सवाल उठाया कि, क्या महज 1,000 रुपये बढ़ने से परिवार चल सकता है? उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में यह बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरे जैसी है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने दोबारा सड़क पर उतरकर सरकार को चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी, आंदोलन जारी रहेगा। बता दे कि बढ़ोतरी होने के बाद मानदेय 6,250 रुपए प्रति माह हो गए है

अपडेटेड Feb 07, 2026 पर 8:55 PM
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पश्चिम बंगाल में राज्य बजट पेश होने के बाद आशा वर्कर्स आंदोलन कर रही हैं।

पश्चिम बंगाल में राज्य बजट पेश होने के बाद आशा वर्कर्स आंदोलन कर रही हैं। शुक्रवार (6 फरवरी) को बड़ी संख्या में आशा वर्कर्स कोलकाता के स्वास्थ्य भवन के सामने जमा हुईं और सरकार के खिलाफ जमकर विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि वे पिछले लंबे समय से हर महीने कम से कम 15,000 रुपये मानदेय की मांग कर रही हैं, लेकिन इस बार सिर्फ 1,000 रुपये की बढ़ोतरी की घोषणा की गई, जो बहुत कम है।

आशा वर्कर्स ने यह सवाल उठाया कि, क्या महज 1,000 रुपये बढ़ने से परिवार चल सकता है? उनका कहना है कि महंगाई के इस दौर में यह बढ़ोतरी ऊंट के मुंह में जीरे जैसी है। इसी नाराजगी के चलते उन्होंने दोबारा सड़क पर उतरकर सरकार को चेतावनी दी है कि जब तक उनकी मांगें नहीं मानी जाएंगी, आंदोलन जारी रहेगा। बता दे कि बढ़ोतरी होने के बाद मानदेय 6,250 रुपए प्रति माह हो गए है।

प्रदर्शन के दौरान मौके पर पुलिस मौजूद रही और बैरिकेड कर प्रदर्शनकारियों को स्वास्थ्य भवन के अंदर जाने से रोक दिया गया, जिससे प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी बहस भी हुई। आशा वर्कर्स ने आरोप लगाया कि उन्हें अंदर जाकर अपनी बात रखने तक नहीं दी जा रही है।


प्रदर्शन कर रही एक आशा कर्मी का कहना है कि, "हमारी मुख्य मांग थी 15,000 रुपये मासिक मानदेय। सरकार ने सिर्फ 1,000 रुपये बढ़ाए। यह हमारे साथ इंसाफ नहीं है। कई साथियों को जनवरी का इंसेंटिव मिला ही नहीं। मोबाइल रिचार्ज, यात्रा खर्च, सब हमें अपनी जेब से करना पड़ता है।"

बता दे कि बीते दिन मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि आशा और ICDS जैसी परियोजनाओं में काम करने वाली महिलाओं को मातृत्व अवकाश और अतिरिक्त भत्ते देने पर सरकार विचार कर रही है। उन्होंने यह भी बताया कि काम के दौरान मौत होने पर 5 लाख रुपये का मुआवजा दिया जाएगा और सालाना इंसेंटिव भी बढ़ाया गया है।

हालांकि, आशा वर्कर्स साफ कह रही हैं कि वे आधे-अधूरे वादों से संतुष्ट नहीं होंगी। उनका कहना है कि अगर सरकार ने जल्द ठोस फैसला नहीं लिया, तो आंदोलन और तेज होगा। पश्चिम बंगाल में चुनाव नजदीक हैं, और जमीनी स्तर पर काम करने वाली इन स्वास्थ्य कर्मियों की नाराजगी सीधे तौर पर चुनाव पर असर डाल सकती है।

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