बेंगलुरु में हाल ही में हुई ATM कैश वैन लूट के सिलसिले में एक पुलिस कांस्टेबल सहित तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है, जहां फर्जी सरकार अधिकारी बनकर कुछ लोग जेपी नगर स्थित एक बैंक शाखा से नकदी ले जा रहे ATM वैन से 7 करोड़ रुपए लेकर भाग गए थे। यह लूट 19 नवंबर को हुई, जब CMS इंफोसिस्टम्स की कैश वैन जेपी नगर स्थित HDFC बैंक की ब्रांच से निकली थी। गिरोह ने खुद को केंद्र सरकार के टैक्स अधिकारी बताकर अशोक स्तंभ के पास वैन रोकी, कर्मचारियों को कैश बॉक्स सहित दूसरी गाड़ी में जबरन बिठाया और डेयरी सर्कल की ओर भाग गए।
रिपोर्टों के अनुसार, आरोपियों ने खुद को इनकम टैक्स विभाग और भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) का अधिकारी बताया और कहा कि उन्हें बिना अनुमति के इतनी बड़ा कैश ले जाने के लिए दस्तावेजों की जांच करनी है। उन्होंने कथित तौर पर वैन ड्राइवर को डेयरी सर्कल के पास छोड़ दिया, कैश को अपनी इनोवा कार में, जिस पर भारत सरकार का स्टिकर लगा था, रखकर मौके से फरार हो गए।
बेंगलुरु पुलिस कमिश्नर सीमांत कुमार सिंह ने शनिवार को बताया कि आरोपियों की तलाश के लिए 200 से ज्यादा पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं। उन्होंने कहा कि अब तक 5.76 करोड़ रुपए बरामद किए जा चुके हैं और बाकी की रकम को ट्रेस करने का काम जारी है।
सिंह ने बताया, "हमने 11 टीमें बनाई थीं और इस काम के लिए 200 पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों को लगाया था। 30 से ज्यादा लोगों से पूछताछ की गई है और तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। इनमें वाहन का प्रभारी, CMS इंफोसिस्टम्स का पूर्व कर्मचारी और गोविंदपुरा पुलिस स्टेशन में तैनात एक कांस्टेबल शामिल हैं।"
पुलिस सूत्रों के अनुसार, कांस्टेबल का नाम अन्नप्पा नायक, पूर्व कर्मचारी का नाम जेवियर और वाहन प्रभारी का नाम गोपी है। अपराधियों का पता लगाने के लिए छह टीमें दक्षिण के सभी राज्यों और गोवा भेजी गईं।
जांच अधिकारीयों के अनुसार, गिरोह ने लूट की योजना तीन महीने पहले से बनानी शुरू कर दी थी। उन्होंने नकद वैन के रास्ते का सर्वेक्षण किया और CCTV कैमरों से मुक्त रास्ता चुना।
सिंह ने पुलिस टीम की तारीफ करते हुए कहा कि तीनों आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी मात्र 54 घंटों में की गई। जिस वाहन का इस्तेमाल किया गया था, उसे भी जब्त किया गया है। गिरोह में लगभग छह से आठ सदस्य हैं, जो योजना बनाने, अंजाम देने और लूट के बाद पैसे की आवाजाही में शामिल थे। बाकी आरोपियों की खोज जारी है।
बेंगलुरु पुलिस को पहले से ही इस बात के ठोस सबूत मिले थे कि गिरोह ने लूट से दो दिन पहले दुधा सर्किल फ्लाईओवर के पास स्थान का जमीनी सर्वे किया था, जहां नकद वैन को रोका गया था।