Ayodhya: अयोध्या से वाराणसी की 5 घंटे की दूरी अब सिर्फ 2 घंटे में होगी तय, सिक्स लेन हाई-स्पीड कॉरिडोर से यात्रियों को मिलेगी बड़ी राहत

Ayodhya Varanasi High Speed Expressway: रामनगरी अयोध्या को अयोध्या-वाराणसी हाई-स्पीड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर के रूप में नई उपलब्धि मिलने वाली है। एनएचएआई ने डीपीआर तैयार करने के लिए कंसल्टेंट एजेंसी चयन की प्रक्रिया शुरू की है। छह लेन वाले इस कॉरिडोर से दूरी घटकर 50 किलोमीटर होगी और इसे दो घंटे में तय किया जा सकेगा

अपडेटेड Dec 27, 2025 पर 8:51 AM
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Ayodhya Varanasi High Speed Expressway: कॉरिडोर सीधे दशरथ समाधि से जुड़ने वाला है, जिससे वाराणसी से अयोध्या पहुंचना आसान होगा।

अयोध्या को जल्द ही एक और बड़ी उपलब्धि मिलने वाली है। एनएचएआई ने अयोध्या-वाराणसी हाई-स्पीड एक्सेस कंट्रोल कॉरिडोर के लिए डीपीआर (डिजाइन प्रोजेक्ट रिपोर्ट) बनाने की तैयारी शुरू करने के लिए कंसल्टेंट एजेंसी चुनने की प्रक्रिया शुरू की है। एनएचएआई के परियोजना निदेशक अवनीश सिद्धार्थ के अनुसार, चुनी गई एजेंसी सर्वे और अध्ययन करके डीपीआर तैयार करेगी, जिसमें लगभग डेढ़ साल का समय लगेगा। ये छह लेन वाला कॉरिडोर होगा, जिससे अयोध्या से वाराणसी की दूरी सिर्फ दो घंटे में तय किया जा सकेगा।

इससे यात्रियों का समय बचेगा और धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही ये परियोजना पूर्वांचल के अन्य धार्मिक और सांस्कृतिक स्थलों से भी अच्छी कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेगी, जिससे क्षेत्र का आर्थिक और सामाजिक विकास भी होगा।

डीपीआर प्रक्रिया और कंसल्टेंट एजेंसी का चयन


एनएचएआई के परियोजना निदेशक अवनीश सिद्धार्थ के अनुसार, अभी डीपीआर तैयार करने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कंसल्टेंट एजेंसी का चयन किया जाएगा। इस एजेंसी को सर्वे और रिपोर्ट तैयार करने में लगभग डेढ़ वर्ष का समय लगेगा। ये छह लेन वाला कॉरिडोर होगा, जो यातायात और समय की बचत दोनों में बड़ा योगदान देगा।

यात्रा समय में भारी कमी

कॉरिडोर बनने के बाद अयोध्या और वाराणसी की दूरी लगभग 200 किलोमीटर घटकर 50 किलोमीटर रह जाएगी। इसे लगभग दो घंटे में तय किया जा सकेगा, जबकि वर्तमान में ये दूरी पूरा करने में चार-पांच घंटे लगते हैं। इससे धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और यात्रियों के लिए यात्रा आसान होगी।

सर्वे और मार्ग योजना

भाजपा के जिला संयोजक बृजेश त्रिपाठी के अनुसार, केंद्र सरकार ने दो साल पहले ड्रोन सर्वे कराया था। मयाबाजार ब्लॉक में बबुआपुर और वंदनपुर के खेतों में झंडी लगाकर मार्ग का सर्वे किया गया। इस कॉरिडोर का जीरो प्वाइंट रामपुर हलवारा होगा और ये अंबेडकरनगर जिले के माध्यम से अयोध्या तक पहुंचेगा।

धार्मिक और सांस्कृतिक कनेक्टिविटी में सुधार

कॉरिडोर सीधे दशरथ समाधि से जुड़ने वाला है, जिससे वाराणसी से अयोध्या पहुंचना आसान होगा। इसके अलावा ये पूर्वांचल और प्रयागराज-चित्रकूट मार्ग से भी जुड़ जाएगा। काशी-अयोध्या-चित्रकूट त्रिकोणीय कनेक्टिविटी तैयार होने से यात्रियों के लिए धार्मिक स्थलों तक पहुंचना आसान और समय की बचत होगी।

रिंग रोड से जुड़ी भविष्य की योजना

कॉरिडोर बनने में समय लगेगा, लेकिन उससे पहले 67 किलोमीटर लंबा रिंग रोड 2027 तक तैयार हो जाएगा। लगभग 2,500 करोड़ रुपये की इस परियोजना से अयोध्या के अलावा गोंड़ा और बस्ती जिलों की कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी। रिंग रोड तैयार होने पर अयोध्या-गोंड़ा और बस्ती की यात्रा और तेज और सुविधाजनक हो जाएगी।

नया दृष्टिकोण

ये परियोजना सिर्फ सड़क निर्माण नहीं है, बल्कि धार्मिक पर्यटन और आर्थिक विकास दोनों का पुल साबित होगी। अयोध्या-वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर के निर्माण से न केवल यात्रियों का समय बचेगा, बल्कि क्षेत्रीय विकास, नौकरी के अवसर और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को भी बढ़ावा मिलेगा।

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