बलूच नेता मीर यार बलूच ने भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक खुली चिट्ठी भेजकर दावा किया है कि अगले कुछ महीनों में चीन, पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में अपनी सेना तैनात कर सकता है। मीर यार बलूच ने शुक्रवार को भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर को एक खुला पत्र लिखा है। इस पत्र में उन्होंने चीन और पाकिस्तान के बीच बढ़ते गठबंधन पर गहरी चिंता जताई है। मीर यार बलूच का कहना है कि आने वाले कुछ महीनों में चीन, पाकिस्तान के बलूचिस्तान क्षेत्र में अपने सैनिक तैनात कर सकता है। अपने खुले पत्र में उन्होंने यह भी लिखा कि बलूचिस्तान को पिछले कई दशकों से पाकिस्तान के नियंत्रण में दमन झेलना पड़ा है। उन्होंने आरोप लगाया कि वहां राज्य द्वारा हिंसा करवाई गई और मानवाधिकारों का लगातार उल्लंघन हुआ है।
गौरतलब है कि मई 2025 में बलूच राष्ट्रवादी नेताओं ने पाकिस्तान से आज़ादी की घोषणा की थी। अब मीर यार बलूच ने ऐलान किया है कि बलूचिस्तान गणराज्य 2026 के पहले सप्ताह में “2026 बलूचिस्तान ग्लोबल डिप्लोमेटिक वीक” मनाएगा। इस पहल का मकसद बलूचिस्तान को दुनिया के अलग-अलग देशों से सीधे जोड़ना और अपनी बात अंतरराष्ट्रीय मंच पर रखना है।
'चीन अपने सैनिक तैनात कर सकता है'
बलूच नेता मीर यार बलूच ने चेतावनी दी है कि चीन आने वाले कुछ महीनों में बलूचिस्तान में अपने सैन्य बल तैनात कर सकता है। उनका कहना है कि ऐसा होना न सिर्फ बलूचिस्तान, बल्कि भारत के लिए भी एक गंभीर और तुरंत पैदा होने वाला खतरा होगा। 1 जनवरी 2026 को, बलूचिस्तान गणराज्य के बलूच प्रतिनिधि के तौर पर बयान जारी करते हुए मीर यार बलूच ने कहा कि यदि क्षेत्र की “रक्षा और स्वतंत्रता बलों” की लगातार अनदेखी की जाती रही, तो चीन को बलूचिस्तान में सैनिक भेजने का मौका मिल सकता है। उन्होंने इस संभावित कदम को भारत और बलूचिस्तान—दोनों के भविष्य के लिए “अकल्पनीय खतरा” बताया।
चिट्ठी में लिखी गई ये बातें
चिट्ठी में कहा गया है कि अगर बलूचिस्तान की रक्षा और स्वतंत्रता से जुड़ी ताक़तों को मज़बूत नहीं किया गया और उन्हें पहले की तरह नजरअंदाज़ किया जाता रहा, तो आने वाले कुछ महीनों में चीन बलूचिस्तान में अपने सैनिक तैनात कर सकता है। पत्र में आगे चेतावनी दी गई है कि करीब 6 करोड़ बलूच लोगों की सहमति के बिना बलूचिस्तान की ज़मीन पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी बेहद खतरनाक होगी। इसे भारत और बलूचिस्तान - दोनों के भविष्य के लिए एक बड़ा और अकल्पनीय खतरा बताया गया है।
पत्र में कहा गया है कि अगर बलूचिस्तान की रक्षा और आज़ादी से जुड़ी ताक़तों को और मज़बूत नहीं किया गया, और उन्हें पहले की तरह लगातार नज़रअंदाज़ किया जाता रहा, तो आने वाले कुछ महीनों में चीन बलूचिस्तान में अपने सैनिक तैनात कर सकता है। पत्र में आगे लिखा गया है कि करीब 6 करोड़ बलूच लोगों की सहमति के बिना बलूचिस्तान की जमीन पर चीनी सैनिकों की मौजूदगी एक बड़ा खतरा होगी। इसे भारत और बलूचिस्तान, दोनों के भविष्य के लिए गंभीर और अकल्पनीय चुनौती बताया गया है।
चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) को लेकर गहरी चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि पाकिस्तान और चीन के बीच रणनीतिक साझेदारी अब CPEC के आख़िरी चरणों में पहुंच चुकी है। उनके मुताबिक, इससे हालात और ज़्यादा खतरनाक होते जा रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने भारत और बलूचिस्तान के बीच मज़बूत और आपसी सहयोग की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उनका कहना है कि दोनों के सामने जो खतरे हैं, वे वास्तविक हैं और जल्द सामने आ सकते हैं। पत्र में उन्होंने मोदी सरकार के ऑपरेशन सिंदूर के तहत किए गए कदमों की भी सराहना की। उन्होंने कहा कि इस ऑपरेशन के ज़रिये पाकिस्तान समर्थित आतंकवादी ठिकानों को निशाना बनाया गया और पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने क्षेत्रीय सुरक्षा और न्याय के लिए साहसिक और दृढ़ रुख दिखाया।
हिंदी में शेयर बाजार, स्टॉक मार्केट न्यूज़, बिजनेस न्यूज़, पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App डाउनलोड करें।