Bengal elections 2026: निर्वाचन आयोग ने बुधवार (31 दिसंबर) को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार और पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज अग्रवाल के खिलाफ दायर पुलिस शिकायतों पर तीखी प्रतिक्रिया दी। चुनाव आयोग ने आरोपों को सोची-समझी, बिना सबूत वाली और डराने वाली बताया। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक सिलसिलेवार पोस्ट में पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी ने कहा कि विभिन्न मीडिया रिपोर्ट के माध्यम से उनके संज्ञान में आया है कि 2026 इलेक्शन के लिए चल रहे वोटर लिस्ट के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के संबंध में दो वरिष्ठ चुनाव अधिकारियों के खिलाफ दो शिकायतें दर्ज की गई हैं।
चुनाव आयोग के बयान में कहा गया है कि ये आरोप सोचे-समझे, बिना सबूत वाले और इलेक्शन सिस्टम को धमकाने और वैधानिक प्रक्रिया को पटरी से उतारने का एक घटिया प्रयास प्रतीत होते हैं। बयान में आगे कहा गया है, "इसमें लगाए गए आरोप सोचे-समझे, बिना सबूत वाले और SIR 2026 के संबंध में वैधानिक कर्तव्यों का निर्वहन करने वाले अधिकारियों को डराने-धमकाने का एक घटिया प्रयास प्रतीत होते हैं।"
आयोग ने आगे कहा, "इलेक्शन सिस्टम को दबाव में लाने और प्रक्रिया को पटरी से उतारने के लिए डिजाइन की गई ऐसी डराने-धमकाने वाली चालें निस्संदेह विफल होंगी।" चुनाव आयोग ने यह भी कहा कि जिसे उसने लगातार और मनगढ़ंत शिकायतें बताया। उसके पीछे की साजिश का पता लगाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
ECI के बयान में कहा गया है, "इन लगातार और मनगढ़ंत शिकायतों के पीछे की साजिश का पता लगाने के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी जाएगी। कानून का शासन और सच्चाई की जीत होगी। राज्य में चुनाव तंत्र पूरी तरह से और केवल जनहित में दृढ़ता और ईमानदारी के साथ काम करने के लिए प्रतिबद्ध है।"
पुरुलिया के मतदाता दुर्जन माझी के बेटे ने आरोप लगाया कि उसके पिता का नाम 2002 की SIR की फिजिकल लिस्ट में था। लेकिन EC की वेबसाइट पर अपलोड की गई 2002 की सूची से गायब था, जिसके कारण सुनवाई का नोटिस जारी किया गया।
कथित तौर पर 82 वर्षीय व्यक्ति की निर्धारित सुनवाई से कुछ घंटे पहले आत्महत्या कर ली। हालांकि, EC ने 27 दिसंबर को जारी एक नोटिफिकेशन में कहा कि लगभग 1.3 लाख वोटर जिनके नाम फिजिकल 2002 SIR रोल में हैं। लेकिन टेक्निकल गड़बड़ी के कारण ऑनलाइन डेटाबेस से गायब हैं, उन्हें सुनवाई के लिए पेश होने की जरूरत नहीं होगी।