कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने शनिवार को कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों पर हो रहे हमलों के जवाब में क्रिकेट को राजनीति से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उन्होंने यह टिप्पणी BCCI के निर्देश के बाद कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिज़ुर रहमान को टीम से बाहर किए जाने के फैसले पर की। शशि थरूर ने इस फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर यही खिलाड़ी लिटन दास या सौम्य सरकार होते, जो हिंदू हैं, तो क्या तब भी ऐसा ही रवैया अपनाया जाता। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि यह साफ नहीं है कि ऐसे फैसलों से किसे सज़ा दी जा रही है—किसी देश को, किसी खिलाड़ी को या उसके धर्म को। उनके मुताबिक, खेल का इस तरह जल्दबाजी में राजनीतिकरण करना सही दिशा नहीं है।
केकेआर ने बांग्लादेशी खिलाड़ी को किया रिलीज
बांग्लादेशी तेज गेंदबाज मुस्तफिज़ुर रहमान को कोलकाता नाइट राइडर्स ने दिसंबर 2025 में IPL 2026 के मिनी ऑक्शन में 9.20 करोड़ रुपये में खरीदा था। शुरुआत में यह फैसला पूरी तरह क्रिकेट से जुड़ी वजहों से चर्चा में रहा, लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं पर बढ़ते हमलों की खबरों के बाद मामला राजनीतिक विवाद में बदल गया। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी के कुछ नेताओं ने रहमान को टीम से हटाने की मांग की। इस मुद्दे पर पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों के खिलाफ हो रही हिंसा का बोझ क्रिकेट पर नहीं डाला जाना चाहिए। उन्होंने ज़ोर देकर कहा कि भारत को ढाका पर अल्पसंख्यकों की सुरक्षा को लेकर दबाव बनाते रहना चाहिए, लेकिन रहमान का इन घटनाओं से कोई सीधा संबंध नहीं है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि संबंधित खिलाड़ी पर न तो नफरत फैलाने वाले बयान देने का आरोप है और न ही किसी हमले या हिंसा का समर्थन करने का। उनके मुताबिक, वह सिर्फ एक खिलाड़ी हैं और खेल को राजनीति से जोड़ना बिल्कुल सही नहीं है। शशि थरूर ने यह भी बताया कि भारत लगातार बांग्लादेश से बातचीत कर रहा है और वहां अल्पसंख्यकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की बात कह रहा है। उन्होंने कहा कि यह संदेश आगे भी मजबूती से दिया जाता रहना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने साफ कहा कि खेल के बहिष्कार के जरिए पड़ोसी देशों को अलग-थलग करना किसी भी तरह से सकारात्मक या रचनात्मक समाधान नहीं है।
एक पूर्व राजनयिक ने कहा कि अगर भारत अपने सभी पड़ोसी देशों को अलग-थलग करना शुरू कर दे और यह कहे कि उनके साथ कोई खेल या संपर्क नहीं होगा, तो इससे कोई फायदा नहीं मिलेगा। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों में बड़ी सोच और संयम की जरूरत होती है। इस बीच, इस हफ्ते की शुरुआत में विवाद तब बढ़ गया जब संगीत सोम ने कोलकाता नाइट राइडर्स द्वारा मुस्तफ़िज़ुर रहमान को साइन करने के फैसले पर शाहरुख खान पर तीखा हमला बोला। इसके बाद भारतीय जनता पार्टी और शिवसेना के कुछ अन्य नेताओं ने भी आपत्ति जताई। उनका कहना था कि बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों के बीच वे नहीं चाहते कि रहमान IPL में खेलें। संगीत सोम ने दावा किया कि बांग्लादेश में हिंदुओं के साथ हिंसा हो रही है और ऐसे हालात में वहां के खिलाड़ियों को साइन करना गलत है। उनके बयान के बाद यह मुद्दा और ज्यादा राजनीतिक रंग लेता चला गया।