RCB की जीत के बाद सड़कों पर लाखों फैंस, रातभर मैनेज करते हुए थकी पुलिस, एक साथ दो इवेंट के चक्कर में मातम में बदला जश्न
3 जून की रात को RCB की जीत के साथ ही बेंगलुरु की सड़कों पर रातभर जश्न चला, जिसे पुलिस ने मैनेज किया। अगले ही दिन फिर विधानसभा के बाहर टीम के खिलाड़ियों का सम्मान समारोह और उसके 2 Km के दायरे में चिन्नास्वामी स्टेडियम में एक और इवेंट... 24 घंटे से भी कम समय में एक साथ इतने बड़े आयोजनों को मैनेज करने से पहले ही पुलिस थक चुकी थी और न उसे तैयारियों का पर्याप्त समय मिला
Bengaluru Stampede: थकी हुई थी पुलिस, 2 Km के दायरे में दो बड़े इवेंट और चरमरा गई पूरी व्यवस्था! कैसे RCB की जीत का जश्न मातम में बदला?
मंगलवार रात को RCB ने पंजाब किंग्स को हराकर IPL में 18 साल का सूखा खत्म किया, जिसके बाद बेंगलुरु में जश्न का माहौल था। कुछ घंटों बाद चिन्नास्वामी स्टेडियम के बाहर एक हादसा हुआ, जहां टीम की घर वापसी के जश्न के दौरान भगदड़ मच गई, जिसमें 11 लोगों की मौत हो गई और करीब 50 लोग घायल हो गए। विशेषज्ञ इस बड़े हादसे के पीछे कई गलतियों और खामियों को कारण बताते हैं- सरकार की तरफ से जल्दबाजी में लिए गए फैसले, विरोधाभासी संदेश, खराब योजना, थका हुआ पुलिस बल, भीड़ का खराब मैनेजमेंट और बहुत देरी से रिस्पांस, जो आखिरकार आपदा का कारण बने।
क्यों मची अफरा-तफरी और भगदड़?
RCB ने सुबह-सुबह सोशल मीडिया पर विधान सौधा से चिन्नास्वामी स्टेडियम तक विक्ट्री परेड की घोषणा की, जिससे बहुत उत्साह पैदा हुआ। इंस्टाग्राम और X पर इसे 10 लाख से ज्यादा लाइक और 1.5 मिलियन से ज्यादा व्यू मिले।
हालांकि, सुबह 11:55 बजे बेंगलुरु शहर पुलिस ने साफ कर दिया कि कोई परेड नहीं की जाएगी, केवल स्टेडियम में शाम 5-6 बजे तक सम्मान समारोह आयोजित किया जाएगा। इसके बावजूद, RCB और कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (KSCA) ने राज्य सरकार से विक्ट्री परेड करने की अनुमति लेने की कोशिश की।
बेंगलुरु पुलिस की तरफ से इनकार के बाद, BJP नेता और बेंगलुरु सेंट्रल के सांसद पीसी मोहन सहित कई फैंस ने परेड की अनुमति नहीं देने के फैसले पर सवाल उठाया।
दोपहर करीब 12:15 बजे मुख्यमंत्री कार्यालय ने आधिकारिक तौर पर घोषणा की कि टीम के लिए सम्मान समारोह शाम 4 बजे विधान सौधा में किया जाएगा।
उपमुख्यमंत्री और बेंगलुरु विकास मंत्री डीके शिवकुमार ने फैंस से HAL एयरपोर्ट पर इकट्ठा न होने और इसके बजाय चिन्नास्वामी स्टेडियम में आने का आग्रह किया। RCB की टीम के खिलाड़ी और सदस्य दोपहर करीब 2:30 बजे HAL एयरपोर्ट पर पहुंचे।
भ्रम की स्थिति तब और बढ़ गई, जब दोपहर 3:15 बजे RCB की सोशल मीडिया पोस्ट में परेड की बात दोहराई गई और फ्री ऑनलाइन पास ऑफर किए गिए। हालांकि, पुलिस विक्ट्री परेड के बारे में कुछ मालूम नहीं था।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने Moneycontrol को बताया कि पुलिस फोर्स रात भर के जश्न से थक चुका था और भारी भीड़ के लिए तैयार नहीं था। उन्होंने कहा, "हमने इमोशन और लॉजिस्टिक को बेहतर ढंग से मैनेज करने के लिए कार्यक्रम को स्थगित करने की सलाह दी थी, लेकिन राजनीतिक कारणों से ऐसा नहीं हुआ।"
दोपहर 3:30 बजे के बाद, स्टेडियम के पास एक फुटपाथ की स्लैब भीड़ के दबाव में ढह गई, जिससे अफरातफरी मच गई। पास को लेकर असमंजस, संकरे एंट्री गेट, पहले आओ-पहले पाओ की व्यवस्था, भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लाठीचार्ज, मोबाइल नेटवर्क की कमी और पुलिस से कहीं ज्यादा भीड़ ने भगदड़ जैसी स्थिति पैदा कर दी। भीड़ के बढ़ने के बीच बैरिकेड भी गिर गए।
एक और अधिकारी ने Moneycontrol को बताया कि अलग-अलग एजेंसियों के बीच खराब कम्युनिकेशन और समन्वय, 2 Km के दायरे में दो अलग-अलग इवेंट और पुलिस कर्मियों की कमी ने समस्या को और बढ़ा दिया।
एक और अधिकारी ने कहा, "पुलिस ने विधान सौधा पर फोकस किया, जहां ज्यादा VIP मौजूद थे, जिससे चिन्नास्वामी स्टेडियम के पास के इलाकों में कम कर्मचारी रह गए, क्योंकि भारी भीड़ सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट की संकरी सड़कों पर आ गई। कम तैयारी के साथ इतनी भीड़ को संभालना लगभग असंभव था।" भीड़ इतनी थी कि हाई कोर्ट बिल्डिंग, पेड़ों और दूसरी इमारतों और स्ट्रक्चर पर चढ़ते लोगों की तस्वीरें भी वायरल हुईं।
इसे कैसे टाला जा सकता था?
रिटायर्ड आर्मी और IAS अधिकारी एमजी देवसहायम ने Moneycontrol से कहा, "विधानसभा में सम्मान समारोह की कोई जरूरत नहीं थी। परेड, विधानसभा कार्यक्रम - इनमें से कुछ भी जरूरी नहीं था। टीम बमुश्किल बेंगलुरु का प्रतिनिधित्व करती है, फिर भी राज्य स्तरीय समारोह आयोजित किया गया। यह एक कृत्रिम उन्माद था, जिसे राजनेताओं और जनता के एक वर्ग ने भड़काया था, जो उग्र होने का बहाना ढूंढ रहे थे।"
उन्होंने कहा, "RCB एक निजी क्लब है, जिसमें कुछ ही स्थानीय खिलाड़ी हैं - राज्य स्तर पर जश्न मनाने की क्या जरूरत है? पुलिस की चेतावनी के बाद भी राजनेताओं ने लाभ उठाने की कोशिश की। पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई: भीड़ का उन्माद, खराब योजना और गलत प्राथमिकताएं। यह ओलंपिक या विश्व कप नहीं है। चेन्नई ने कई बार IPL जीता है और बिना किसी अराजकता के जश्न मनाया है।"
उन्होंने कहा कि पहले से ही थकी हुई पुलिस फोर्स को कुछ ही घंटों के नोटिस पर एक असंभव काम सौंप दिया गया। राव ने कहा, "RCB फैंस का जश्न पूरी रात चलता रहा और अगली दोपहर तक अधिकारियों ने बिना किसी तैयारी के दो अवैध कार्यक्रम आयोजित करने का फैसला किया।"
राव ने कहा, "अब मुख्यमंत्री पुलिस पर दोष मढ़ रहे हैं, जो गलत है। यह एक राजनीतिक विफलता थी और मुख्यमंत्री, DyCM और गृह मंत्री को इसकी जिम्मेदारी लेनी चाहिए। राजनीतिक गलत निर्णय के कारण हुई आपदा के लिए पुलिस को अब बलि का बकरा बनाया जा रहा है। उन्हें उन्माद के चरम पर होने के बावजूद जल्दबाजी करने के बजाय उत्सव को स्थगित कर देना चाहिए था। उस रात बेंगलुरु में कोई भी व्यक्ति जानता होगा - ऐसा लगा जैसे 5 से 10 दीपावली एक साथ मनाई गई हों। आसमान जगमगा उठा था और सुबह 4:30 या 5 बजे तक पटाखे फूटते रहे।"
उन्होंने कहा कि उन्हें इसे कार्यक्रम में देरी के लिए एक संकेत के रूप में लेना चाहिए था। राव ने कहा, "जैसे चुनावों के दौरान, हम अराजकता को रोकने के लिए नतीजों के तुरंत बाद जुलूस निकालने से बचते हैं। यही तर्क यहां भी लागू होना चाहिए था। अब वे दावा करते हैं कि विदेशी खिलाड़ी जाने की जल्दी में थे, इसलिए कार्यक्रम को जल्दी करना पड़ा। लेकिन यह सिर्फ एक बहाना है। इस तरह के दबाव में झुकना और सार्वजनिक सुरक्षा को जोखिम में डालना मंजूर नहीं है। ये निराधार, अनुचित तर्क हैं, जिनका इस्तेमाल एक खराब योजनाबद्ध और खतरनाक निर्णय को सही ठहराने के लिए किया जाता है।"
सरकार और BCCI ने क्या कहा?
मुख्यमंत्री सिद्धारमैया ने कहा, "पूरी बेंगलुरु पुलिस तैनात की गई थी। ऐसा नहीं होना चाहिए था। हम पीड़ितों के साथ खड़े हैं और इसका राजनीतिकरण नहीं करेंगे।" उन्होंने 15 दिन की समयसीमा के साथ मजिस्ट्रेट जांच का आदेश दिया। उन्होंने कहा, "लोगों ने स्टेडियम के गेट तोड़ दिए, जिससे भगदड़ मच गई। स्टेडियम की क्षमता 35,000 है, लेकिन 2-3 लाख लोग इकट्ठा हुए।"
उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार ने माफी मांगते हुए कहा कि भीड़ बेकाबू थी और पुलिस ने अप्रत्याशित रूप से बड़ी संख्या में लोगों के कारण ओपन-बस परेड की अनुमति देने से इनकार कर दिया था। BCCI ने कहा कि इस कार्यक्रम के आयोजन में उसकी कोई भूमिका नहीं थी, लेकिन भविष्य के समारोहों के लिए दिशानिर्देशों की समीक्षा की जाएगी। RCB ने एक बयान जारी कर नुकसान पर शोक जताया और प्रशंसकों से सुरक्षित रहने का आग्रह किया।
2008 में, भारत की अंडर-19 वर्ल्ड कप जीत के बाद बेंगलुरु में एक ओपन बस परेड कराई गई थी, जिसमें विराट कोहली ने तत्कालीन RCB के मालिक विजय माल्या की ओर से आयोजित 10 किलोमीटर की विक्ट्री परेड में भाग लिया था।
राव ने कहा, "भीड़ को कई हिस्सों में बांटना चाहिए था। यह पानी ढोने जैसा है - अगर आप एक पूरा ड्रम हिलाने की कोशिश करते हैं, तो यह अस्थिर हो जाता है और इसे संभालना मुश्किल होता है। लेकिन अगर आप इसे छोटे बर्तनों में बांटते हैं, तो आप उन्हें ज्यादा आसानी से संभाल सकते हैं। इसी तरह, भीड़ को छोटे, संगठित हिस्सों में नियंत्रित किया जाना चाहिए था। पूरा ग्राउंड मैनेजमेंट जरूरी था। दुर्भाग्य से, शहर की पुलिस पहले से ही थकी हुई थी, पिछली रात से ही जश्न की ड्यूटी पर लगी थी।"
बेंगलुरु पुलिस भगदड़ की घटना के संबंध में रॉयल चैलेंजर्स बैंगलोर (RCB), कर्नाटक राज्य क्रिकेट संघ (KSCA) और इवेंट मैनेजमेंट कंपनी DNA नेटवर्क के खिलाफ FIR दर्ज की है।
राज्य सरकार ने बेंगलुरु अर्बन DC जी जगदीश को भगदड़ के कारणों और जवाबदेही की जांच के लिए मजिस्ट्रेट जांच का नेतृत्व करने के लिए नियुक्त किया है, जिसकी रिपोर्ट 15 दिनों में आनी है। क्या जांच से सार्थक कार्रवाई होगी, यह देखना अभी बाकी है।