बिहार के BJP MLA राजू सिंह को 4 साल की सजा, इस मामले में दिल्ली कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

BJP MLA Raju Kumar Singh : सजा सुनाए जाने से पहले राजू कुमार सिंह ने अदालत से उन्हें प्रोबेशन पर रिहा करने की अपील की। उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन और साफ रिकॉर्ड का भी हवाला दिया। उनके वकील नंदिता राव ने अदालत में कहा कि राजू कुमार सिंह छह बार विधायक रह चुके हैं और लगातार अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा कर रहे हैं

अपडेटेड Jul 04, 2026 पर 6:15 PM
बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को 2018 में जश्न के दौरान हुई हर्ष फायरिंग के मामले में दोषी करार दिया है।

दिल्ली की एक अदालत ने शनिवार को बिहार से बीजेपी विधायक राजू कुमार सिंह को 2018 में जश्न के दौरान हुई हर्ष फायरिंग के मामले में दोषी करार देते हुए चार साल की साधारण कैद की सजा सुनाई। इस घटना में दिल्ली के फतेहपुर बेरी स्थित एक फार्महाउस में नए साल की पार्टी के दौरान डॉक्टर अर्चना गुप्ता की गोली लगने से मौत हो गई थी। राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने राजू कुमार सिंह को गैर-इरादतन हत्या के मामले में दोषी मानते हुए चार साल की सजा सुनाई। इसके अलावा हथियार के लाइसेंस की शर्तों का उल्लंघन करने के मामले में उन्हें आर्म्स एक्ट के तहत दो महीने की अतिरिक्त कैद की सजा भी दी गई।

बिहार के BJP MLA राजू सिंह को 4 साल की सजा

सज़ा सुनाते हुए अदालत ने कहा कि राजू कुमार सिंह को गैर-इरादतन हत्या के मामले में चार साल की साधारण कैद और आर्म्स एक्ट के उल्लंघन के लिए दो महीने की कैद की सजा दी जाती है। अदालत ने यह भी आदेश दिया कि राजू कुमार सिंह पीड़िता के पति को मुआवज़े के रूप में 25 लाख रुपये देंगे। अगर वह यह रकम नहीं देते हैं, तो उन्हें तीन महीने की अतिरिक्त जेल की सजा काटनी होगी। 56 वर्षीय राजू कुमार सिंह को पिछले महीने इस मामले में दोषी ठहराया गया था। यह घटना 31 दिसंबर 2018 और 1 जनवरी 2019 की रात नए साल के जश्न के दौरान हुई थी, जब हर्ष फायरिंग में 45 वर्षीय डॉक्टर अर्चना गुप्ता की गोली लगने से मौत हो गई थी।


इस मामले में दिल्ली कोर्ट ने दिया बड़ा फैसला

सजा सुनाए जाने से पहले राजू कुमार सिंह ने अदालत से उन्हें प्रोबेशन पर रिहा करने की अपील की।  उन्होंने अपने लंबे सार्वजनिक जीवन और साफ रिकॉर्ड का भी हवाला दिया। उनके वकील नंदिता राव ने अदालत में कहा कि राजू कुमार सिंह छह बार विधायक रह चुके हैं और लगातार अपने क्षेत्र के लोगों की सेवा कर रहे हैं। वह एक शिक्षित व्यक्ति हैं और पहले कभी किसी मामले में दोषी नहीं ठहराए गए। इसलिए उनके साथ नरमी बरतते हुए उन्हें प्रोबेशन पर रिहा करने पर विचार किया जाना चाहिए।

राजू कुमार सिंह की ओर से वकील राजीव मोहन ने भी अदालत से कहा कि भले ही उन्हें गैर-इरादतन हत्या का दोषी माना गया है, लेकिन सजा तय करते समय यह भी देखा जाना चाहिए कि घटना किन परिस्थितियों में हुई और लापरवाही कितनी गंभीर थी। वहीं, सरकारी वकील चिरंजीत सिंह ने इस मांग का विरोध किया। उन्होंने कहा कि अगर ऐसे मामले में प्रोबेशन दिया गया, तो समाज में गलत संदेश जाएगा, खासकर जश्न के दौरान हर्ष फायरिंग जैसी घटनाओं को लेकर। उन्होंने यह भी बताया कि इस हादसे में जान गंवाने वाली डॉक्टर अर्चना गुप्ता 45 साल की थीं और उनकी 12 साल की बेटी ने पूरी घटना अपनी आंखों के सामने देखी थी। उनके परिवार को जो सदमा पहुंचा, उसे शब्दों में बयां करना मुश्किल है।

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