बुर्का, नकाब या मास्क पहनने वाले नहीं खरीद पाएंगे सोना-चांदी! बिहार के सर्राफा व्यापारियों का बड़ा ऐलान

AIJGF की बिहार इकाई के अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने पटना में मीडिया से कहा, "खरीदारी के समय पहचान के लिए ग्राहकों के चेहरे दिखाई न देने पर दुकान में उनकी एंट्री नहीं होगी।" हालांकि, बिहार में इस फैसले पर राजनीति भी चालू हो गई। विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्य प्रवक्ता एजाज अहमद ने इस घटनाक्रम पर आपत्ति जताई

अपडेटेड Jan 07, 2026 पर 9:08 PM
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Bihar News: बुर्का, नकाब या मास्क पहनने वाले नहीं खरीद पाएंगे सोना-चांदी

देश में सोने-चांदी की बढ़ती कीमतों के बीच, ऑल इंडिया ज्वैलर्स एंड गोल्ड फेडरेशन (AIJGF) की राज्य इकाई ने बुधवार (7 जनवरी, 2026) को कहा कि सुरक्षा कारणों से बिहार में चेहरे ढके हुए पुरुष और महिलाएं सोना नहीं खरीद सकते हैं। फेडरेशन ने कहा कि बिहार में आभूषण की दुकानें हिजाब, नकाब, बुर्का (पर्दा), स्कार्फ, मास्क, हेलमेट आदि से चेहरा ढके हुए ग्राहकों को प्रवेश और बिक्री से इनकार कर सकती हैं।

AIJGF की बिहार इकाई के अध्यक्ष अशोक कुमार वर्मा ने पटना में मीडिया से कहा, "खरीदारी के समय पहचान के लिए ग्राहकों के चेहरे दिखाई न देने पर दुकान में उनकी एंट्री नहीं होगी।" उन्होंने आगे कहा कि यह निर्णय "पूरी तरह से सुरक्षा कारणों से लिया गया है और किसी विशेष समुदाय या धार्मिक समूह को लक्षित नहीं करता है।"

उन्होंने आगे कहा, “फेडरेशन हिजाब या बुर्का पर प्रतिबंध नहीं लगा रहा है, बल्कि ग्राहकों से खरीदारी के दौरान पहचान के लिए अपना चेहरा दिखाने का अनुरोध कर रहा है।”


वर्मा ने कहा, “यह नियम उन पुरुषों पर भी बराबरी से लागू होता है, जो अपने चेहरे को स्कार्फ या हेलमेट से ढकते हैं। यह निर्देश सभी के लिए है, किसी विशेष समुदाय या धर्म के खिलाफ नहीं।”

पुलिस से बातचीत कर लागू किया गया नियम

वर्मा ने आगे बताया, “आज 10 ग्राम सोने की कीमत लगभग 1.40 लाख रुपए है, जबकि एक किलोग्राम चांदी की कीमत 2.5 लाख रुपए है। समस्या तब पैदा होती है, जब लोग अपना चेहरा छुपाकर दुकानों में घुसते हैं। वे तीन-चार लोगों के समूह में आते हैं, पूरे चेहरे पर नकाब या मास्क पहने होते हैं और लूटपाट करते हैं। हाल ही में, चेहरे पर नकाब पहने नकाबपोश पुरुषों और महिलाओं के लूटपाट और चोरी करने की कई घटनाएं सामने आई हैं। यह निर्णय पूरी तरह से ऐसे अपराधों को रोकने के उद्देश्य से लिया गया है।”

वर्मा ने कहा, “मैंने पटना के वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों से इस बारे में बात की है, जिन्होंने इस नियम को लागू करने पर कोई आपत्ति नहीं जताई है, जिसका पालन राज्य की कई दुकानों ने शुरू कर दिया है। हमारा इरादा भेदभाव करने का नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “दूसरे राज्यों के कुछ जिलों में भी इसी तरह के एहतियाती उपाय अपनाए जा रहे हैं, लेकिन बिहार पहला राज्य है, जिसने पूरे राज्य में इस निर्देश का पालन किया है।”

RJD ने किया फैसले का विरोध

हालांकि, बिहार में इस फैसले पर राजनीति भी चालू हो गई। विपक्षी राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के राज्य प्रवक्ता एजाज अहमद ने इस घटनाक्रम पर आपत्ति जताई।

अहमद ने कहा, “यह कदम असंवैधानिक है और भारत की धर्मनिरपेक्ष और संवैधानिक परंपराओं के खिलाफ है।” उन्होंने आगे कहा, “यह संविधान में निहित धार्मिक स्वतंत्रता के मौलिक अधिकार को सीमित करने की कोशिश है।” उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) इस कदम के पीछे हैं।

अहमद ने कहा, “इस तरह के असंवैधानिक कदमों को बढ़ावा देना और उनका पालन करना देश के धर्मनिरपेक्ष ताने-बाने को कमजोर कर सकता है। किसी भी दुकान का कोई भी कर्मचारी किसी का हिजाब या बुर्का नहीं हटा सकता। हम इसके लिए केवल विनम्र निवेदन कर सकते हैं, इस पर किसी भी तरह के टकराव का कोई सवाल ही नहीं है।”

उन्होंने आगे कहा, “जिस फिडरेशन ने ऐसा असंवैधानिक और अव्यावहारिक निर्णय जारी किया है, उसका उद्देश्य ग्राहकों और दुकानदारों दोनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।”

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