बिहार के मुख्यमंत्री पद की चर्चाओं के बीच नीतीश कुमार ने नितिन नबीन के साथ राज्यसभा के लिए अपना नामांकन दाखिल कर दिया है। नामांकन भरने के बाद नीतीश कुमार एक आने मार्ग पहुंचे। नीतीश कुमार और नितिन नवीन सहित बिहार से NDA के राज्यसभा उम्मीदवारों ने केंद्रीय मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में अपना नामांकन दाखिल किया। बिहार से NDA के राज्यसभा उम्मीदवारों में नीतीश कुमार और नितिन नबीन के अलावा उपेंद्र कुशवाहा और शिवेश कुमार भी शामिल हैं, उन्होंने भी अपना नामांकन दाखिल किया। इसके बाद अमित शाह स्टेट गेस्ट हाउस पहुंचे, जहां उनकी बैठकों का दौर चालू है। BJP के कई नेता भी वहां पहुंचे।
इसके साथ ही सबसे लंबे समय तक बिहार के मुख्यमंत्री के रूप में नीतीश कुमार के कार्यकाल का अंत हो जाएगा। नीतीश साल 2005 से अब तक रिकॉर्ड 10 बार बिहार के मुख्यमंत्री रहे हैं। उन्होंने कहा कि राज्य में नए मुख्यमंत्री और राज्य की नयी सरकार को उनका पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा।
नीतीश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट में राज्य की जनता के प्रति आभार जताते हुए कहा, ‘‘दो दशकों से ज्यादा समय तक आपने मुझ पर लगातार भरोसा और समर्थन जताया है। उसी विश्वास की ताकत से हमने बिहार और आप सभी की पूरी समर्पण भावना से सेवा की है। आपके भरोसे और समर्थन के कारण ही आज बिहार विकास और सम्मान की एक नयी पहचान प्रस्तुत कर रहा है।’’
उन्होंने कहा कि अपने संसदीय जीवन की शुरुआत से ही उनकी इच्छा रही है कि वह राज्य विधानमंडल के दोनों सदनों और संसद के दोनों सदनों के सदस्य बनें।
उन्होंने कहा, ‘‘इसी आकांक्षा के अनुरूप मैं इस बार होने वाले चुनाव में राज्यसभा का सदस्य बनने का प्रयास कर रहा हूं।’’
कुमार ने कहा, ‘‘मैं आपको पूरे विश्वास के साथ आश्वस्त करना चाहता हूं कि भविष्य में भी आपसे मेरा संबंध बना रहेगा और विकसित बिहार के निर्माण के लिए आपके साथ मिलकर काम करने का मेरा संकल्प अटल रहेगा। राज्य में बनने वाली नयी सरकार को मेरा पूरा सहयोग और मार्गदर्शन मिलेगा।’’
पिछले साल नवंबर में हुए विधानसभा चुनाव में सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) को प्रचंड जीत दिलाने के बाद कुमार के पद छोड़ने के साथ ही भारतीय जनता पार्टी (BJP) का कोई नेता राज्य के मुख्यमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाल सकता है।
अगर ऐसा होता है, तो बिहार को पहली बार भाजपा का मुख्यमंत्री मिलेगा। हिंदी पट्टी के राज्यों में बिहार ही एकमात्र ऐसा राज्य है, जहां अब तक भाजपा का मुख्यमंत्री नहीं रहा है।