बिहार में राज्यसभा की 5 सीटों के लिए हुए चुनाव में एनडीए के सभी उम्मीदवारों की जीत हुई है। महागठबंधन के खाते में एक सीट जा सकती थी, लेकिन कांग्रेस के तीन और आरजेडी के 1 विधायक ने मतदान में भाग नहीं लिया। वहीं महागबंधन के चार विधायकों के वोट ना डालने की वजह से 5वीं सीट भी एनडीए ने जीत ली। द्वितीय वरीयता के वोटों की गिनती के आधार पर एनडीए के 5वें उम्मीदवार शिवेश कुमार जीत गए। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, रामनाथ ठाकुर, नितिन नवीन, शिवेश राम और उपेंद्र कुशवाहा अब राज्यसभा के सदस्य बनेंगे।
तेजस्वी ने साधा बीजेपी पर निशाना
वहीं राज्यसभा चुनाव के नतीजों पर विपक्ष के नेता और आरजेडी प्रमुख तेजस्वी यादव ने बीजेपी पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने बीजेपी पर मनी पावर और मशीन तंत्र का इस्तेमाल करने का गंभीर आरोप लगाया. उन्होंने ये भी कहा कि अगर हमारे विधायकों ने धोखा न दिया होता था तो हमारी जीत तय थी। वहीं राज्यसभा चुनाव नतीजों पर RJD के राज्यसभा सांसद अमरेंद्र धारी सिंह ने कहा, "जीतने के बावजूद हम हार गए। हमारे पास ज़रूरी संख्या थी। इसमें 'हॉर्स ट्रेडिंग' हुई है, और जो चार वोटर वोट डालने नहीं आए, वे हमारे ही गठबंधन के थे। "
राज्यसभा चुनाव नतीजों पर बिहार के मंत्री राम कृपाल यादव ने कहा, "NDA के सभी पांचों उम्मीदवार जीत गए हैं और मैं सभी को बधाई देता हूं। जिस तरह से NDA अब तक जीतता आया है, भविष्य में भी वह इसी तरह जीतता रहेगा। "
बता दें कि, भाजपा गठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री नीतीश कुमार, बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन और उपेंद्र कुशवाहा समेत पांच उम्मीदवार मैदान में थे। एनडीए के सूत्रों का कहना है कि गठबंधन के सभी 202 विधायकों ने मतदान में हिस्सा लिया। इस गठबंधन में जनता दल (यूनाइटेड), चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास), जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा शामिल हैं, जिससे एनडीए को साफ बढ़त मिलती दिखाई दी। इधर विपक्षी महागठबंधन को राज्यसभा चुनाव में झटका लगा, क्योंकि उसके चार विधायक मतदान में शामिल नहीं हो पाए। इसी वजह से गठबंधन अपने उम्मीदवार के लिए जरूरी 41 पहली पसंद के वोट जुटाने में सफल नहीं हो सका। राष्ट्रीय जनता दल, कांग्रेस और वाम दलों के इस गठबंधन के पास कुल 35 विधायक थे और वे अपने उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के समर्थन में बाकी पार्टियों से छह अतिरिक्त वोट पाने की कोशिश कर रहे थे, लेकिन यह कोशिश पूरी नहीं हो पाई।
बिहार में राज्यसभा चुनाव के नियमों के अनुसार अगर विधानसभा के सभी 243 विधायक वोट डालते, तो किसी भी उम्मीदवार को जीत के लिए कम से कम 41 वोट हासिल करना जरूरी होता। 243 सदस्यों वाली बिहार विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी के पास 89 विधायक हैं, जबकि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल (यूनाइटेड) के 85 विधायक हैं। वहीं राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के अन्य दलों में चिराग पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी (राम विलास) के 19 विधायक, जीतन राम मांझी की हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (सेक्युलर) के 5 विधायक और उपेंद्र कुशवाहा की राष्ट्रीय लोक मोर्चा के 4 विधायक शामिल हैं, जिससे एनडीए को विधानसभा में मजबूत संख्या बल मिला हुआ है।
विधायकों ने बिगाड़ा समीकरण!
बिहार राज्यसभा चुनाव में विपक्षी महागठबंधन को इसलिए झटका लगा क्योंकि उसके कुछ विधायक मतदान में शामिल नहीं हुए। कांग्रेस के तीन और राष्ट्रीय जनता दल के एक विधायक के अनुपस्थित रहने से गठबंधन की कुल वोटिंग ताकत कम हो गई और उनके उम्मीदवार अमरेंद्र धारी सिंह के लिए जरूरी 41 वोट हासिल करना मुश्किल हो गया। बताया जा रहा है कि ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन के पाँच विधायक और बहुजन समाज पार्टी के एक विधायक ने आरजेडी उम्मीदवार का समर्थन किया, लेकिन अपने ही चार विधायकों की गैरहाजिरी से यह बढ़त बेअसर हो गई।