गैस की किल्लत के बीच बड़ी राहत, अमेरिका से 16,714 टन LPG लेकर मंगलुरु पोर्ट पहुंचा 'पिक्सिस पायनियर'

LPG Cargo Ship: मंगलुरु पोर्ट पर केवल गैस ही नहीं, बल्कि कच्चे तेल की सप्लाई भी पहुंच रही है। पिक्सिस पायनियर से पहले रूस का एक विशाल जहाज 'एक्वा टाइटन' भी कच्चा तेल लेकर बीते दिन मंगलुरु पहुंचा था।बेंगलुरु सहित कर्नाटक के अन्य हिस्सों में होटल और रेस्टोरेंट गैस की कमी से बंद हो रहे थे, ऐसे में मंगलुरु पोर्ट पर उतरी यह खेप स्थानीय बाजार को बड़ी राहत देगी।

अपडेटेड Mar 22, 2026 पर 1:04 PM
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यह खेप ऐसे समय में आई है जब होर्मुज संकट के कारण भारत में कमर्शियल गैस की भारी कमी देखने को मिल रही है

Pyxis Pioneer: मिडिल ईस्ट में जारी युद्ध और देश में LPG की बढ़ती किल्लत के बीच एक अच्छी खबर आई है। रविवार सुबह अमेरिका से भारी मात्रा में रसोई गैस लेकर एक विशाल जहाज, पिक्सिस पायनियर (Pyxis Pioneer), मंगलुरु पोर्ट पहुंच गया है। न्यू मंगलुरु पोर्ट अथॉरिटी (NMPA) के अनुसार, इस जहाज के आने से गैस की सप्लाई में सुधार होने की उम्मीद है।

सिंगापुर के झंडे वाला यह टैंकर लगभग 47,236 टन वजनी है। यह रविवार सुबह करीब 6 बजे मंगलुरु पोर्ट के बर्थ नंबर 13 पर आकर लगा। यह जहाज 14 फरवरी को अमेरिका के टेक्सास में स्थित पोर्ट ऑफ नीदरलैंड से रवाना हुआ था। यह करीब सवा महीने का सफर तय कर भारत पहुंचा है।


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यह टैंकर 'एजिस लॉजिस्टिक्स लिमिटेड' (Aegis Logistics Ltd.) के लिए 16,714 टन एलपीजी लेकर आया है। सोमवार सुबह तक गैस खाली करने के बाद यह जहाज वापस रवाना हो जाएगा।

देश में गैस संकट के बीच बड़ी राहत

यह खेप ऐसे समय में आई है जब होर्मुज संकट के कारण भारत में कमर्शियल गैस की भारी कमी देखी जा रही है। गैस की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने शनिवार को राज्यों के लिए कमर्शियल एलपीजी का आवंटन 20% और बढ़ा दिया है। अब प्राथमिकता वाले क्षेत्रों के लिए कुल आवंटन बढ़कर 50% हो गया है। बेंगलुरु सहित कर्नाटक के अन्य हिस्सों में होटल और रेस्टोरेंट गैस की कमी से बंद हो रहे थे, ऐसे में मंगलुरु पोर्ट पर उतरी यह खेप स्थानीय बाजार को बड़ी राहत देगी।

रूस से भी आया कच्चा तेल

मंगलुरु पोर्ट पर केवल गैस ही नहीं, बल्कि कच्चे तेल की सप्लाई भी पहुंच रही है। पिक्सिस पायनियर से पहले रूस का एक विशाल जहाज 'एक्वा टाइटन' भी कच्चा तेल लेकर बीते दिन मंगलुरु पहुंचा था। यह जहाज इतना बड़ा है कि इसे मेन पोर्ट पर डॉक नहीं किया जा सका। इसे पोर्ट से करीब 18 समुद्री मील दूर समुद्र में ही खड़ा किया गया है, जहां से तेल को छोटी पाइपलाइनों और जहाजों के जरिए लाया जा रहा है।

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