Census 2027 Caste Count: जनगणना में जाति की गिनती पर बड़ा पेच! सरकार के सामने 2 विकल्प पर इसमें भी टेंशन
Census 2027 Caste Count: भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) इस बात पर विचार कर रहे हैं कि आने वाली जनगणना में जातिगत गणना के लिए किस तरह का ढांचा तैयार किया जाए। इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए सरकारी अधिकारी मुख्य रूप से दो संभावित विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। लेकिन इन दोनों विकल्पों से जुड़े अलग-अलग जोखिम, चुनौतियां और आपत्तियां भी सामने आई हैं
जनगणना के दौरान जाति की गिनती करने को लेकर एक पेचीदा स्थिति खड़ी नजर आ रही है
Census 2027 update: देशव्यापी जनगणना के जनसंख्या गणना चरण में अब सिर्फ छह महीने का समय बचा है। इस बीच भारत के रजिस्ट्रार जनरल (RGI) इस बात पर विचार कर रहे हैं कि आने वाली जनगणना में जातिगत गणना के लिए किस तरह का ढांचा तैयार किया जाए। 'इंडियन एक्सप्रेस' की रिपोर्ट के मुताबिक इस पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने के लिए सरकारी अधिकारी मुख्य रूप से दो संभावित विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
लेकिन इन दोनों विकल्पों से जुड़े अलग-अलग जोखिम, चुनौतियां और आपत्तियां भी सामने आई हैं। कुल मिलाकर सरकार के सामने जनगणना के दौरान जाति की गिनती करने को लेकर एक पेचीदा स्थिति खड़ी नजर आ रही है।
आइए समझते हैं कि जाति की गिनती करने के कौन से दो ऑप्शन सरकार के पास हैं और इसे लेकर क्या चिंताएं हैं:-
क्या हैं सरकार के सामने दो मुख्य विकल्प?
रिपोर्ट के मुताबिक जनगणना में जाति की गणना दो तरीकों से करने के विकल्पों पर विचार हो रहा है। पहला है ओपन एंडेड फॉर्मेट यानी इस विकल्प में उस शख्स को अपनी जाति खुद लिखने की पूरी छूट होगी, जिससे जाति से जुड़ा सवाल किया जाएगा।
इस फॉर्मेट के साथ सबसे बड़ा खतरा है कि कहीं साल 2011 की सामाजिक-आर्थिक और जाति जनगणना (SECC) जैसे ही नतीजे न सामने आ जाएं। असल में 2011 में जब लोगों को अपनी जाति खुद दर्ज कराने की छूट दी गई थी तो अलग-अलग स्पेलिंग, स्थानीय उच्चारण और उप-जातियों के नाम दर्ज होने की वजह से 46 लाख से अधिक अलग-अलग जातियों के नाम दर्ज हो गए थे।
इससे पहले 1931 की जनगणना में (जब आखिरी बार जाति की गिनती हुई थी) कुल 4147 मान्यता प्राप्त जातियां थीं। 2011 के इस तरह के बिखरे हुए डेटा की वजह से सटीक और प्रैक्टिकल जातिवार डेटा तैयार करना काफी कठिन हो गया था। सरकार के सामने दूसरा विकल्प है ड्रॉप-डाउन मेनू फॉर्मेट।
इस वैकल्पिक प्रस्ताव के तहत सरकार एक पहले से फिक्स और स्ट्रक्चर्ड ड्रॉप-डाउन मेनू तैयार कर सकती है। इसमें पहले से मान्यता प्राप्त जातियों की सूची होगी और जिससे जाति का सवाल पूछा जा रहा होगा वो उसमें से अपनी जाति चुन सकेंगे।
इस विचार को अगर अमलीजामा पहनाया जाता है तो केंद्र सरकार की जाति सूची को राज्यों द्वारा रखी जाने वाली सूचियों के साथ विलय करने की योजना है क्योंकि कई राज्यों में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अन्य समुदायों की अलग-अलग सूचियां हैं। यू सूचियां केंद्रीय सूची से भिन्न हैं।
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक इस ड्रॉप-डाउन मेनू वाले प्रस्ताव को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और संघ परिवार से जुड़े संगठनों की आपत्तियों का सामना करना पड़ रहा है। आरएसएस का मानना है कि मान्यता प्राप्त जातियों की एक निश्चित सूची का ड्रॉप-डाउन मेनू बनाना ब्रिटिश शासन के दौरान संस्थागत बनाए गए जातिगत ढांचे को और अधिक मजबूत करेगा।
'जाति एक संवेदनशील विषय, गलती के गंभीर राजनीतिक परिणाम'
इस पूरी कवायद की संवेदनशीलता पर जोर डालते हुए एक वरिष्ठ सरकारी सूत्र ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि, 'यह एक काफी कठिन प्रैक्टिस है। विभिन्न सुझाव और आपत्तियां सामने आ रही हैं। सभी पर गहराई से विचार किया जा रहा है। ओपन-एंडेड गणना सहित कई तरीकों का परीक्षण चल रहा है ताकि 2011 जैसे परिणामों से बचा जा सके। जाति एक बेहद संवेदनशील विषय है और डेटा जुटाने में हुई किसी भी तरह की त्रुटि के गंभीर राजनीतिक परिणाम हो सकते हैं।'
अभी कैसे दर्ज होती है जाति की जानकारी?
अभी भारतीय जनगणना में सिर्फ अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के सदस्यों की जाति से जुड़ी डिटेल डाली जाती है। जनगणना के डिजिटल एप्लिकेशन में सिर्फ अधिसूचित SC और ST समुदायों के लिए ही ड्रॉप-डाउन मेनू उपलब्ध रहता है। बाकी सभी उत्तरदाताओं को अन्य की श्रेणी में रखा जाता है।
जनगणना 2027 का पहला चरण: 29 राज्यों/UTs में काम पूरा
आपको बता दें कि जातिगत गणना के फ्रेमवर्क पर मंथन के बीच जनगणना 2027 की प्रशासनिक प्रक्रिया तेजी से आगे बढ़ रही है। गृह मंत्रालय द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक जनगणना 2027 का पहला चरण देश के 29 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सफलतापूर्वक पूरा हो चुका है।
हाउसलिस्टिंग और हाउसिंग सेंसस के तहत ऑनलाइन सेल्फ-न्यूमरेशन की सुविधा शुक्रवार को तमिलनाडु और त्रिपुरा में शुरू हो गई है। इन दोनों राज्यों में ऑनलाइन सेल्फ-न्यूमरेशन की सुविधा 31 जुलाई तक उपलब्ध रहेगी। इसके बाद 1 अगस्त से 30 अगस्त तक कर्मचारियों द्वारा घर-घर जाकर मकान सूचीकरण और मकान गणना का काम पूरा कराया जाएगा।