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गंगा के इस हिस्से में अब नहीं बनेगा कोई नया बिजली बांध! समझिए सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने क्यों दिया ऐसा ऐफिडिवेट

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पर्यावरण, जल शक्ति और बिजली मंत्रालयों की ओर से मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में यह हलफनामा दाखिल किया। इसमें सरकार ने एक्सपर्ट बॉडी-II (EB-II) की उन सिफारिशों को पूरी तरह नामंजूर कर दिया जिसने 28 जलविद्युत परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। इससे पहले कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक समिति ने इस सूची को घटाकर 5 प्रोजेक्ट्स तक कर दिया था, लेकिन अब केंद्र सरकार ने उन 5 प्रोजेक्ट्स को भी खारिज कर दिया है

Moneycontrol Hindi Newsअपडेटेड May 21, 2026 पर 10:58 PM
गंगा के इस हिस्से में अब नहीं बनेगा कोई नया बिजली बांध! समझिए सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने क्यों दिया ऐसा ऐफिडिवेट
हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है।

गंगा नदी की अविरल और निर्मल धारा को अक्षुण्ण बनाए रखने और हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी की सुरक्षा को लेकर एक बड़ी खबर सामने आई है। असल में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में एक बेहद अहम ऐफिडेविट दाखिल किया है। सरकार ने शीर्ष अदालत को बताया है कि उत्तराखंड में गंगा नदी के ऊपरी हिस्से यानी अलकनंदा-भगीरथी बेसिन में अब किसी भी नए हाइड्रोइलेक्ट्रिक (जल विद्युत) प्रोजेक्ट को मंजूरी नहीं दी जाएगी। सरकार का यह फैसला इसलिए भी बड़ा है क्योंकि उसने अदालत द्वारा गठित एक विशेषज्ञ पैनल की उन सिफारिशों को सिरे से खारिज कर दिया है जिसमें 28 नए प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी दी गई थी। आइए इस मामले को पूरे विस्तार से समझते हैं-

सुप्रीम कोर्ट में सरकार ने क्यों दिया ऐसा ऐफिडिवेट?

केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने पर्यावरण, जल शक्ति और बिजली मंत्रालयों की ओर से मंगलवार को सुप्रीम कोर्ट में यह हलफनामा दाखिल किया। इसमें सरकार ने एक्सपर्ट बॉडी-II (EB-II) की उन सिफारिशों को पूरी तरह नामंजूर कर दिया जिसने 28 जलविद्युत परियोजनाओं को मंजूरी दी थी। इससे पहले कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाली एक समिति ने इस सूची को घटाकर 5 प्रोजेक्ट्स तक कर दिया था, लेकिन अब केंद्र सरकार ने उन 5 प्रोजेक्ट्स को भी खारिज कर दिया है।

इस कड़े कदम के पीछे ऊपरी गंगा बेसिन की अत्यधिक भौगोलिक और पर्यावरणीय संवेदनशीलता है। अलकनंदा-भगीरथी बेसिन पूरी तरह से भूकंपीय क्षेत्र (सिसमिक) IV और V में स्थित है। ये सिसमिक जोन भूकंप के लिहाज से बेहद खतरनाक माने जाते हैं। यह क्षेत्र गंगा नदी का मुख्य जलस्रोत है। गंगा नदी भारत की लगभग आधी आबादी का भरण-पोषण करती है। यह पूरा इलाका भूस्खलन, ग्लेशियर फटने से आने वाली बाढ़, हिमस्खलन, सुरंग ढहने और दूसरे खतरों के प्रति बेहद संवेदनशील है। इसके अलावा यह क्षेत्र लुप्तप्राय और अनुसूची-I की प्रजातियों का निवास स्थान है और गहरी सांस्कृतिक व आध्यात्मिक महत्ता रखता है। इस नाजुक इलाके में बार-बार आने वाली प्राकृतिक आपदाओं ने यह साफ कर दिया है कि इतने संवेदनशील भूगोल में बड़े पैमाने पर इंसानी हस्तक्षेप करना कितना आत्मघाती हो सकता है।

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