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भारत में पैसा लगा सकता है चीन, अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट, सरकार भी पॉलिसी में बदलाव पर कर रही मंथन!

दरअसल केंद्र सरकार के भीतर यह सोच मजबूत हो गई है कि जो निवेश रोजगार पैदा करता है और देश में प्रोडक्शन क्षमता बढ़ाता है, उसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए। हालांकि टेलीकॉम, रक्षा और रणनीतिक ढांचे जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अभी भी सख्ती बनी रहेगी। आसान शब्दों में कहें, तो सुरक्षा भी और निवेश भी, इसी मूल मंत्र के साथ इस विचार पर आगे बढ़ा जा सकता है

Translated By: Shubham Sharmaअपडेटेड Jan 20, 2026 पर 3:35 PM
भारत में पैसा लगा सकता है चीन, अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट, सरकार भी पॉलिसी में बदलाव पर कर रही मंथन!
भारत में पैसा लगा सकता है चीन, अर्थव्यवस्था को मिलेगा बूस्ट, सरकार भी पॉलिसी में बदलाव पर कर रही मंथन!

भारत सरकार 2020 के बाद चीन को लेकर लागू किए गए विदेशी निवेश और सरकारी खरीद के सख्त नियमों पर दोबारा विचार कर रही है। सरकार का फोकस अब निवेशक किस देश का है, इससे ज्यादा इस बात पर है कि निवेश से देश की अर्थव्यवस्था, रोजगार और घरेलू प्रोडक्शन क्षमता को कितना फायदा होता है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, सिस्टम के भीतर इस बात पर सहमति बन रही है कि जो निवेश रोजगार पैदा करता है और तकनीक लाता है, उसे बढ़ावा दिया जाना चाहिए। हालांकि, टेलीकॉम, डिफेंस और रणनीतिक ढांचे जैसे संवेदनशील सेक्टर में सख्ती बरकरार रहेगी।

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने Moneycontrol से कहा, “नीतियों को भारत के विकास लक्ष्यों के अनुरूप होना चाहिए। जो निवेश रोजगार और तकनीक लाता है, उसे निवेशक की पहचान से अलग देखकर परखा जाना चाहिए।”

प्रेस नोट 3 में बदलाव की संभावना

अप्रैल 2020 में लागू किया गया प्रेस नोट 3, भारत से जमीनी सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले फॉरेन डायरेक्ट इन्वेस्टमेंट (FDI) के लिए पहले से सरकारी मंजूरी अनिवार्य करता है। यह नियम उस समय भू-राजनीतिक तनाव और भारतीय कंपनियों के सस्ते अधिग्रहण को रोकने के लिए लाया गया था।

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