Coal allocation case: कोयला घोटाला मामले में पूर्व PM मनमोहन सिंह को मिली क्लीन चिट, सुप्रीम कोर्ट ने बंद किया केस

Coal allocation case: सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार 29 जुलाई को तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही औपचारिक रूप से बंद कर दी। शीर्ष अदालत ने उनके पक्ष में सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया

अपडेटेड Jul 29, 2026 पर 2:00 PM
Coal allocation case: सुप्रीम कोर्ट ने कोयला मामले में पूर्व PM मनमोहन सिंह के खिलाफ केस बंद कर दिया है

Coal allocation case: सुप्रीम कोर्ट ने कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के खिलाफ जारी आपराधिक मामला बुधवार (29 जुलाई) को बंद कर दिया। साथ ही उन्हें आरोपी के रूप में तलब करने वाले आदेश रद्द कर दिए। चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची तथा जस्टिस वी. मोहना की पीठ ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की उस क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार कर लिया, जिसमें पूर्व प्रधानमंत्री सिंह और अन्य को क्लीन चिट दी गई थी।

शीर्ष अदालत ने कहा कि ट्रायल कोर्ट के जज के पास सीबीआई की 'क्लोजर रिपोर्ट' को खारिज कर संज्ञान लेने का कोई कारण नहीं था। पीठ ने कहा, "अपीलकर्ता के दुर्भाग्यपूर्ण निधन के कारण यह अपील निष्फल मानकर समाप्त की जा सकती थी। लेकिन विशेष जज द्वारा संज्ञान लेने और अपीलकर्ता को तलब करने के पहलू पर विचार करने के लिए हमने सीबीआई द्वारा दाखिल दोनों क्लोजर रिपोर्टों का अध्ययन किया।"

अदालत ने आगे कहा, "जांच एजेंसी की रिपोर्ट स्वीकार करने के संबंध में इस अदालत द्वारा लगातार तय किए गए मानकों को ध्यान में रखते हुए हम संतुष्ट हैं कि विशेष जज के पास सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट को अस्वीकार कर संज्ञान लेने का कोई कारण नहीं था। हम अपील स्वीकार करते हैं और विवादित आदेश को रद्द करते हैं। परिणामस्वरूप, हम सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए मामले को बंद करते हैं।"


क्या है पूरा मामला?

वर्ष 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन से संबंधित कथित कोयला घोटाले में एक विशेष अदालत ने पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी. सी. पारेख और तीन अन्य लोगों को आरोपी के रूप में तलब किया था। हालांकि, अदालत ने इस आदेश में हस्तक्षेप करते हुए इस पर रोक लगा दी थी। सुप्रीम कोर्ट ने 1 अप्रैल 2015 को सिंह के खिलाफ कार्यवाही पर रोक लगा दी थी।

सिंह ने समन को चुनौती देते हुए कहा था कि आवंटन से जुड़े उनके फैसले में कोई आपराधिकता नहीं थी। उनके वकील ने सरकारी कर्मचारी पर मुकदमा चलाने के लिए ज़रूरी मंजूरी न होने का सवाल भी उठाया था। इससे पहले की कार्यवाही के दौरान सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने कोयला ब्लॉक आवंटित करने के मनमोहन सिंह के फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि यह कार्रवाई प्रशासनिक प्रकृति की थी।

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कार्यवाही में मनमोहन सिंह का पक्ष रखते हुए सिब्बल ने बेंच से कहा कि ट्रायल कोर्ट द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ की गई प्रतिकूल टिप्पणियों को रिकॉर्ड पर नहीं रहने दिया जाना चाहिए। उन्होंने तर्क दिया कि भले ही सिंह की मृत्यु से तकनीकी रूप से अपील समाप्त हो सकती है। फिर भी कोर्ट को उनके खिलाफ की गई टिप्पणियों पर विचार करना चाहिए।

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