अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 21 जनवरी को स्विट्जरलैंड के दावोस में चल रहे विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) की बैठक के दौरान दुनिया की कई बड़ी कंपनियों के सीईओ से मुलाकात करेंगे। वह इस दौरान अमेरिका की पॉलिसी और प्राथमिकताओं के बारे में चर्चा करेंगे। दावोस में दुनिया के कई देशों के राष्ट्राध्यक्ष और बिजनेस लीडर्स मौजूद हैं।
ट्रंप के इस रिसेप्शन में भारतीय कंपनियों के सीईओ का भी एक प्रतिनिधिमंडल होगा। इससे ग्लोबल कॉर्पोरेट स्तर पर होने वाली बातचीत में भारत के बढ़ते महत्व का पता चलता है। इस आयोजन में टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन, भारती एंटरप्राइजेज के चेयरमैन सुनील भारती मित्तल, विप्रो के सीईओ श्रीनी पालिया, इंफोसिस के सीईओ सलिल एस पारेख, महिंद्रा ग्रुप के ग्रुप चीफ एग्जिक्यूटिव अनीश शाह, बजाज फिनसर्व के चेयरमैन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर संजीव बजाज, जुबिलेंट भरतिया ग्रुप के फाउंडर हरि एस भरतिया शामिल होंगे।
इस बार इंडिया का सबसे बड़ा प्रतिनिधिमंडल दावोस में मौजूद है। इसमें कई केंद्रीय मंत्री, राज्यों के प्रतिनिधि और अधिकारी शामिल हैं। असम, उत्तर प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, झारखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और केरल के प्रतिनिधि दावोस पहुंच चुके हैं। इस बार तमिलनाडु का प्रतिनिधिमंडल राज्य में विधानसभा चुनावों की वजह से दावोस नहीं गया है।
राज्यों के प्रतिनिधि दावोस में मौजूद दुनिया की बड़ी कंपनियों के सीईओ को अपने यहां निवेश के मौकों के बारे में बताएंगे। सरकार का फोकस बदलती वैश्विक व्यवस्था में अपने लिए सही जगह तलाशने पर भी होगाो। अमेरिका ने भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगा रखा है। भारत ने एक्सपोर्ट पर इसके असर को देखते हुए दुनिया के दूसरे बाजारों पर फोकस बढ़ा रहा है। दावोस का मंच इंडिया के लिए इसमें मददगार हो सकता है।