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घूमने का मजा होगा दोगुना! दिल्ली की संजय झील और सस्पेंशन ब्रिज का ऐसे बदलेगा लुक

DDA पूर्वी दिल्ली के मयूर विहार संजय लेक के सस्पेंशन ब्रिज को नया रूप देने की तैयारी कर रहा है। इसके लिए पहले ब्रिज की मजबूती और हालत की जांच की जाएगी। जांच के बाद जरूरत के हिसाब से इसकी मरम्मत और सुधार का काम किया जाएगा।

Roopali Sharmaअपडेटेड Sep 23, 2026 पर 10:09 AM
घूमने का मजा होगा दोगुना! दिल्ली की संजय झील और सस्पेंशन ब्रिज का ऐसे बदलेगा लुक
मयूर विहार की संजय झील में बना सस्पेंशन ब्रिज अब नए रूप में नजर आ सकता है।

पूर्वी दिल्ली की संजय झील लंबे समय से लोगों के लिए घूमने-फिरने की खास जगह रही है। अब इसे और बेहतर बनाने की दिशा में काम आगे बढ़ाया जा रहा है। इसी योजना के तहत झील पर बने सस्पेंशन ब्रिज को भी बेहतर करने की तैयारी है। इसके लिए पहले यह समझा जाएगा कि पुल की कंडीशन कैसी है और आगे इसे किस तरह सुरक्षित और उपयोगी बनाया जा सकता है।

पुल की जांच में क्या देखा जाएगा?

DDA को पुल की पूरी जांच के लिए करीब तीन महीने का समय लग सकता है। शुरुआत साइट सर्वे और मौके पर पुल के निरीक्षण से होगी। इसमें पुल के अलग-अलग हिस्सों की पहचान, उनकी माप और कंडीशन को देखा जाएगा। पुराने नक्शे, फोटो, वीडियो और पहले की रिपोर्ट भी जांची जाएंगी, ताकि पुल में हुए बदलाव और मौजूदा कमियों का बेहतर अंदाजा लगाया जा सके।

मजबूती की होगी टेस्टिंग

पुल के अलग-अलग स्ट्रक्चरल हिस्सों की मजबूती जांचने के लिए कई तरह के टेस्ट किए जाएंगे। इनमें स्टील के हिस्सों की मोटाई देखना, धातु की हार्डनेस टेस्टिंग और जरूरत पड़ने पर लिक्विड पेनिट्रेंट टेस्टिंग करना शामिल है। साथ ही जमीन और मिट्टी से जुड़ी कंडीशन को समझने के लिए जियोटेक्निकल जांच भी की जाएगी। सारी जांच पूरी होने के बाद पुल का स्ट्रक्चरल एनालिसिस किया जाएगा। इससे पता चलेगा कि पुल अभी कितना भार सह सकता है और किन हिस्सों में सुधार की जरूरत है। इससे यह पता चलेगा कि कहां मरम्मत करनी है, कहां मजबूती बढ़ानी है और किन हिस्सों को बदलना जरूरी हो सकता है।

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