Delhi AQI: दमघोंटू बनी हुई है दिल्ली की हवा, 400 पार हुआ AQI, फिर भी GRAP 3 लागू क्यों नहीं कर रही सरकार? जानिए

Delhi AQI Today: IITM के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम ने अनुमान लगाया है कि रविवार को PM2.5 के स्तर में पराली जलाने का योगदान 31% से अधिक होगा, जो प्रदूषण के स्रोतों में सबसे अधिक है। वाहनों से होने वाला उत्सर्जन प्रदूषण भार में लगभग 14.25% का दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहने की उम्मीद है

अपडेटेड Nov 09, 2025 पर 7:37 AM
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24 घंटे के औसत AQI 361 के साथ दिल्ली शनिवार को देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया

Delhi AQI Today: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली रविवार की सुबह एक बार फिर घने धुंध और खतरनाक प्रदूषण के साथ हुई। कई निगरानी स्टेशनों पर हवा की गुणवत्ता 'गंभीर' श्रेणी में पहुंच गई है, जबकि शहर का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 361 ('बहुत खराब') दर्ज किया गया। वजीरपुर (424), बवाना (424) और विवेक विहार (415) जैसे स्टेशनों पर AQI 400 के पार चला गया। दिल्ली शनिवार को देश का दूसरा सबसे प्रदूषित शहर बन गया। NCR क्षेत्र भी अछूते नहीं हैं नोएडा (354), ग्रेटर नोएडा (336) और गाजियाबाद (339) में भी हवा का स्तर खतरनाक बना हुआ है।

क्या है प्रदूषण का मुख्य कारण?


IITM के डिसीजन सपोर्ट सिस्टम (DSS) ने अनुमान लगाया है कि रविवार को PM2.5 के स्तर में पराली जलाने का योगदान 31% से अधिक होगा, जो प्रदूषण के स्रोतों में सबसे अधिक है। वाहनों से होने वाला उत्सर्जन प्रदूषण भार में लगभग 14.25% का दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता रहने की उम्मीद है। इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ ट्रॉपिकल मीटिरोलॉजी (IITM) की रिपोर्ट के अनुसार, दिल्ली में 9 से 11 नवंबर तक हवा 'बहुत खराब' श्रेणी में रहने की संभावना है।

पराली जलाने वाले राज्यों का क्या है हाल

एयर क्वालिटी मैनेजमेंट कमीशन (CAQM) पंजाब और हरियाणा सरकारों के साथ पराली जलाने पर लगाम लगाने के लिए लगातार समीक्षा बैठकें कर रहा है। जहां पंजाब में पिछले साल की तुलना में इस साल (15 सितंबर से 6 नवंबर तक) कम खेत में आग लगने की घटनाएं (5,041 की तुलना में 3,284) दर्ज हुई हैं, वहीं कुछ जिलों जैसे मुक्तसर और फाजिल्का में वृद्धि हुई है। दूसरी ओर हरियाणा में घटनाओं में भारी गिरावट आई है, जो पिछले साल 888 की तुलना में इस साल सिर्फ 206 रही।

GRAP स्टेज 3 लागू क्यों नहीं?

AQI में भारी वृद्धि के बावजूद ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (GRAP) का स्टेज 3 (जिसमें निर्माण कार्यों, डीजल ट्रकों के प्रवेश और अन्य आपातकालीन उपायों पर प्रतिबंध शामिल है) अभी तक लागू नहीं किया गया है। दिल्ली प्रदूषण नियंत्रण समिति (DPCC) के अधिकारियों का कहना है कि इसका कारण यह है कि इस नवंबर में शहर की समग्र हवा की गुणवत्ता पिछले साल की तुलना में बेहतर रही है। एक अधिकारी ने बताया, 'पिछले सात दिनों में से छह में पिछले साल के इसी दिन की तुलना में बेहतर हवा की गुणवत्ता दर्ज की गई है। यह विभागों के बीच समय पर और समन्वित कार्रवाई के कारण संभव हुआ है।'

अधिकारियों ने सख्त उपायों में देरी का श्रेय धूल नियंत्रण, सड़क की सफाई, एंटी-स्मॉग ऑपरेशन और वाहनों तथा उद्योगों की सख्त जांच को दिया है। एक DPCC अधिकारी ने कहा, 'पिछले साल GRAP स्टेज 3 13 नवंबर को लागू किया गया था। इस बार, सभी विभागों और निवासियों के समर्थन से, हम उस चरण तक पहुंचने से बचने की उम्मीद करते हैं।'

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