Delhi Blast Case Update: दिल्ली विस्फोट मामले में 8वां आरोपी डॉ. बिलाल नसीर गिरफ्तार, पीड़ित परिवार अभी भी दुख से उबरने के लिए कर रहे संघर्ष

Delhi Blast Case Update: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के प्रवक्ता ने मंगलवार (9 दिसंबर) को बताया कि दिल्ली विस्फोट मामले का मुख्य आरोपी डॉ. बिलाल नसीर मल्ला जम्मू-कश्मीर के बारामूला का निवासी है। उसे राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली से गिरफ्तार किया गया है। 10 नवंबर को लाल किला के पास हुए आतंकवादी हमले के पीछे की साजिश में बिलाल शामिल था

अपडेटेड Dec 09, 2025 पर 9:27 PM
Story continues below Advertisement
दिल्ली बम धमाकों की जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे ही आंतकियों के प्लान सामने आ रहा है।

Delhi Blast Case Update: नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) ने पिछले महीने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में लाल किले के पास एक कार में हुए विस्फोट के सिलसिले में आठवीं गिरफ्तारी की है। NIA के प्रवक्ता ने मंगलवार (9 दिसंबर) को बताया कि मुख्य आरोपी डॉ. बिलाल नसीर मल्ला जम्मू-कश्मीर के बारामूला का निवासी है। उसे राष्ट्रीय राजधानी से गिरफ्तार किया गया। केंद्रीय जांच एजेंसी ने एक बयान में कहा कि उसने जांच के दौरान 10 नवंबर को लाल किला क्षेत्र में हुए आतंकवादी हमले के पीछे की साजिश में बिलाल की संलिप्तता पाई है। इस आतंकी हमले में 15 लोग मारे गए थे और कई अन्य घायल हो गए थे।

NIA की जांच के अनुसार, "नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी की जांच के अनुसार, बिलाल ने जानबूझकर मृत आरोपी उमर उन नबी को आश्रय दिया और उसे लॉजिस्टिक सहायता प्रदान की। उस पर आतंकवादी हमले से संबंधित सबूत नष्ट करने का भी आरोप है।" NIA इस घातक विस्फोट के पीछे की साजिश की जांच कर रहा है। एंटी टेरर एजेंसी साजिश के सभी पहलुओं को उजागर करने के लिए विभिन्न केंद्रीय और राज्य एजेंसियों के साथ मिलकर काम कर रही है।

विस्फोट के एक महीने बाद भी पीड़ित परिवार दुख से उबरने के लिए कर रहे संघर्ष

लालकिले के पास हुए बम विस्फोट के बाद पीड़ितों के घरों में दुख वैसे ही जमकर बैठा है, जैसे कोई धूल जो हटने का नाम ही नहीं लेती है। लालकिला विस्फोट के एक महीने बाद भी पीड़ित परिवार दुख से उबरने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। दिल्ली में 10 नवंबर को लालकिले के पास शाम 6.52 बजे एक हुंडई i20 कार में बड़ा विस्फोट हुआ, जिसमें 15 लोगों की मौत हो गई।

मारे गए लोगों में चांदनी चौक के भागीरथ पैलेस में काम करने वाले दवा व्यवसायी अमर कटारिया भी शामिल थे। उस शाम, कटारिया जब काम खत्म करने के बाद बाहर निकले तो उन्हें इस बात का अहसास नहीं था कि कुछ ही मिनटों में उनकी दुनिया बिखर जाएगी। त्रासदी के बाद के शुरुआती दिनों में उनका तीन साल का बेटा हर छोटी सी आवाज पर दरवाजे की ओर दौड़ता रहता था। अमर के रिश्तेदार स्वदेश सेठी ने कहा कि बच्चे को लगता था कि उसके पिता आ रहे हैं।


उन्होंने कहा कि एक महीने बाद भी बच्चे की उलझन कम नहीं हुई है, बल्कि उसका स्वरूप बदल गया है। हालांकि, अब वह दरवाजे पर इंतजार नहीं करता। फिर भी उसे नहीं पता कि उसके पिता कभी वापस नहीं आएंगे। उसे लगता है कि वह कहीं बाहर हैं और जल्द ही लौट आएंगे। सेठी ने पीटीआई से कहा, "वह अब भी सोचता है कि अमर कहीं बाहर है।"

कटारिया निवास में अमर की पत्नी कृति ने उस दुर्भाग्यपूर्ण रात के बाद से मुश्किल से ही बात की है। सेठी ने कहा कि वह इतनी गहरी खामोशी में डूबी हुई है कि विस्फोट के बाद से वह घर से बाहर नहीं निकल पाई है। उन्होंने बताया कि कृति अब घंटों एक ही स्थान पर बैठी रहती है और उसकी नजरें कहीं दूर टिकी रहती हैं।

सेठी ने कहा, "वह बहुत काबिल है, लेकिन उसमें कमरे से बाहर निकलने की भी ताकत नहीं है।" उन्होंने सरकार से कृति को नौकरी दिलाने में मदद करने का भी अनुरोध किया और कहा कि इससे उसका ध्यान इस दुख से हटेगा तथा परिवार को आर्थिक स्थिरता भी मिलेगी। सेठी ने कहा, "उसका एक बच्चा है जो अपने पिता को कभी नहीं देख पाएगा।"

वहीं, एक अन्य पीड़ित परिवार भी एक महीने से इसी दुख में फंसा हुआ है। 23 वर्षीय नोमान उत्तर प्रदेश के झिंझाना से अपनी दुकान के लिए सामान खरीदने दिल्ली आया था। लेकिन वह कभी घर वापस नहीं लौटा। उसका दोस्त घायल हो गया था और अब भी अस्पताल में उसका इलाज किया जा रहा है।

राजधानी में रहने वाले उसके रिश्तेदार सोनू ने कहा, "नोमान उसी दिन अपनी दुकान के लिए सामान खरीदने दिल्ली आया था।" नोमान का बड़ा भाई साहिल अब भी नहीं जानता कि उसका छोटा भाई मर चुका है। सोनू ने कहा कि साहिल को लगता ​​है कि नोमान घायल है और दूसरे वार्ड में उसका इलाज किया जा रहा है।

ये भी पढ़ें- Microsoft भारत में करेगी ₹1.5 लाख करोड़ का निवेश, PM मोदी से मुलाकात के बाद CEO सत्या नडेला ने की घोषणा

शाहदरा के रोहतास नगर में 10 नवंबर की शाम अपने पड़ोसी और दोस्त राहुल कौशिक के साथ गौरी शंकर मंदिर दर्शन करने गए अंकुश शर्मा एक अलग ही लड़ाई लड़ रहे हैं। दोनों विस्फोट में फंस गए थे। विस्फोट में झुलसे राहुल को इलाज के बाद घर भेज दिया गया। जबकि अंकुश का संघर्ष बहुत कठिन है। उसकी एक आंख की रोशनी चली गई और एक कान से सुनने की शक्ति भी चली गई।

अंकुश को एलएनजेपी अस्पताल में कई दिन बिताने के बाद छुट्टी दे दी गई। लेकिन जब उसकी स्थिति बिगड़ गई तो उसे दोबारा एम्स में भर्ती कराया गया। विस्फोट के बाद 30 रातें बीत चुकी हैं। लेकिन इन परिवारों के लिए यह महीना बिना सुबह वाली एक लंबी रात जैसा रहा है।

हिंदी में शेयर बाजार स्टॉक मार्केट न्यूज़,  बिजनेस न्यूज़,  पर्सनल फाइनेंस और अन्य देश से जुड़ी खबरें सबसे पहले मनीकंट्रोल हिंदी पर पढ़ें. डेली मार्केट अपडेट के लिए Moneycontrol App  डाउनलोड करें।