National Herald Case: दिल्ली की एक अदालत ने मंगलवार को नेशनल हेराल्ड मामले में सोनिया गांधी, राहुल गांधी और अन्य पांच लोगों के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ED) द्वारा दायर मनी लॉन्ड्रिंग केस को संज्ञान में लेने से इनकार कर दिया। अदालत ने यह भी फैसला सुनाया कि राहुल गांधी, सोनिया गांधी और इस मामले में अन्य आरोपी दिल्ली पुलिस द्वारा उनके खिलाफ दर्ज की गई FIR की कॉपी प्राप्त करने के हकदार नहीं है।
बता दें कि यह फैसला राउज एवेन्यू कोर्ट के विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने सुनाया है। हालांकि, न्यायाधीश ने यह भी कहा कि आरोपियों को सूचित किया जा सकता है कि FIR दर्ज कर ली गई है।
गौरतलब है कि 3 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने गांधी परिवार, सैम पित्रोदा, सुमन दुबे, यंग इंडियन और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, बेईमानी से धन का गबन, आपराधिक विश्वासघात और आपराधिक साजिश के आरोप में FIR दर्ज की थी।
आरोप है कि उन्होंने नेशनल हेराल्ड अखबार प्रकाशित करने वाली एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (AJL) की लगभग 2,000 करोड़ रुपये की संपत्तियों पर कब्जा किया है।
यह FIR प्रवर्तन निदेशालय द्वारा PMLA की धारा 66(2) के तहत दी गई जानकारी के आधार पर दर्ज की गई है। वहीं, भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी द्वारा दायर शिकायत का संज्ञान लेते हुए अदालत के आदेश के आधार पर ईडी कथित मनी लॉन्ड्रिंग की जांच जारी रखे हुए है।
जांच एजेंसी ने आगे आरोप लगाया कि गांधी परिवार के पास यंग इंडियन के 76 प्रतिशत शेयर थे, जिसने 90 करोड़ रुपये के ऋण के बदले एजेएल की संपत्तियों पर "धोखाधड़ी" से कब्जा कर लिया था।
विशेष न्यायाधीश ने सुनाया फैसला
विशेष न्यायाधीश विशाल गोगने ने कहा कि इस मामले में दायर चार्जशीद एक निजी व्यक्ति की शिकायत पर आधारित जांच पर आधारित है, न कि किसी मूल अपराध की FIR पर। न्यायाधीश ने कहा कि कानून के अनुसार इसका संज्ञान लेना अनुचित है।
आदेश का मुख्य भाग पढ़ते हुए न्यायाधीश ने कहा कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा इस मामले में पहले ही FIR दर्ज कर चुकी है, इसलिए मामले में सुधार विभाग के तर्कों पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय देना समय से पहले होगा।