'महात्मा की विरासत का अपमान न करें...', जानें मनरेगा का नाम बदलने पर क्या बोले शशि थरूर?

MGNREGA : सरकार के इस फैसले पर जहां विपक्षी दल कांग्रेस इसकी कड़ी आलोचना कर रहा है तो वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर का पहला रिएक्शन सामने आया है। उन्होंने इस विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। सरकार के प्रस्तावित नए ग्राम स्वराज की अवधारणा और राम राज्य का आदर्श कभी भी एक-दूसरे के विरोधी नहीं थे

अपडेटेड Dec 15, 2025 पर 11:08 PM
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मनरेगा विवाद पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर का पहला रिएक्शन सामने आया है।

केंद्र सरकार, महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को निरस्त करने और एक नया कानून बनाने की तैयारी में है। सरकार के इस फैसले पर जहां विपक्षी दल कांग्रेस इसकी कड़ी आलोचना कर रहा है तो वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शशि थरूर का पहला रिएक्शन सामने आया है। उन्होंने इस विवाद को दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। सरकार के प्रस्तावित नए ग्राम स्वराज की अवधारणा और राम राज्य का आदर्श कभी भी एक-दूसरे के विरोधी नहीं थे। वहीं कांग्रेस के कुछ सूत्रों ने इस पर नाराजगी जताते हुए कहा कि थरूर को अपना पक्ष साफ तौर पर रखना चाहिए।

शशि थरूर ने कही ये बात

शशि थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि सरकार के प्रस्तावित नए G-RAM-G बिल में MGNREGA का नाम बदलने को लेकर जो विवाद हुआ है, वह सही नहीं है। उन्होंने कहा कि ग्राम स्वराज की सोच और राम राज्य का आदर्श कभी एक-दूसरे के खिलाफ नहीं रहे, बल्कि ये दोनों ही महात्मा गांधी की विचारधारा के अहम हिस्से थे। थरूर ने आगे लिखा कि ग्रामीण गरीबों के लिए बनी एक योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना इस गहरे संबंध को नजरअंदाज करता है। उन्होंने कहा कि गांधीजी की अंतिम सांस भी ‘राम’ के नाम के साथ थी, इसलिए उनकी विरासत का सम्मान किया जाना चाहिए और ऐसा विवाद खड़ा नहीं करना चाहिए, जो असल में कभी था ही नहीं।

कांग्रेस के अंदर नाराजगी 

कांग्रेस सूत्रों ने News18 से कहा, “हम इस पर कोई कार्रवाई नहीं करेंगे, लेकिन वह इस मुद्दे को जरूरत से ज्यादा बढ़ा रहे हैं। उन्हें अपना रुख साफ तौर पर बताना चाहिए।” जैसे-जैसे मामला आगे बढ़ा, सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर एक यूज़र ने शशि थरूर से सवाल किया कि वह साफ करेंक्या उनका विरोध योजना का नाम बदलने से है या फिर नाम बदलने को लेकर हुए विवाद से। इस पर थरूर ने अपनी बात और स्पष्ट करते हुए जवाब दिया। उन्होंने कहा कि वह महात्मा गांधी का नाम हटाने का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने लिखा कि उनका ट्वीट ध्यान से पढ़ा जाए, खासकर तीसरा वाक्य, जिसमें उनकी बात साफ तौर पर कही गई है।


बता दें कि, यूपीए अध्यक्ष रहते हुए सोनिया गांधी इस कानून की सबसे बड़ी राजनीतिक समर्थक थीं। उन्होंने 2004 के चुनावी घोषणापत्र में रोजगार गारंटी को यूपीए का एक अहम वादा बनाया था। सोनिया गांधी ने राष्ट्रीय सलाहकार परिषद (NAC) की अध्यक्षता भी की, जिसने इस बिल का मसौदा तैयार किया था। उन्होंने इस कानून के खिलाफ उठी आपत्तियों को लगातार खारिज किया, जिससे MGNREGA यूपीए सरकार की सबसे बड़ी योजनाओं में से एक बन गई। अब सरकार MGNREGA को खत्म करने और ग्रामीण रोज़गार के लिए एक नया कानून लाने की तैयारी कर रही है। इसके लिए विकसित भारत गारंटी फॉर रोज़गार एंड आजीविका मिशन (ग्रामीण) [VB-G RAM G] बिल, 2025 को लोकसभा में पेश किया जाना है। बिल की प्रति के अनुसार, इसका उद्देश्य संसद में नया कानून लाना और साल 2005 में लागू महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम (MGNREGA) को समाप्त करना है।

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