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कूड़े के पहाड़ में फंसी जिंदगियां...गाजीपुर लैंडफिल के पास इस हाल में रह रहे हैं लोग, देखें ग्राउंड रिपोर्ट

Delhi Ghazipur Landfill : आए दिन कूड़े के ढेर में आग लग जाती है। इससे उठने वाला धुआं कई किलोमीटर तक आवासीय एरिया में जाता है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी होती है, साथ ही प्रदूषण भी होता है। साल का हर मौसम यहां रहने वाले लोगों के लिए अलग परेशानियां लेकर आता है। बारिश होने पर कूड़ा सड़ने लगता है तो गर्मी में आग लग जाने से कूड़े का धुंआ चारों ओर फैलता है

Rajat Kumarअपडेटेड May 16, 2025 पर 3:07 PM
कूड़े के पहाड़ में फंसी जिंदगियां...गाजीपुर लैंडफिल के पास इस हाल में रह रहे हैं लोग, देखें ग्राउंड रिपोर्ट
दिल्ली के गाजीपुर कूड़े के पहाड़ के पांच किमी. के दायरे में लाखों लोग रहते हैं।

Ghazipur Landfill : "यहां हर मौसम में अलग-अलग तरह की परेशानी होती है, अभी आपने देखा न कितना धुंआ आ रहा है। इस धुएं की वजह से हम गर्मी के इस मौसम में भी कूलर तक नहीं चला पा रहे। गर्मी, धुंआ और बदबू...यहां रहना मुश्किल है। पर अपना घर छोड़कर जाएं तो जाएं कहां" - इतना कहते ही गाजीपुर लैंडफिल के पास बनी कालोनी में रहने वाली 55 वर्षीय गिरजा देवी चुप हो जाती हैं। उनके मुंह से शब्द तो नहीं निकल रहे थे पर आंखों में बेबसी और गुस्सा साफ नजर आ रहा था।

दिल्ली-मेरठ रैपिड रेल कॉरिडोर से आगे बढ़ेंगे तो आपको राजधानी के वर्तमान का भी एक चेहरा दिखेगा। आसमान में उड़ते चील-कौवे, हवा में तेज दुर्गंध, दूर से दिखता कुड़े का पहाड़ और उसमे से निकलता धुंए के बादल...ये सारी चीजें आपको याद दिला देंगी कि आप राजधानी दिल्ली के गाजीपुर लैंडफिल के पास पहुंच गए हैं।

दिल्ली में हैं तीन लैंडफिल

लैंडफिल उस एरिया को कहते हैं, जहां शहर भर का कुड़ा कचरा डाला जाता है। राजधानी दिल्ली में तीन लैंडफिल एरिया है, गाजीपुर, भलस्वा और ओखला। वैसे तो गाजीपुर के कुड़े का पहाड़ देश में ही नहीं दुनिया भर की मीडिया में चर्चा में रहता है। लेकिन उनलोगों की चर्चा काफी कम ही होती है जो इस कुड़े के पहाड़ के पास रहते हैं। गाजीपुर लैंडफिल के पांचकिलोमीटर के एरिया में लाखों लोग रहते हैं। इन लोगों की सुबह और शाम कुड़े के पहाड़ को देख कर ही होती है। जब इनसे पूछो की आप यहां क्यों रहते हो तो ये जवाब मिलता है।

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