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'जब लोगों ने खरीदा मौत का टिकट', 29 साल...अनगिनत इमारतें और आग से राख होती जिंदगियां

Delhi Malviya Nagar Fire : जब कोई अपने परिवार या दोस्तों के साथ सिनेमा हॉल, रेस्टूरेंट या किसी होटल में जाता है तो उस जगह और लोगों के बीच एक अनकहा करार होता है कि जबतक वो यहां है...सुरक्षित है। सबकुछ भूलकर वो यहां सुकून के पल बिता सकता है। 1997 के उपहार कांड से लेकर 2026 के मालवीय नगर हादसे तक...इस अनकहे करार की जगह कभी ना ठीक होने वाले सिस्टम की लापरवाही ने ले रखी है

Rajat Kumarअपडेटेड Jun 08, 2026 पर 10:16 PM
'जब लोगों ने खरीदा मौत का टिकट', 29 साल...अनगिनत इमारतें और आग से राख होती जिंदगियां
मालवीय नगर के हादसे ने एक बार फिर दिल्ली के उस भयावह अग्निकांड की याद दिला दी, जिसमें कई परिवारों की जिंदगी पूरी तरह से बदल गई

"Until justice rolls down like waters and righteousness like a mighty stream"

दिल्ली के ग्रीन पार्क में उपहार सिनेमा से थोड़ा आगे काले संगमरमर पर आपको ये लाइन लिखी दिख जाएगी। जिसका मतलब - 'समाज में तब तक शांति और समानता नहीं आ सकती, जब तक हर व्यक्ति को न्याय न मिले और सच्चाई व ईमानदारी मजबूती से कायम न हो जाए'.... जिस काले संगमरमर पर ये लाइन लिखी है, वो उपहार अग्निकांड में जान गंवाने वाले 59 लोगों की याद में बनाया गया एक स्मारक है।

29 सालों से ठहरा है वक्त

जून 1997 से जून 2026 तक बीते 29 सालें में दिल्ली में काफी कुछ बदला। शहर में ऊंची-ऊंची इमारतें बनी। कई नए मॉल और मल्टीप्लेक्स खुले। इस दौरान दिल्ली की राजनीति में भी बदलाव आया। समय के साथ फैशन और हेयरस्टाइल का ट्रेंड भी बदल गया। मौसम का मिजाज भी पहले जैसा नहीं रहा। गर्मियां पहले से ज्यादा गर्म और सर्दियां ज्यादा ठंडी महसूस होने लगीं। दिल्ली मेट्रो का नेटवर्क लगातार बढ़ता गया। इन 29 सालों में शहर और लोगों की जिंदगी में कई बदलाव आए, लेकिन कुछ लोगों के लिए समय मानो वहीं रुक गया। नीलम और शेखर कृष्णमूर्ति के लिए जिंदगी 13 जून 1997 के बाद कभी पहले जैसी नहीं रही। उनके लिए वक्त आगे बढ़ता रहा, लेकिन उस दिन की यादें आज भी वहीं ठहरी हुई हैं।

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