दिल्ली एक अंधा कुआं! 8000 से ज्यादा लोग लापता, न कोई सुराग न किसी की कोई खबर, सिर्फ सवाल और तलाश!
इस साल 1 जनवरी से 23 जुलाई तक हुई रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी दिल्ली में कुल 7,880 से ज्यादा लोगों के लापता होने के केस दर्ज हुए हैं, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। सबसे ज्यादा लापता मामलों की संख्या दिल्ली के बाहरी उत्तर जिले में सामने आई है, जहां बवाना, स्वरूप नगर और समयपुर बादली जैसे इलाकों से कुल 908 लोग गायब हैं
दिल्ली एक अंधा कुआं! 8000 से ज्यादा लोग लापता, न कोई सुराग न किसी की कोई खबर
दिल्ली देश की राजधानी और पूरे भारत का पावर सेंटर है, लेकिन इसी दिल्ली में कुछ ऐसा घट रहा है, जो बेहद ही डरावना है, जो आपको ये सोचने पर मजबूर कर सकता है कि क्या आप यहां सुरक्षित हैं? 8000 से ज्यादा चेहरे, जो इस शहर की भीड़ में कहीं खो गए हैं, कहीं गुम हो गए, जिनका कोई अता पता नहीं। इनमें भी सबसे ज्यादा बाहरी उत्तर जिले की सुनसान गलियों में 908 नाम हैं, जिनकी चीखें अब तक अनसुनी हैं। महिलाएं हों या पुरुष, हर एक लापता इंसान के पीछे छुपा है एक खौफनाक राज, जो दिल्ली की इस चमक-दमक के पीछे गुम है।
दरअसल इस साल 1 जनवरी से 23 जुलाई तक हुई रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी दिल्ली में कुल 7,880 से ज्यादा लोगों के लापता होने के केस दर्ज हुए हैं, जिनका अभी तक कोई पता नहीं चल पाया है। सबसे ज्यादा लापता मामलों की संख्या दिल्ली के बाहरी उत्तर जिले में सामने आई है, जहां बवाना, स्वरूप नगर और समयपुर बादली जैसे इलाकों से कुल 908 लोग गायब हैं। इनमें 4,753 महिलाएं और 3,133 पुरुष शामिल हैं। वहीं, न्यू दिल्ली जिले में सबसे कम 85 लापता मामलों का रिकॉर्ड मिला है, जो तिलक मार्ग, चाणक्यपुरी और संसद मार्ग जैसे हाई सिक्योरिटी इलाकों में आता है।
दिल्ली के बाकी जिलों का क्या है हाल?
दिल्ली के बाकी जिलों में भी भारी संख्या में लापता व्यक्तियों के मामले सामने आए हैं। नॉर्थ ईस्ट जिले में 730, साउथ वेस्ट में 717, साउथ ईस्ट में 689 और आउटर जिले में 675 मामले दर्ज किए गए हैं। द्वारका, उत्तर पश्चिम, पूर्वी और रोहिणी जिलों में भी 400 से ज्यादा लापता मामलों की जानकारी है। सेंट्रल दिल्ली में 363 लोग अभी तक लापता हैं, जबकि नॉर्थ में 348, साउथ में 215 और शाहदरा जिले में 201 मामले दर्ज हुए हैं।
1,486 लाशों की नहीं हुई पहचान
अभी तक लगभग 1,486 लाशें ऐसी हैं, जिन्हें कोई पहचान नहीं पाया है। इनमें ज्यादातर शव पुरुषों के हैं। सबसे ज्यादा अनजान शव नॉर्थ जिले से मिले हैं, जहां कोतवाली, सब्जी मंडी और सिविल लाइंस इलाकों में 352 शव मिले।
बाकी जिलों जैसे सेंट्रल में 113, नॉर्थ वेस्ट में 93, साउथ ईस्ट में 83, साउथ वेस्ट और नॉर्थ ईस्ट में 73-73, आउटर में 65 और न्यू दिल्ली में 55 ऐसे शव मिले हैं। सबसे कम केवल एक लाश IGI एयरपोर्ट पर मिली है।
पुलिस के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, जब कोई शव मिलता है तो पहले उसकी पहचान की कोशिश की जाती है और परिवार को सूचित किया जाता है। शव को अस्पताल के मोर्चुरी तक ले जाने का खर्चा लगभग ₹2,500 होता है। अगर किसी शव की पहचान नहीं होती या उसका परिवार नहीं आता, तो पोस्टमार्टम कराकर शव का अंतिम संस्कार किया जाता है, जिसमें फिर से ₹2,500 खर्च होते हैं।
जब तक पहुंचा परिवार बेटे का हो चुका था अंतिस संस्कार!
यह काम पुलिस या कभी-कभी गैर सरकारी संगठन (NGO) संभालते हैं। अधिकारी ने एक दुखद कहानी भी सुनाई जहां एक युवक का शव फूला हुआ था और परिवार ने बाद में एक टैटू की मदद से उसकी पहचान कराई, लेकिन तब तक शव का अंतिम संस्कार हो चुका था।
यह सारी जानकारी और आंकड़े जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क (ZIPNET) के डेटा से मिली है, जो दिल्ली समेत कई राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों से गायब व्यक्तियों और अनजान शवों की ट्रैकिंग करता है।
दिल्ली में लंबे समय से गुमशुदा व्यक्तियों की संख्या चिंताजनक रूप से अधिक रही है। फिर भी, हाल के रुझानों के अनुरूप, राष्ट्रीय राजधानी में 2025 में ऐसी घटनाओं में गिरावट देखी गई है। जोनल इंटीग्रेटेड पुलिस नेटवर्क (ज़िपनेट) के आंकड़ों के अनुसार, 1 जनवरी से 12 जुलाई के बीच, शहर में लापता व्यक्तियों के लगभग 9,200 मामले दर्ज किए गए।
Zipnet के आकड़ों की ही बात करें तो, पिछले साल 1 जनवरी 2024 से 31 दिसंबर 2024 तक 22,040 लोग लापता थे।
बच्चों की तुलना में बड़े ज्यादा हो रहे लापता!
लापता लोगों की इस संख्या में एक हैरान करने वाली बात ये है कि बच्चों की तुलना में वयस्क ज्यादा लापता हो रहे हैं, और दोनों के बीच का अनुपात बढ़ता ही जा रहा है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया, "2024 में औसतन लगभग 2,500 बच्चे लापता हुए। इस साल, फिलहाल यह संख्या थोड़ी कम होकर लगभग 1,748 रह गई है। हालांकि वास्तविक संख्या में कमी आ रही है, लेकिन लापता वयस्कों का अनुपात अभी भी काफी ज्यादा है।"
2025 में, हर लापता बच्चे के मुकाबले चार से ज्यादा वयस्क लापता होंगे। इसके उलट, पिछले साल हर लापता बच्चे पर लगभग तीन वयस्कों का रेश्यू दर्ज किया गया था—जो मामूली लेकिन गंभीर बढ़ोतरी है।
पुलिस अधिकारियों ने संख्या में गिरावट के लिए कई फैक्टर को जिम्मेदार माना है, जिनमें बढ़ती सतर्कता, एडवांस ट्रैकिंग सिस्टम और गैर सरकारी संगठनों (NGOs) के साथ बेहतर सहयोग शामिल हैं।
लापता लोगों के आंकड़ो में गिरावट, लेकिन चिंता बरकरार
2024 में भी, लापता लोगों की संख्या में कमी आई है—22,040 मामले दर्ज किए गए, जबकि 2023 में यह संख्या 24,356 थी, यानी 9.5% की गिरावट। फिर भी, रेश्यू अभी भी बहुत ज्यादा है: हर लापता व्यक्ति के मिलने पर, दो अन्य लापता रह जाते हैं।
यह स्थिति राजधानी में बढ़ते क्राइम और सुरक्षा के गंभीर सवाल खड़े करती है। हजारों लोग लापता हैं और कई शवों की पहचान नहीं हो पाई है, जो एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। पुलिस की जवाबदेही और त्वरित कार्रवाई अब अहम हो गई है, ताकि ऐसे मामलों को जल्द से जल्द सुलझाया जा सके और परिवारों को राहत मिल सके।
हालांकि, इस साल, दिल्ली पुलिस ने 8,342 लापता लोगों को बरामद किया है। पिछले साल की तुलना में यह संख्या 12,609 कम है। ये आंकड़े राहत तो देते हैं, लेकिन व्यवस्था में मौजूद खामियों को भी उजागर करते हैं।